ईरान युद्ध पर बड़ा फैसला संभव, क्या ट्रंप करेंगे सीजफायर का ऐलान?
ट्रंप पहले ही ये इशारा कर चुके हैं कि अमेरिका अपने कई सैन्य लक्ष्यों को हासिल कर चुका है...

4pm न्यूज नेटवर्क: मिडिल ईस्ट में चल रही जंग ने अब पूरी दुनिया की सांसें थाम दी हैं…लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा चर्चा जिस नाम की हो रही है…वो है डोनाल्ड ट्रंप की…जो कभी खुद को दुनिया का सबसे ताकतवर नेता बताते थे…आज उन्हीं के फैसलों पर सवाल उठ रहे हैं…हालात ऐसे बनते दिखाई दे रहे हैं कि लोग कहने लगे हैं कि क्या सच में ट्रंप ने ईरान के सामने घुटने टेक दिए?…….तो आखिर क्यों ईरान के सामने ट्रंप के घुटने टेकने की होने लगी बात…..
सबसे पहले आप ये खबर देखिए…लिखा है…हो सकता है ऐलान…क्या ईरान युद्ध खत्म करने का ऐलान करने जा रहे हैं ट्रंप ?…दरअसल, मिडिल ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष के बीच पूरी दुनिया की नजरें अब डोनाल्ड ट्रंप पर टिकी हैं…खबर है कि ट्रंप 2 अप्रैल की सुबह राष्ट्र को संबोधित करने वाले हैं…जिसमें Iran के साथ चल रहे युद्ध को लेकर बड़ा ऐलान हो सकता है…माना जा रहा है कि ये संबोधन सीजफायर या किसी शांति समझौते की दिशा में अहम संकेत दे सकता है…ट्रंप पहले ही ये इशारा कर चुके हैं कि अमेरिका अपने कई सैन्य लक्ष्यों को हासिल कर चुका है…वहीं, दूसरी तरफ चाइन और पाकिस्तान ने मिलकर शांति की पहल करते हुए सीजफायर का प्रस्ताव रखा है…हालांकि, ईरान ने सीधे मध्यस्थता पर आपत्ति जताई है…लेकिन शांति की अपील का स्वागत किया है…
ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ट्रंप जंग खत्म करने का ऐलान करेंगे या फिर कोई नई रणनीति सामने आएगी?…अब पूरी दुनिया ट्रंप के इस संबोधन का इंतजार कर रही है…क्योंकि इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट ही नहीं, बल्कि ग्लोबल राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है…
सबसे पहले समझते हैं कि मामला क्या है….तो मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव काफी समय से बढ़ रहा था…ट्रंप लगातार बड़े-बड़े दावे कर रहे थे कि वो ईरान को घुटनों पर ला देंगे…यहां तक कि उन्होंने Strait of Hormuz पर कंट्रोल की भी बात कही थी…ये वही जगह है…जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल सप्लाई होता है….अगर इस पर किसी का कंट्रोल हो जाए…तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था हिल सकती है….लेकिन अब जो खबरें सामने आ रही हैं…वो ट्रंप की उस हेकड़ी को पूरी तरह से तोड़ती नजर आ रही हैं……बताया जा रहा है कि भले ही अमेरिका अपने कई सैन्य लक्ष्यों को हासिल करने का दावा जरूर कर रहा है…लेकिन जमीन पर हालात उतने आसान नहीं हैं…ईरान ने भी पूरी ताकत से जवाब दिया है और यही वजह है कि अब ट्रंप युद्ध खत्म करने की बात कर रहे हैं…
ऐसे में अब सवाल ये उठता है कि क्या ये शांति की कोशिश है या कोई मजबूरी?…..क्योंकि अगर हम ट्रंप के पुराने बयान देखें…तो वो कहते थे कि ईरान को बर्बाद कर देंगे…लेकिन अब अचानक युद्ध खत्म करने का ऐलान करना…..ये साफ संकेत देता है कि अमेरिका पर दबाव बढ़ चुका है….इसी बीच एक और बड़ा मोड़ आया है….जिसने ट्रंप की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं….यूरोप के देश, जो पहले अमेरिका के साथ खड़े नजर आते थे….अब धीरे-धीरे दूरी बना रहे हैं….खासकर इटली की प्रधानमंत्री Giorgia Meloni का रुख काफी सख्त दिखा है….
खबरों के मुताबिक, इटली ने अमेरिका को अपने सिगोनेला बेस का इस्तेमाल करने से साफ इनकार कर दिया…इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने ये साफ कर दिया कि उनका देश इस युद्ध का हिस्सा नहीं बनना चाहता…जब अमेरिका के कुछ सैन्य विमान वहां उतरने वाले थे…तो उन्हें बीच में ही रोक दिया गया……सोचिए, जो अमेरिका पूरी दुनिया में अपनी सैन्य ताकत के लिए जाना जाता है…उसे अब अपने सहयोगी देश भी जमीन देने से मना कर रहे हैं…इससे पहले स्पेन ने भी कुछ ऐसा ही रुख अपनाया था……..यानी अब ट्रंप को सिर्फ ईरान से ही नहीं…बल्कि अपने सहयोगियों की बेरुखी से भी जूझना पड़ रहा है…ये साफ संकेत है कि दुनिया अब इस युद्ध को बढ़ाने के पक्ष में नहीं है…
दूसरी तरफ, चीन और पाकिस्तान ने मिलकर सीजफायर का प्रस्ताव रखा है….उन्होंने दोनों देशों से अपील की है कि युद्ध खत्म किया जाए और बातचीत के जरिए हल निकाला जाए…हालांकि ईरान ने सीधे मध्यस्थता को लेकर आपत्ति जताई है…लेकिन शांति की बात का स्वागत किया है….इसके साथ ही ईरान ने साफ कर दिया है कि किसी भी समझौते से पहले हमले और टारगेट किलिंग पूरी तरह बंद होने चाहिए…ईरान चाहता है कि भविष्य में ऐसे हालात न बनें…..इसके लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय गारंटी दी जाए…इसके अलावा, युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई और पूरे क्षेत्र में संघर्ष खत्म करने की मांग भी उसने रखी है…इसके साथ ही सबसे विवादित मुद्दा होरमुज स्ट्रेट पर कंट्रोल का है…जिस पर ईरान अंतरराष्ट्रीय मान्यता चाहता है….
अब यहां एक अहम बात समझनी जरूरी है…अगर ईरान पूरी तरह से कमजोर होता…तो वो कभी भी शांति की शर्तें तय करने की स्थिति में नहीं होता…लेकिन अभी जो स्थिति बन रही है…उसमें ईरान बराबरी की स्थिति में दिख रहा है….यही वजह है कि अब ट्रंप को भी अपने रुख में बदलाव करना पड़ रहा है…
ट्रंप का राष्ट्र के नाम संबोधन भी इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है…कहा जा रहा है कि वो 2 अप्रैल को बड़ा ऐलान कर सकते हैं…लेकिन सवाल ये है कि वो ऐलान क्या होगा?…क्या वो इसे अपनी जीत बताएंगे या फिर शांति के नाम पर पीछे हटेंगे?…अगर हम पूरे घटनाक्रम को देखें….तो साफ नजर आता है कि ट्रंप के पास अब ज्यादा ऑपशन्स बचे नहीं हैं…एक तरफ ईरान का मजबूत जवाब, दूसरी तरफ सहयोगी देशों का साथ छोड़ना, और ऊपर से दुनिया भर का दबाव…इन सबने मिलकर ट्रंप को एक मुश्किल स्थिति में लाकर खड़ा किया है…
अब होर्मुज छोड़कर भागने वाली बात को भी समझिए…..दरअसल, इसका मतलब ये है कि जिस स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर कब्जे की बात ट्रंप कर रहे थे…वहां पर अमेरिका अपनी पकड़ मजबूत नहीं कर पाया…उल्टा, हालात ऐसे बन गए कि उन्हें अपने सैनिकों को पीछे हटाने तक की नौबत आ गई…यानी जो नेता कभी ताकत दिखाकर दुनिया को डराने की कोशिश कर रहा था…
अब वही नेता शांति की बात कर रहा है….और यही वजह है कि लोग कह रहे हैं कि ट्रंप की सारी हेकड़ी निकल गई….लेकिन यहां एक और पहलू भी है……कहते हैं कि राजनीति में हर चीज उतनी सीधी नहीं होती जितनी दिखती है….हो सकता है कि ट्रंप इस पूरे घटनाक्रम को अपनी रणनीति का हिस्सा बताएं….वो कह सकते हैं कि अमेरिका ने अपने लक्ष्य हासिल कर लिए हैं….इसलिए अब युद्ध खत्म करना सही समय है…लेकिन सच्चाई क्या है…ये तो आने वाले दिनों में ही साफ होगा….क्योंकि अगर अमेरिका वाकई मजबूत स्थिति में होता….तो उसे अपने सहयोगियों से ऐसी ठोकरें नहीं खानी पड़तीं…
कुल मिलाकर इस युद्ध का का असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है….इसका सीधा असर दुनिया की अर्थव्यवस्था, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ रहा है…अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव बढ़ता है…तो तेल महंगा होगा…जिसका असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा…आखिर में यही कहा जा सकता है कि ये सिर्फ एक युद्ध नहीं है…बल्कि ताकत, राजनीति और कूटनीति का बड़ा खेल है…और इस खेल में अभी तक जो तस्वीर सामने आई है…उसमें सुपरपावर अमेरिका के राष्ट्रपकि डोनाल्ड ट्रंप की स्थिति कमजोर नजर आ रही है…अब सबकी नजरें 2 अप्रैल पर टिकी हैं कि क्या ट्रंप सच में युद्ध खत्म करने का ऐलान करेंगे?…या फिर कोई नई चाल चलेंगे?



