West Bengal में कुर्बानी पर बवाल, Suvendu Adhikari को Humayun Kabir ने दी खुली चेतावनी

वहीं इस पूरे विवाद के बीच आम जनता उन्नयन पार्टी के अध्यक्ष हुमायूं कबीर ने बीजेपी और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पर सीधा हमला बोला है...मीडिया से बात करते हुए हुमायूं कबीर ने साफ-साफ कह दिया कि देश के संविधान का सम्मान सब करते हैं और हम भी करेंगे

4पीएम न्यूज नेटवर्क: पश्चिम बंगाल में इन दिनों माहौल काफी गर्म है…सड़कों पर नमाज़ पढ़ने और आने वाले त्योहार पर होने वाली कुर्बानी को लेकर राजनीति तेज हो गई है…

जहां BJP की सरकार बनते ही जिस तरह से नियम-कानूनों में बदलाव लाए जा रहे हैं…उसने एक बड़े विवाद को जन्म दे दिया है…लोग अब खुलेआम पूछ रहे हैं कि क्या ये वाकई शहर की व्यवस्था सुधारने के लिए किया जा रहा है या फिर राजनीति के तहत एक खास समुदाय को परेशान करने की कोशिश है?…

वहीं इस पूरे विवाद के बीच आम जनता उन्नयन पार्टी के अध्यक्ष हुमायूं कबीर ने बीजेपी और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पर सीधा हमला बोला है…मीडिया से बात करते हुए हुमायूं कबीर ने साफ-साफ कह दिया कि देश के संविधान का सम्मान सब करते हैं और हम भी करेंगे…लेकिन जहां बात हमारे धर्म और कुर्बानी की है…वहां मुस्लिम समाज कोई समझौता नहीं करेगा…उन्होंने कहा कि त्योहार पर कुर्बानी होकर रहेगी…चाहे वो बकरा हो, ऊंट हो या फिर गाय…जो भी पशु धर्म के हिसाब से जायज हैं…उनकी कुर्बानी दी जाएगी…हुमायूं कबीर ने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को चेतावनी देते हुए सीधे शब्दों में कहा कि आग से मत खेलो…

हुमायूं कबीर ने सरकार को चेताया कि अगर प्रशासन ने कुर्बानी को रोकने की कोशिश की…तो सरकार खुद बड़ी मुसीबत में पड़ जाएगी…उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि बंगाल में 37% से ज्यादा मुसलमान गाय का मांस खाते हैं…अगर सरकार को इससे इतनी ही दिक्कत है…तो सबसे पहले उन स्लॉटर हाउस को बंद क्यों नहीं किया जाता…जिन्हें खुद सरकार ने लाइसेंस दिया है?…उन्होंने आगे कहा कि भारत सरकार विदेशों में बीफ बेचकर करोड़ों रुपये कमा रही है, तो क्या सरकार पहले अपनी इस कमाई को बंद करेगी?…

हुमायूं कबीर ने सीधा-सीधा सुवेंदु सरकार को चेतावनी दे दी है…पश्चिम बंगाल में कुर्बानी के साथ-साथ सड़क पर नमाज़ पढ़ने का मुद्दा भी गरमाया हुआ है…हुमायूं कबीर ने कहा कि ईद या जुम्मे की नमाज के लिए सरकार को मुस्लिम समाज के लिए बड़े मैदानों का इंतजाम करना चाहिए…अगर सरकार जगह नहीं देगी…तो लोग मजबूरी में सड़क पर नमाज़ पढ़ेंगे ही……वहीं दूसरी तरफ, बीजेपी नेताओं का कहना है कि ये लड़ाई किसी धर्म के खिलाफ नहीं है, बल्कि तुष्टीकरण की राजनीति के खिलाफ है। बीजेपी का तर्क है कि सऊदी अरब, यूएई या ईरान जैसे मुस्लिम देशों में भी सड़कों पर नमाज़ पढ़ने की इजाजत नहीं है…इसलिए इसे धर्म से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए…

इसी गहमागहमी के बीच पश्चिम बंगाल सरकार ने एक नया सरकारी नोटिस जारी कर दिया है…इस नोटिस में साफ कहा गया है कि बिना फिटनेस सर्टिफिकेट यानी पशु के स्वस्थ होने का प्रमाण पत्र के बिना कोई भी गाय, बैल या भैंस की कुर्बानी नहीं दे सकता…27 मई को आने वाली बकरीद से ठीक पहले जारी किए गए इस आदेश ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है…नए नियम के मुताबिक, इस सर्टिफिकेट पर दो अलग-अलग अफसरों के दस्तखत होने जरूरी हैं…अगर कोई इस नियम को नहीं मानता…तो उसे कानूनन जुर्म माना जाएगा…जिसके लिए 6 महीने की जेल और एक हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है…त्योहार के ठीक पहले ऐसे सख्त नियम से लोगों में डर का माहौल है…

इस नए नियम का असर सड़कों पर भी दिखने लगा है…कोलकाता के राजा बाजार इलाके में उस समय भारी हंगामा हो गया…जब जुम्मे की नमाज के दौरान लोग हमेशा की तरह सड़क पर बैठकर नमाज़ पढ़ रहे थे…तभी बीजेपी सरकार का आदेश लागू करवाने के लिए पुलिस वहां पहुंच गई और नमाज पढ़ रहे लोगों को जबरन सड़क से हटाने लगी…इस बात पर नमाज़ी भड़क गए और वहीं अड़ गए कि वे नमाज़ पूरी करके ही उठेंगे…पुलिस और आम जनता के बीच काफी देर तक बहस और धक्का-मुक्की हुई…जिससे पूरे इलाके में तनाव फैल गया….

राजा बाजार की घटना के बाद वहां के लोगों ने साफ कहा कि मस्जिदों में जगह कम होने की वजह से लोग सालों से जुम्मे के दिन सड़कों पर नमाज़ पढ़ते आ रहे हैं…ये कोई आज की बात नहीं है, बल्कि एक पुरानी परंपरा है…इसी बीच प्रदर्शन कर रहे लोगों ने नाराजगी जताते हुए नारे लगाए और कहा कि…शुभेंदु अधिकारी चाहें तो बंगाल छोड़ दें…लेकिन हम अपनी धार्मिक परंपरा को बंद नहीं करेंगे…राजा बाजार में हुई इस नारेबाजी ने साफ कर दिया कि यह मामला अब सिर्फ ट्रैफिक या कानून का नहीं रह गया है…बल्कि लोगों की भावनाओं से जुड़ चुका है….

कोलकाता के राजा बाजार में जो कुछ भी हुआ…उसने नई सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं…सालों से जिस परंपरा के तहत लोग मस्जिदों में जगह न होने पर सड़क के किनारे शांति से नमाज़ पढ़ लेते थे…उसे नई सरकार आते ही अचानक गैरकानूनी बता दिया गया…ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या ये वाकई सिर्फ कानून व्यवस्था का मामला है या इसके पीछे कोई राजनीतिक एजेंडा चल रहा है?…मुख्यमंत्री पद संभालते ही शुभेंदु अधिकारी ने जिस तरह सड़कों पर धार्मिक आयोजनों को रोकने का आदेश दिया…वो कागजों पर तो सबके लिए बराबर दिखता है…लेकिन जमीनी हकीकत में इसका सीधा असर सिर्फ मुस्लिम समुदाय पर पड़ता दिख रहा है…

इस विवाद के बाद नेताओं की बयानबाजी ने आग में घी डालने का काम किया है…बीजेपी विधायक अर्जुन सिंह ने कड़े शब्दों में कहा कि नमाज सिर्फ मस्जिदों के अंदर ही पढ़ी जानी चाहिए…सड़क पर किसी भी धार्मिक भीड़ की इजाजत नहीं होगी…उन्होंने कोलकाता के रेड रोड पर होने वाली बड़ी नमाज़ का भी जिक्र किया…वहीं दूसरी तरफ, मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इसे अपनी धार्मिक आज़ादी पर सीधा हमला बताया है…लोगों का कहना है कि चुनाव आते-जाते रहेंगे और नेता बदलते रहेंगे…लेकिन हम अपनी परंपरा नहीं बदलेंगे…ये लड़ाई अब सिर्फ पुलिस और जनता की नहीं, बल्कि दो अलग-अलग विचारों की बन चुकी है…

इस पूरे मामले को और ज्यादा भड़काने का काम कोलकाता की काशीपुर बेलगाछिया सीट से बीजेपी विधायक रितेश तिवारी के एक बयान ने किया। उन्होंने एक मंच से खुलेआम मुसलमानों के खिलाफ बोलते हुए कहा कि भोलेनाथ की कसम, एक काम मुसलमानों के लिए नहीं करूंगा….एक जिम्मेदार पद पर बैठे नेता द्वारा सार्वजनिक रूप से किसी एक समुदाय के खिलाफ इस तरह की नफरत भरी भाषा का इस्तेमाल करना ये साफ कर देता है कि बंगाल में जो प्रशासनिक सख्ती दिखाई जा रही है…उसकी असली वजह क्या है…ये बयान साबित करता है कि विकास की बातें सिर्फ दिखाने के लिए हैं…जबकि अंदरूनी राजनीति सिर्फ और सिर्फ समाज को बांटने के एजेंडे पर चल रही है…

पश्चिम बंगाल में इस तरह का माहौल साफ इशारा करता है कि आने वाले समय में राज्य का माहौल और बिगड़ सकता है…जहां परंपराओं को अचानक कानून का डर दिखाकर रोकना, त्योहारों से ठीक पहले कड़े नियम लागू करना और नेताओं द्वारा मंच से एक खास समुदाय के बहिष्कार की कसमें खाना…ये किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र के लिए सही नहीं है…अगर सरकार वाकई निष्पक्ष होती…तो सड़कों पर नमाज़ रोकने से पहले लोगों को कोई दूसरी बड़ी जगह मुहैया कराती…लेकिन बिना किसी तैयारी के सीधे पुलिस को आगे कर देना और दूसरी तरफ नफरत भरे बयान देना ये साफ दिखाता है कि बंगाल की राजनीति इस समय सुधार के नाम पर सिर्फ वोटों का ध्रुवीकरण करने के रास्ते पर चल पड़ी है..

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