अमेरिका-ईरान सीजफायर का काउंटडाउन शुरू, 28 मार्च को ट्रंप करेंगे बड़ा ऐलान

इज़राइल जो खुद को 'तकनीक का बादशाह' कहता था, आज एक छोटे से पक्षी से सहमा हुआ है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: क्या इज़राइल पर कुदरत का कहर टूट पड़ा है? क्या तेल अवीव की गलियों में मौत का साया मंडरा रहा है? आज तेल अवीव से ऐसी तस्वीरें आई हैं जिन्हें देखकर रूह कांप जाए।

हज़ारों काले कौवों ने इज़राइल के आसमान को घेर लिया है। जहाँ पर कौवों का यह बड़ा समूह बैठ रहा है, वहां भयंकर हालात पैदा हो जा रहे हैं। कई लोग इसे इज़राइल की बड़ी हार का संकेत मान रहे हैं, तो ‘रब्बी’ यानी यहूदी धर्मगुरु इसे इज़राइल की टूटती हिम्मत का प्रतीक बता रहे हैं।

लेकिन असली धमाका तो कूटनीति के गलियारों में हुआ है। खबर आ रही है कि 28 मार्च को डोनाल्ड ट्रंप सीज़फायर का बड़ा ऐलान कर सकते हैं। एक तरफ इज़राइल ट्रंप के इस संभावित ऐलान से बिलबिला उठा है, तो दूसरी तरफ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ‘परमाणु तबाही’ की वो चेतावनी दी है जिसने पूरी दुनिया के होश उड़ा दिए हैं। और सबसे बड़ी खबर ईरान से सामने आई है—दावा किया गया है कि अगर खर्ग आईलैंड पर हमला हुआ, तो ईरान अब ‘बाब अल-मंदेब’ को भी बंद कर देगा।

इज़राइल जो खुद को ‘तकनीक का बादशाह’ कहता था, आज एक छोटे से पक्षी से सहमा हुआ है। तेल अवीव के आसमान में हज़ारों कौवों ने डेरा डाल लिया है। सोशल मीडिया पर इज़राइली नागरिक लिख रहे हैं कि “शायद हमारी बर्बादी का वक्त करीब है।”

वैज्ञानिक इसे जंगी धमाकों की वजह से पक्षियों का पलायन कह रहे हैं, लेकिन ज़मीन पर माहौल कुछ और है। जिस शहर में कभी सुख-शांति थी, आज वहां सिर्फ सायरन की आवाज़ें और इन परिंदों का शोर है। नेतन्याहू जो ‘टोटल विक्ट्री’ का दावा कर रहे थे, आज उनके अपने शहर के लोग बंकरों में दुबके हुए हैं। क्या यह कुदरत का इशारा है कि अब इज़राइल को अपनी ज़िद छोड़ देनी चाहिए?

असल में, काले कौवों के इस झुंड को इज़राइल के लोग बाइबल की कथाओं से जोड़कर देख रहे हैं। बाइबल में काले कौवों का ज़िक्र सुनसान और विनाश के संदर्भ में कई जगहों पर आता है। सोशल मीडिया पर कई ऐसी रिपोर्ट्स और दावे हैं कि काले कौवों के झुंड के आने का मतलब उस जगह के वीरान होने से है। हालांकि, धार्मिक रूढ़ियों से अलग काफी लोगों का मानना यह है कि लगातार सायरन और धमाकों के बीच पक्षी परेशान हो गए हैं और इस वजह से इधर-उधर भाग रहे हैं। लेकिन धार्मिक बातें सोशल मीडिया पर ज़्यादा प्रचारित हो रही हैं।

हालांकि, एक ओर जहाँ काले कौवों के झुंड सुर्खियों में हैं, तो वहीं दूसरी ओर अचानक रूस के राष्ट्रपति पुतिन एक्शन में आ गए हैं। राष्ट्रपति पुतिन बुरी तरह भड़क गए हैं। रूस ने साफ़ कह दिया है कि अगर अमेरिका और नाटो ने इज़राइल के बचाव में सीधे तौर पर हाथ डाला या ईरान के तेल ठिकानों को बर्बाद किया, तो रूस पीछे नहीं हटेगा। आपको बता दें कि ईरान के बुशेहर परमाणु संयंत्र के पास हुए दूसरे हमले को लेकर रूस ने अमेरिका और इज़राइल पर गंभीर आरोप लगाए हैं। रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा कि ये हमले जानबूझकर ‘परमाणु तबाही’ भड़काने की कोशिश हैं।

रूस ने चेतावनी दी कि अगर इस प्लांट को नुकसान पहुँचा, तो इसका असर पूरे क्षेत्र में विनाशकारी हो सकता है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि रूस को अपने कई कर्मचारियों को वहां से निकालना पड़ा है। रूस का मानना है कि ट्रंप और नेतन्याहू की जोड़ी पूरी दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की तरफ धकेल रही है। पुतिन की यह चेतावनी महज़ धमकी नहीं है। ऐसे में ट्रंप जो कल तक ‘बुलिंग’ कर रहे थे, अब पुतिन की इस सख्ती के बाद उनके पसीने छूट रहे हैं। व्हाइट हाउस समझ चुका है कि अगर रूस इस जंग में कूदा, तो अमेरिका का नक्शा बदल जाएगा।

इसी बीच वह खबर आई है जो नेतन्याहू की रातों की नींद हराम कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच 28 मार्च को सीज़फायर का ऐलान हो सकता है। ट्रंप प्रशासन को समझ आ गया है कि 27 दिन की जंग में इज़राइल को सिर्फ और सिर्फ बर्बादी मिली है। अर्थव्यवस्था डूब रही है और कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार चली गई हैं।

ट्रंप अब अपनी साख बचाने के लिए इस युद्ध को रोकना चाहते हैं। लेकिन नेतन्याहू इस सीज़फायर के सख्त खिलाफ हैं। उन्हें डर है कि अगर जंग रुकी, तो उन्हें जेल जाना पड़ेगा। इसीलिए इज़राइल के अंदर ट्रंप के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा है। ट्रंप एक तरफ पाकिस्तान के ज़रिए ईरान को प्रपोज़ल भेज रहे हैं, तो दूसरी तरफ नेतन्याहू को चुप रहने की हिदायत दे रहे हैं।

जहाँ एक ओर ट्रंप सुलह और सीज़फायर की सुगबुगाहट फैलाए हुए हैं, तो वहीं दूसरी ओर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव अब सीधे सैन्य टकराव की तरफ बढ़ता दिख रहा है। खाड़ी के अहम इलाके खर्ग आईलैंड को लेकर बड़ा खेल शुरू हो चुका है, जहाँ से ईरान अपने करीब 90 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात करता है।

CNN की रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने इस आईलैंड को युद्ध के किले में बदल दिया है। यहाँ अतिरिक्त सैनिक तैनात किए गए हैं, एयर डिफेंस सिस्टम लगाए गए हैं और सबसे खतरनाक बात यह कि किनारों पर एंटी-पर्सनल और एंटी-आर्मर माइन्स बिछा दी गई हैं। यानी अगर अमेरिकी सेना यहाँ उतरती है, तो सीधे मौत के जाल में फंस सकती है।

बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टीम इस छोटे से द्वीप पर कब्ज़ा करने के विकल्प पर विचार कर रही है। मकसद है ईरान पर दबाव बनाकर ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को फिर से खोलने के लिए मजबूर करना। लेकिन सैन्य विशेषज्ञ इस प्लान को बेहद जोखिम भरा बता रहे हैं। डिफेंस एक्सपर्ट्स का साफ़ कहना है कि खर्ग आईलैंड पर ज़मीनी ऑपरेशन का मतलब भारी अमेरिकी नुकसान हो सकता है। ईरान ने हाल ही में कंधे से दागे जाने वाले मिसाइल सिस्टम भी यहाँ तैनात किए हैं, जो हेलीकॉप्टर और फाइटर जेट्स के लिए बड़ा खतरा हैं।

इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री ने खुली धमकी दी है। उन्होंने कहा है कि जहाँ भी अमेरिकी हित दिखेंगे, वहां हमला किया जाएगा, और जो देश अमेरिका का साथ देगा, वह भी निशाने पर होगा। इस बयान ने पूरे इलाके में दहशत और तनाव बढ़ा दिया है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि अमेरिका को अपने ‘स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिज़र्व’ से तेल निकालना पड़ रहा है। होर्मुज बंद होने से वैश्विक बाज़ार में तेल की कीमतें झटके खा रही हैं।

ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इज़राइल जंग को और बढ़ाते हैं और उसके द्वीपों (जैसे खर्ग द्वीप) पर हमला करते हैं, तो वह ‘बाब अल-मंदेब’ स्ट्रेट को बंद कर सकता है। यह एक संकरा समुद्री रास्ता है, जहाँ से होकर जहाज़ स्वेज नहर की तरफ जाते हैं। ईरान पहले ही होर्मुज स्ट्रेट पर दबाव बनाए हुए है, जहाँ से दुनिया का लगभग पाँचवाँ हिस्सा तेल गुज़रता है। अगर बाब-अल-मंदेब में भी रुकावट आती है, तो मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष का आर्थिक असर और बढ़ जाएगा।

दुनिया के समुद्री तेल का करीब 12 प्रतिशत इसी रास्ते से गुज़रता है, जो लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ता है। यह दुनिया का चौथा सबसे बड़ा शिपिंग रूट है। यह यमन के दक्षिण-पश्चिम में स्थित है, जहाँ ईरान समर्थित हूती मौजूद हैं। ईरान ने साफ़ कर दिया है कि अगर 28 मार्च तक इज़राइल ने अपनी हरकतें बंद नहीं कीं, तो दुनिया का सारा समुद्री व्यापार ठप कर दिया जाएगा। माना जा रहा है कि अगर बाब अल-मंदेब और होर्मुज दोनों बंद हो गए, तो अमेरिका और यूरोप के घरों में अंधेरा छा जाएगा। ईरान की यह रणनीति ट्रंप को घुटनों पर लाने के लिए काफी है।

इसी बीच एक सनसनीखेज दावा सामने आया है। दावा है कि इज़राइल ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची को निशाना बनाने वाला था। लेकिन ऐन वक्त पर पाकिस्तान ने दखल दिया। पाकिस्तान ने इज़राइल और अमेरिका को कड़ा संदेश भेजा कि अगर अराघची को कुछ भी हुआ, तो पाकिस्तान इस जंग में ईरान के साथ खुलकर खड़ा हो जाएगा।

इसी दबाव की वजह से इज़राइल ने अपना हाथ पीछे खींच लिया। यह दिखाता है कि इस्लामी मुल्क अब एकजुट हो रहे हैं और ट्रंप की धौंस अब काम नहीं कर रही। पाकिस्तान के कहने पर इज़राइल का झुकना नेतन्याहू के लिए किसी अपमान से कम नहीं है।

ऐसे में साफ़ है कि तेल अवीव में मंडराते कौवे हों या पुतिन की परमाणु चेतावनी, सब एक ही तरफ इशारा कर रहे हैं— ट्रंप और नेतन्याहू का खेल अब खत्म होने वाला है। 28 मार्च की तारीख इस जंग का भविष्य तय करेगी। एक तरफ ईरान की बारूदी ताकत है और दूसरी तरफ रूस का समर्थन। अमेरिका अब अलग-थलग पड़ चुका है।

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