मिर्जापुर में बीजेपी की अंदरूनी कलह आई सामने? आमंत्रण पत्र से जिलाध्यक्ष और विधायक का नाम गायब होने पर मचा बवाल
मिर्जापुर नगर पालिका के ‘स्वर्णिम तीन वर्ष’ कार्यक्रम का आमंत्रण पत्र विवादों में आ गया। पहले निमंत्रण पत्र से बीजेपी जिलाध्यक्ष और चुनार विधायक का नाम गायब होने पर पार्टी में नाराजगी बढ़ी। सोशल मीडिया पर मामला वायरल होने के बाद दूसरा कार्ड जारी किया गया।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मिर्जापुर नगर पालिका परिषद अध्यक्ष के तीन वर्ष पूरे होने पर आयोजित होने जा रहे भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘विंध्य स्वर संध्या’ ने कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। कार्यक्रम के पहले जारी किए गए आमंत्रण पत्र से बीजेपी जिलाध्यक्ष और चुनार विधायक का नाम गायब होने के बाद मामला तूल पकड़ गया। सोशल मीडिया पर विवाद बढ़ने और पार्टी कार्यकर्ताओं की नाराजगी सामने आने के बाद आयोजकों ने आनन-फानन में दूसरा आमंत्रण पत्र जारी कर स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन तब तक मामला चर्चा का बड़ा विषय बन चुका था।
पहले निमंत्रण पत्र में नहीं थे बीजेपी जिलाध्यक्ष और चुनार विधायक
नगर पालिका परिषद मीरजापुर अध्यक्ष के तीन वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर इसे ‘स्वर्णिम तीन वर्ष’ का नाम देते हुए 27 मई 2026 को फरहान घाट पर ‘विंध्य स्वर संध्या’ कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में पूर्व उपमुख्यमंत्री डॉ. दिनेश शर्मा को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। इसके अलावा जिले के सांसद, एमएलसी, विभिन्न विधायकों और जिला पंचायत अध्यक्ष सहित कई जनप्रतिनिधियों के नाम भी आमंत्रण पत्र में प्रकाशित किए गए थे। हालांकि, जब पहला आमंत्रण पत्र सामने आया तो उसमें बीजेपी जिलाध्यक्ष लालबहादुर सरोज और चुनार विधायक अनुराग सिंह का नाम नहीं था। यह बात सामने आते ही पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गईं।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ मामला
आमंत्रण पत्र की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होते ही राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जाने लगीं। कई लोगों ने इसे सामान्य भूल मानने से इनकार करते हुए पार्टी के भीतर गुटबाजी से जोड़कर देखना शुरू कर दिया। सूत्रों के मुताबिक, मामला बढ़ता देख आयोजकों में भी खलबली मच गई और तुरंत दूसरा आमंत्रण पत्र जारी किया गया, जिसमें दोनों नेताओं के नाम जोड़ दिए गए। लेकिन तब तक पार्टी के भीतर नाराजगी और चर्चा का माहौल बन चुका था।
बीजेपी जिलाध्यक्ष ने जताई नाराजगी
सूत्रों के अनुसार बीजेपी जिलाध्यक्ष लालबहादुर सरोज ने इस मामले को गंभीरता से लिया और नगर पालिका अध्यक्ष को लेकर नाराजगी भी जताई। बताया जा रहा है कि इसके बाद नगर पालिका अध्यक्ष ने व्यक्तिगत रूप से पहुंचकर इसे “मानवीय भूल” बताते हुए स्थिति संभालने की कोशिश की।
हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी बड़े सरकारी और राजनीतिक आयोजन के आमंत्रण पत्र में पार्टी के प्रमुख पदाधिकारियों का नाम छूट जाना सामान्य प्रशासनिक चूक से ज्यादा बड़ा मामला माना जाता है।
पार्टी के भीतर गुटबाजी की चर्चा तेज
बीजेपी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं और पुराने नेताओं की लगातार अनदेखी हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग सत्ता के प्रभाव में संगठन की मूल भावना से हटकर व्यक्तिगत राजनीति को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के लिए वर्षों से काम करने वाले नेताओं को धीरे-धीरे हाशिए पर धकेला जा रहा है, जबकि सत्ता का लाभ उठाने वाले लोग संगठन में प्रभावशाली बने हुए हैं।
चट्टी-चौराहों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा
पूर्व डिप्टी सीएम डॉ. दिनेश शर्मा के जिले में आगमन और बड़े स्तर पर आयोजित हो रहे कार्यक्रम के बीच यह विवाद अब आम लोगों के बीच भी चर्चा का विषय बन गया है। शहर के राजनीतिक जानकार इसे सिर्फ एक प्रोटोकॉल की चूक नहीं बल्कि पार्टी के अंदर चल रही खींचतान का संकेत मान रहे हैं। फिलहाल आयोजकों की ओर से दूसरे आमंत्रण पत्र के जरिए विवाद शांत करने की कोशिश जरूर की गई है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने मिर्जापुर की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।
रिपोर्ट – संतोष देव गिरी
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