सरकार-विपक्ष के बीच छिड़ी तीखी बहस

विपक्ष ने सरकार की विदेश नीति को असंतोषजनक करार दिया

  • पश्चिम एशिया संकट पर हुई सर्वदलीय बैठक रही हंगामेदार
  • लोस और रास में पश्चिम एशिया संकट को लेकर चर्चा हो

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। मिडल ईस्ट में जारी तनाव और युद्ध की स्थिति पर चर्चा करने के लिए संसद परिसर में बुलाई गई सर्वदलीय बैठक हंगामेदार रही। एक ओर जहां सरकार ने भारत के रुख को स्पष्ट करते हुए पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने सरकार की विदेश नीति को असंतोषजनक करार दिया। बैठक में सरकार की ओर से जानकारी दी गई कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से फोन पर हुई बातचीत में पश्चिम एशिया के युद्ध को तुरंत समाप्त करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि इस युद्ध से वैश्विक अर्थव्यवस्था और मानवता को नुकसान हो रहा है, इसलिए इसे जल्द खत्म होना चाहिए।
सूत्रों के अनुसार, सरकार ने विपक्ष के इस आरोप का खंडन किया कि भारत सरकार इस मामले पर चुप है और कहा कि ‘‘हम टिप्पणी कर रहे हैं और जवाब दे रहे हैं।’’ सरकार का पक्ष था कि जब ईरान दूतावास खोला गया, तो विदेश सचिव ने तुरंत वहां दौरा किया और शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने पर जल्द शोक व्यक्त न करके नैतिक कमजोरी दिखाई है। विपक्ष ने कहा कि इस मामले से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सरकार का जवाब संतोषजनक नहीं था। उन्होंने यह मांग फिर दोहराई कि लोकसभा में नियम 193 और राज्यसभा में नियम 176 के तहत पश्चिम एशिया संकट को लेकर चर्चा होनी चाहिए। सर्वदलीय बैठक के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तारिक अनवर ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘सरकार की ओर से स्पष्टीकरण देने की कोशिश हुई जो संतोषजनक नहीं है। हम लोगों की मांग है कि लोकसभा और राज्यसभा में चर्चा होनी चाहिए, उसके बाद लोगों को संतुष्टि होगी। उनका कहना था कि बहुत सारे मुद्दे थे, जिन पर सरकार का जवाब संतोषजनक नहीं था। उन्होंने यह भी कहा, ‘‘पाकिस्तान जो हमसे हर तरह से कमजोर है, वो मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और हम मूकदर्शक बने हुए हैं।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक

संसद भवन परिसर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई बैठक में सरकार की तरफ से गृह मंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू शामिल हुए। विपक्ष की तरफ से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तारिक अनवर एवं मुकुल वासनिक, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शप) की नेता सुप्रिया सुले, समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव, राजद के अभय सिन्हा और कई अन्य नेता शामिल हुए। तृणमूल कांग्रेस इस बैठक में शामिल नहीं हुई।

पाक पर दलाल राष्ट्र का तंज

बैठक का सबसे चर्चित हिस्सा वह रहा जब सरकार ने पाकिस्तान के मध्यस्थता केप्रयासों को सिरे से खारिज कर दिया। सूत्रों के मुताबिक, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान का अमेरिका द्वारा 1981 से केवल इस्तेमाल किया जा रहा है। पाकिस्तान को दलाल राष्ट्र करार देते हुए सरकार ने कहा कि हम दलाल राष्ट्र नहीं हैं। हमारे प्रयास ठोस और स्वतंत्र हैं। यह बयान विपक्ष के उस आरोप के जवाब में आया जिसमें कहा गया था कि पाकिस्तान जैसा कमजोर देश मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है जबकि भारत मूकदर्शक बना हुआ है।

केंद्र सरकार ट्रंप से नहीं विपक्ष से करे बात : राउत

शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश नीति संबंधी दृष्टिकोण की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को अंतरराष्ट्रीय वार्ताओं के बजाय घरेलू राजनीतिक परामर्श पर अधिक ध्यान देना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति के बीच हाल ही में हुई फोन कॉल पर टिप्पणी करते हुए यूबीटी सांसद ने कहा कि मध्य पूर्व संकट जैसे वैश्विक मुद्दों पर डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत करने के बजाय मोदी को भारत में विपक्ष से बात करनी चाहिए, जिससे बेहतर परिणाम मिलेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप ऐसे व्यवहार कर रहे हैं मानो वे मोदी के बॉस हों। संजय राउत ने कहा कि ट्रम्प से बात करने के बजाय, मोदी को देश के विपक्ष से बात करनी चाहिए; उन्हें उनसे बेहतर सुझाव मिलेंगे। ट्रम्प तो मोदी के बॉस जैसे हैं। राउत ने मौजूदा वैश्विक संघर्षों में भारत की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पाकिस्तान की कूटनीतिक स्थिति का जिक्र किया और कहा कि पाकिस्तान ने ट्रंप के साथ बातचीत में समझौता करने की इच्छा दिखाई है, जिसकी सराहना की जा रही है।

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