UCC पर ओवैसी का तीखा हमला, कहा- ये मुस्लिम अधिकारों का उल्लंघन

ओवैसी ने UCC को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे मुस्लिम समुदाय के अधिकारों का उल्लंघन बताया... और असंवैधानिक करार दिया...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात विधानसभा में हाल ही में पास हुए दो बड़े विधेयकों पर देशभर में बहस छिड़ गई है.. एक तरफ समान नागरिक संहिता विधेयक है.. जो विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप पर सभी धर्मों के लिए एक समान कानून लाने का दावा करता है.. तो वहीं दूसरी तरफ 1991 के डिस्टर्ब्ड एरिया एक्ट में संशोधन है.. जो संपत्ति की खरीद-बिक्री में नए प्रावधान लाता है.. वहीं इन दोनों विधेयकों पर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख.. और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने अहमदाबाद में मीडिया से बात करते हुए जोरदार हमला बोला.. उन्होंने दोनों विधेयकों को असंवैधानिक करार दिया.. और कहा कि ये मुसलमानों के धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं.. ओवैसी ने साफ कहा कि ये कानून मुसलमानों को निशाना बना रहे हैं.. और इन्हें अदालत में चुनौती दी जाएगी..

आपको बता दें कि गुजरात विधानसभा ने पिछले हफ्ते, यानी 24-25 मार्च 2026 को इन विधेयकों को पास किया था.. UCC विधेयक पर सात घंटे से ज्यादा की मैराथन बहस हुई.. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इसे राष्ट्रीय एकता और लैंगिक न्याय की दिशा में उठाया गया कदम बताया.. विधेयक में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप पर सभी धर्मों के लिए एक समान ढांचा बनाने का प्रावधान है.. हालांकि अनुसूचित जनजातियों को इससे छूट दी गई है.. विधेयक में जबरन, धोखे या दबाव से किए गए विवाह के लिए सात साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है.. द्विविवाह और बहुविवाह पर पूरी तरह रोक लगाई गई है.. विवाह और लिव-इन रिलेशनशिप का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है.. अगर 60 दिनों के भीतर पंजीकरण नहीं हुआ.. तो 10,000 रुपये तक का जुर्माना लग सकता है..

लिव-इन रिलेशनशिप खत्म करने की सूचना देना भी अनिवार्य होगा.. ऐसे संबंधों से जन्मे बच्चे को वैध माना जाएगा.. और महिला साथी को भरण-पोषण का अधिकार मिलेगा.. ओवैसी ने कहा कि UCC संविधान के अनुच्छेद 44 में सिर्फ एक निदेशक सिद्धांत है.. मौलिक अधिकार नहीं.. संविधान सभा की बहस में डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर ने कभी नहीं कहा कि.. राज्य इसे जबरन सभी पर लागू करेगा.. यह केवल उन लोगों पर लागू होना चाहिए जो स्वेच्छा से इसे स्वीकार करें..

ओवैसी ने आरोप लगाया कि गुजरात का यह विधेयक उत्तराखंड के UCC की हूबहू नकल है.. उत्तराखंड में भी अनुसूचित जनजातियों को छूट दी गई है.. इसलिए यह समान नहीं है.. उन्होंने कहा कि आप हिंदू विवाह अधिनियम और हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के प्रावधानों को मुसलमानों पर थोप रहे हैं.. यह अनुच्छेद 25 का उल्लंघन है.. जो धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है.. पीड़ित पक्ष मुसलमान हैं.. ओवैसी ने तलाक के प्रावधान पर खास निशाना साधा.. उन्होंने कहा कि अब तलाक लेने के लिए व्यभिचार (एडल्ट्री) साबित करना होगा.. और न्यायिक प्रक्रिया से गुजरना पड़ेगा.. यह हिंदू कानून का हिस्सा है.. इसे मुसलमानों पर क्यों लागू किया जा रहा है..

लिव-इन रिलेशनशिप के अनिवार्य पंजीकरण पर भी उन्होंने आपत्ति जताई.. उनका कहना है कि यह विवाह की पवित्रता को खत्म करता है.. और इस्लाम के सिद्धांतों के खिलाफ है.. मुसलमानों के लिए विवाह एक पवित्र बंधन है.. इसे रजिस्टर कराना और सजा का प्रावधान रखना उचित नहीं है.. दूसरे विधेयक पर भी ओवैसी ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधा.. गुजरात प्रोहिबिशन ऑफ ट्रांसफर ऑफ इमूवेबल प्रॉपर्टी एंड प्रोविजन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ टेनेंट्स फ्रॉम एविक्शन फ्रॉम प्रिमाइसेस इन डिस्टर्ब्ड एरियाज एक्ट.. 1991 में संशोधन किया गया है.. अब इसे स्पेसिफाइड एरिया कहा जाएगा..

नए प्रावधान के अनुसार, संपत्ति की खरीद-बिक्री में तीसरा व्यक्ति भी आपत्ति दर्ज करा सकता है.. पीड़ित व्यक्ति की परिभाषा को व्यापक बनाया गया है.. ओवैसी ने कहा कि इससे संपत्ति सौदों में कमीशनखोरी को कानूनी रूप मिल जाएगा.. कोई भी तीसरा व्यक्ति आपत्ति कर सकता है.. और उन्होंने सवाल उठाया कि बीजेपी कहती है कि गुजरात शांत राज्य है.. अगर सच में शांत है.. तो ऐसे संशोधन की जरूरत ही क्यों.. 1986 के दंगों के बाद यह कानून लाया गया था.. वहीं अब बिना दंगों के भी क्षेत्रों को स्पेसिफाइड घोषित किया जा सकता है..

आपको बता दें कि ओवैसी ने स्पष्ट किया कि AIMIM इन दोनों मुद्दों को जनता के बीच ले जाएगी.. पार्टी गुजरात के स्थानीय स्वशासन चुनावों में पूरी तैयारी के साथ उतर रही है.. AIMIM छह नगर निगमों, 29 तालुका पंचायतों और 28 जिला पंचायतों की 539 सीटों पर चुनाव लड़ेगी.. उन्होंने कहा कि पार्टी इन कानूनी बदलावों और आम जनता के मुद्दों को लेकर लोगों के बीच जाएगी.. साथ ही, इन कानूनों को अदालत में चुनौती दी जाएगी..

जानकारी के मुताबिक यह विवाद सिर्फ गुजरात तक सीमित नहीं है.. पूरे देश में UCC पर बहस चल रही है.. संविधान के अनुच्छेद 44 में कहा गया है कि राज्य पूरे भारत में नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने का प्रयास करेगा.. लेकिन यहां प्रयास शब्द का इस्तेमाल किया गया है.. न कि जबरन लागू करने का.. कई राज्यों में अलग-अलग पर्सनल लॉ लागू हैं.. सुप्रीम कोर्ट ने कई बार UCC की आवश्यकता पर जोर दिया है.. लेकिन यह भी कहा है कि इसे लागू करना संसद या राज्य विधानमंडल का काम है..

 

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