सरकार ने 4PM की राह में बोए कांटे, उग आया जनता का भरोसा

लगातार, हर बार 4PM चैंपियन

  • एक नहीं 4PM के दो-दो चैनल देश के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले चैनलों की सूची में शामिल
  • डाटा बीईंग की रिपोर्ट के मुताबिक 4PM साढ़े तीन साल से देश का नंबर 1 राजनीतिक चैनल

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। इतिहास की सबसे बड़ी विडंबनाओं में एक यह भी रही है कि सत्ता ने जब-जब किसी आवाज को रोकने की कोशिश की है वही आवाज पहले से कहीं अधिक दूर तक सुनाई दी है। किताबों पर प्रतिबंध लगे, अखबारों पर ताले जड़े गए प्रसारण रोके गए मंच छीन लिए गए लेकिन विचार कभी कैद नहीं हुए। लोकतंत्र की असली ताकत किसी सरकारी आदेश में नहीं बल्कि उस जनता के भरोसे में होती है जो तय करती है कि वह किसे सुनेगी और किसे नहीं। 4PM के साथ भी यही हुआ सरकार ने जिस कसरत के साथ उत्पीडऩात्मक कार्रवाई की उससे दोगुनी शक्ति के साथ देश और दुनिया के पाठकों ने 4PM की आवाज को बुंलद किया। डाटा बीईंग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साढ़े तीन वर्षों से 4PM नंबर वन पोजिशन पर है। गौर करने वाली बात यह दूसरी पोजिशन पर जो चैनल है वह हमारे आधे से भी कम व्यूज पर है। 4PM पर लोगों का भरोसा पहले से ज्यादा बढ़ रहा है और यह डिजिटल मीडिया में देश की सशक्त आवाज बनकर उभर रहा है और यही वजह है कि हर दौर में यह सवाल सत्ता से बड़ा साबित हुआ है कि जनता किस पर विश्वास करती है। आदेश सत्ता लिख सकती है लेकिन इतिहास हमेशा जनता लिखती है।

दीवारें रास्ता रोक सकती है इरादे नहीं : संजय शर्मा

आज मैं किसी जीत का उत्सव मनाने के लिए नहीं लिख रहा हूं। मैं उस भरोसे को प्रणाम करने के लिए लिख रहा हूं जिसे आपने हर मुश्किल घड़ी में हमारे साथ खड़ा रखा। मेरे लिए पत्रकारिता कभी आसान रास्ता नहीं रही। आसान रास्ता वह होता है जहां सवाल कम हों और समझौते ज्यादा। हमने कठिन रास्ता चुना जहां हर दिन नये सवाल थे नयी चुनौतियां थीं और हर चुनौती के साथ अपने सिद्धांतों पर टिके रहने की परीक्षा भी थी। इस यात्रा में हमने प्रशंसा भी देखी आलोचना भी सुनी और ऐसे क्षण भी आए जब लगा कि हमारे सामने खड़ी दीवार बहुत ऊंची है। लेकिन हर बार आपने हमें यह विश्वास दिलाया कि दीवारें रास्ता रोक सकती हैं इरादे नहीं। मैं अपनी पूरी टीम से कहना चाहता हूं कि याद रखिए हमारा सबसे बड़ा पुरस्कार कोई ट्रॉफी कोई रैंकिंग या कोई रिकॉर्ड नहीं है। हमारी सबसे बड़ी ताकत वह दर्शक है जो हर दिन अपना समय हमें देता है। वही हमारा असली संपादक है वही हमारा सबसे बड़ा आलोचक है और वही हमारी सबसे बड़ी प्रेरणा भी है। अगर उसका विश्वास हमारे साथ है तो हमारी जिम्मेदारी पहले से कहीं अधिक बढ़ जाती है। हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति से नहीं है। हमारी प्रतिबद्धता पत्रकारिता के उन मूल्यों से है जिनमें सवाल पूछना कमजोरी नहीं बल्कि लोकतंत्र की ताकत माना जाता है। हमारा उद्देश्य किसी के पक्ष या विपक्ष में खड़ा होना नहीं बल्कि उन मुद्दों को सामने लाना है जिन पर जनता जवाब चाहती है। यही पत्रकारिता की आत्मा है और यही हमारी दिशा भी रहेगी। मैं अपने युवा साथियों से विशेष रूप से कहना चाहता हूं कि डर और दबाव हर दौर में रहे हैं लेकिन इतिहास ने हमेशा उन लोगों को याद रखा जिन्होंने कठिन समय में भी अपने कर्तव्य को नहीं छोड़ा। इसलिए अपने शब्दों को जिम्मेदारी के साथ लिखिए अपने तथ्यों को पूरी ईमानदारी से परखिए और अपनी आवाज को संयम के साथ बुलंद रखिए। विश्वास कमाने में वर्षों लगते हैं लेकिन उसे खोने में एक पल भी नहीं लगता।

मंजिल नहीं एक नई शुरुआत

आज यदि हमें लोगों का स्नेह और समर्थन मिला है तो उसे मंजिल मत समझिए। इसे एक नई शुरुआत मानिए। हर उपलब्धि के साथ हमारी जवाबदेही और बढ़ती है। हमें पहले से बेहतर बनना है अधिक सटीक बनना है अधिक निष्पक्ष बनने का प्रयास करना है और जनता के प्रति अपनी जवाबदेही को हर दिन साबित करना है। मैं उन सभी दर्शकों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं जिन्होंने हमें देखा परखा सराहा आलोचना की और फिर भी संवाद बनाए रखा। लोकतंत्र में यही संवाद सबसे बड़ी शक्ति है। हम उसी विश्वास को अपनी सबसे बड़ी पूंजी मानते हैं। हम यह संकल्प लेते है? कि परिस्थितियाँ कैसी भी हों हम सत्य की खोज तथ्यों की जांच और जनता के प्रति अपनी जिम्मेदारी से पीछे नहीं हटेंगे। हमारी पहचान किसी शोर से नहीं बल्कि हमारे काम की गुणवत्ता हमारी विश्वसनीयता और हमारे साहस से बनेगी। आपका विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। उसी विश्वास को निभाना हमारा सबसे बड़ा कर्तव्य है।

बोलते हैं आंकड़े गवाही देती है एजेंसिया

डिजिटल युग में किसी मंच की पहुंच को देखने के लिए एजेंसी डाटा बीईंग के ताजा आंकड़े यह बताने के लिए काफी हैं कि कौन सा मंच अधिक दर्शकों तक पहुंच रहा है। किस प्लेटफार्म का प्रभाव घटा या फिर बड़ा है और देश की जनता किस चैनल पर ज्यादा भरोसा कर रही है। गौरतलब है कि यदि कोई मीडिया हाउस लंबे समय तक दर्शकों का ध्यान बनाए रखता है तो यह उसके लिए निश्चित रूप से एक उपलब्धि मानी जा सकती है। लेकिन उससे भी बड़ी चुनौती उस भरोसे को लगातार बनाए रखना होती है। 4PM इस भरोसे पर कायम है और वादा है कि आगे भी उसी भरोसे के साथ खड़ा रहेगा। यह भरोसा एक दिन में नहीं बल्कि वर्षों के संघर्षों का परिणाम है। संपादक संजय शर्मा के बगावती तेवर, जिद सच की और किसी भी सूरत में समझौता न करने की इच्छा शक्ति ही संस्थान का मूल मंत्र है। 4PM की राह में कांटे बोए गये, डराया गया, प्रलोभन दिये गये, चैनल को बैन किया गया एक बार नहीं दो-दो बार। लेकिन संपादक संजय शर्मा ने संघर्ष का रास्ता नहीं छोड़ा और माननीय न्यायलय से राहत मिली। किसी भी मीडिया हाउस के लिए सबसे कठिन काम शीर्ष पर पहुंचना नहीं बल्कि वहां बने रहना होता है। बदलती तकनीक, बदलती दर्शक-रुचि और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच हर दिन अपनी विश्वसनीयता सिद्ध करनी पड़ती है। ईश्वर का करम और पाठकों की दुआओं के साथ 4PM इन सभी चुनौतियों को सफलतापूर्व पार कर रहा है और आगे भी करता रहेगा क्योकि भविष्य उन्हीं संस्थानों का होगा जो तेज होने के साथ साथ सटीक भी हों। प्रभावशाली होने के साथ साथ जिम्मेदार भी और और लोकप्रिय होने के साथ साथ विश्वसनीय भी हो।

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