साथियों से धोखा खाकर मिमियाने लगे ट्रंप, हॉर्मूज स्ट्रेट के आगे किया सरेंडर
अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने प्रधानमंत्री से लगता है कुछ ज्यादा ही प्रभावित हो गए हैं। उनको भी हर बात को बढ़ा चढ़ाकर कहने की और हर संबोधन को ईवेटंट बनाने की बुरी आदत लग चुकी है।

4pm न्यूज नेटवर्क: जब से ईरान से अमेरिका की जंग शुरू हुई है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बुरा वक्त शुरू हे गया है। जिस ईरान को वो तीन दिन में हराने का सपना देख रहे थे उसने उन्हे लोहे के चने चबवा दिए।
और आज 30 दिनों के बाद हालात ये हो गए हैं कि ट्रंप मैदान छोड़कर भागना चाहते हैं लेकिन ईरान अमेरिका की जान छोड़ने के लिए राज़ी नहीं है। इस बाच ट्रंप ने देश को संबोधित करते हुए अपनी हार स्वीकार कर ली है और नाटो देशों से नाराजगी जाहिर कर दी है। और सभी देशों को संदेश दे दिया है कि हॉर्मूज स्ट्रेट पर सब अपना अपना देख लें। इसके साथ ही उन्होंने स्वीकार कर लिया है कि ईरान ने उन्हें कहीं का नहीं छड़ा है। वहीं अरब देशों के लिए भी उन्होंने एक खास संदेश भेजा है।
अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने प्रधानमंत्री से लगता है कुछ ज्यादा ही प्रभावित हो गए हैं। उनको भी हर बात को बढ़ा चढ़ाकर कहने की और हर संबोधन को ईवेटंट बनाने की बुरी आदत लग चुकी है। अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने गुरुवार सुबह अमेरिका को संबोधित किया। भाषण लंबा नहीं था। लेकिन अपने संक्षिप्त भाषण में, अमेरिकी राष्ट्रपति ने चार जानी-पहचानी बातें दोहराईं। जैसे युद्ध आवश्यक है, यह पहले ही जीता जा चुका है, यह जारी रहना चाहिए, और यह जल्द ही समाप्त हो जाएगा।
ये सभी बातें हैं जो वो लगभग रोज़ाना दोहरा रहे थे। लेकिन आज भाषण से पहले उन्होंने इसे गजब की हाइप दे दी जैसे वो परमाणु हमला करने जा रहे हों। युद्ध की शानदार रिपोर्ट देने के बावजूद, ट्रंप ने संघर्ष की समयसीमा बढ़ाने का संकेत दिया। उन्होंने कहा, “अगले दो से तीन हफ्तों में, हम उन्हें पाषाण युग में वापस भेज देंगे, जहाँ वे वास्तव में हैं।” लेकिन यहां सबसे ज्यादा ट्रंप की हताशा तब नजर आई जब उन्होंने बाकि देशों को ये संदेश दे दिया कि दुनिया के जो देश होर्मुज़ स्ट्रेट से तेल लेते हैं वो ‘यात्रीगण अपने सामान की रक्षा स्वयं करें’। मतलब जो ट्रंप कल तक हीरो बन रहे थे और सब देशों को हॉर्मूज स्ट्रेट पर हमला करने के लिए आमंत्रित कर रहे थे आज वो खुद हॉर्मूज से पीछे हटके दिखाई दिए और साफ कह दिया कि सब अपना अपना देख लो मुझसे कुछ नहीं होने वाला।
ट्रंप के सहां संबोधन से साफ पता चलता है कि ट्रंप इस जंग में पूरी तरह से अकेले पड़ गए हैं। उनको अब किसी भी देश से कोई मदद सी उम्मीद नजर नहीं आ रही है। वहीं नाटो जिसके दम पर अमेरिका दुनिया पर राज कर रहा था आज ट्रंप का उसी नाटो से मोहभंग हो चुका है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वह नाटो से अमेरिका को बाहर निकालने पर बहुत गंभीरता से सोच रहे हैं। उन्होंने ब्रिटेन के अखबार डेली टेलिग्राफ़ को दिए इंटरव्यू में यह बात कही।
ट्रंप ने कहा कि नाटो के सहयोगी देशों ने ईरान के ख़िलाफ़ अमेरिका की सैन्य कार्रवाई का साथ नहीं दिया, इसलिए अब वह इस गठबंधन से बाहर आने पर विचार कर रहे हैं। ट्रंप ने नाटो को ‘कागजी शेर’ बताया, यानी दिखावा ज्यादा, असल ताकत कुछ नहीं। उन्होंने कहा कि अब अमेरिका को नाटो से अलग करना ‘विचार से परे’ हो गया है, यानी यह फैसला लगभग पक्का है। ट्रंप ने लंबे समय से NATO की विश्वसनीयता पर शक जताया है। इसके अलावा ट्रंप ने ब्रिटेन से भी दुश्मनी मोल ली।
ब्रिटेन की नौसेना पर तंज कसते हुए ट्रंप ने कहा, ‘इनके पास नौसेना भी नहीं है। ये बहुत पुराने हो गए और इनके एयरक्राफ्ट कैरियर भी काम नहीं कर रहे थे।’ जब उनसे पूछा गया कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर को रक्षा खर्च बढ़ाना चाहिए या नहीं, तो ट्रंप ने जवाब दिया, ‘मैं उन्हें नहीं बताऊंगा कि क्या करना है। वे जो चाहें कर सकते हैं। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।
स्टार्मर तो बस महंगे पवन चक्की लगाना चाहते हैं, जो आपकी बिजली की कीमतों को आसमान छूने पर ले जा रहे हैं।’ अब ब्रिटेन को उंगली करेंगे तो ब्रिटेन तो जवाब देगा ही। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने ट्रंप को जवाब देते हुए साफ कर दिया कि ब्रिटेन ईरान के युद्ध में नहीं फंसेगा। उन्होंने कहा कि मुझ पर बहुत ज्यादा प्रेशर था कि मैं अमेरिका और ईरान की वॉर में शामिल हो जाऊं, लेकिन मैं इस युद्ध में शामिल नहीं होऊंगा। उन्होंने याफ कह दिया कि कितना भी प्रेशर हो, मैं ब्रिटिश प्रधानमंत्री हूं और मुझे अपने देश हित में काम करना है।
जिस तरीके से दुनिया के बाकि देश ट्रंप को आंख दिखा रहे हैं उससे एक बात तो साफ हो गई है कि ईरान पर हमला करने के बाद अमेरिका का आतंक अब पूरी दुनिया तरह से खत्म हो गया है। ईरान पर हमला करने वाले अमेरिका को भी अंदाजा नहीं था कि ऐसा कुछ होने वाला है। ट्रंप तो अब खुद कह रहे हैं कि युद्ध से पहले उन्हें लगा था कि यह 3 दिन में खत्म हो जाएगा लेकिन अब हमें युद्ध में 33 दिन बीत चुके हैं।
अब ट्रंप ने मान ही लिया कि उन्होंने ईरान को कम आंका था। लगता है ये बात ट्रंप को पता नहीं था कि ” दुश्मन को कभी कम नहीं आंकना चाहिए”। जहां एक तरफ ट्रंप का नाटो और बाकि देशों से मोहभंग हो गया है तो वहीं अरब देशों का शुक्रिया अदा कर रहे हैं। ये वही अरब देश हैं जिनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिका ने कई सालों से अपने कंधों पर उठाए रखी थी। लेकिन ईरान के आगे अमेरिका कुछ नहीं कर पाई। ईरान ने जिस तरीके से अमेरिका के पिट्ठू बने रहने वाले अरब देशों में कहर मचाया उससे अरब देशों का अमेरिका पर से विश्वास उठ गया है। लेकिन कहते हैं न कि रस्सी जल गई लेकिन बल नहीं गया। ट्रंप अब भी अरब देशों को सुरक्षा देने की बात कर रहे हैं और लड़ाई में साथ देने के लिए उन्हें ही थैंक्स बोल रहे हैं।
आखिरकार इस पूरी कहानी का निचोड़ यही है कि कभी खुद को दुनिया का सबसे ताकतवर नेता बताने वाले डोनाल्ड ट्रंप आज उसी दुनिया के सामने बेबस और अकेले नजर आ रहे हैं। जिस युद्ध को उन्होंने तीन दिन में खत्म करने का दावा किया था, वही जंग अब उनके लिए गले की फांस बन चुकी है। NATO जैसे बड़े गठबंधन से दूरी, ब्रिटेन जैसे करीबी सहयोगियों की नाराज़गी और अरब देशों का डगमगाता भरोसा—ये सब इस बात का संकेत है कि ट्रंप की रणनीति पूरी तरह फेल हो चुकी है। सबसे बड़ी बात ये है कि ईरान को कम आंकने की गलती अब अमेरिका पर भारी पड़ गई है। जो देश कल तक दूसरों को सलाह देता था, आज वही दुनिया को कह रहा है कि “अपना-अपना देख लो।”
ये सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि एक सुपरपावर की कमजोरी का खुला इज़हार है। ट्रंप की बयानबाजी अब उनकी हताशा को छुपा नहीं पा रही। बार-बार जीत के दावे और जमीनी हकीकत के बीच का फर्क अब दुनिया साफ देख रही है। यही वजह है कि जो देश पहले अमेरिका के इशारों पर चलते थे, आज वही उससे दूरी बना रहे हैं। तो साफ है कि ये जंग सिर्फ हथियारों की नहीं, बल्कि छवि, भरोसे और नेतृत्व की भी थी और इस लड़ाई में ट्रंप बुरी तरह पिछड़ते नजर आ रहे हैं।



