अमेरिका-ईरान जंग रुकते ही भारतीय रुपया मजबूत, डॉलर की कीमत गिरी

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के थमने और सीजफायर की घोषणा के बाद वैश्विक बाजारों में सकारात्मक असर देखने को मिला है।

4pm न्यूज नेटवर्क: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के थमने और सीजफायर की घोषणा के बाद वैश्विक बाजारों में सकारात्मक असर देखने को मिला है। इसका सीधा फायदा भारतीय मुद्रा को हुआ, जहां भारतीय रुपया मजबूत हुआ है और डॉलर की कीमत में गिरावट दर्ज की गई है।

विदेशी मुद्रा बाजार के जानकारों के मुताबिक, जैसे ही मध्य-पूर्व में युद्ध जैसे हालात कम हुए, निवेशकों का भरोसा फिर से उभरता नजर आया। इससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं, खासकर भारत जैसे देशों की मुद्रा को मजबूती मिली।

रुपये में तेजी, डॉलर में गिरावट

सीजफायर की खबर सामने आने के बाद भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ। शुरुआती कारोबार में रुपये ने बढ़त बनाई, जबकि डॉलर इंडेक्स में कमजोरी देखी गई। विशेषज्ञों का कहना है कि भू-राजनीतिक तनाव कम होने से सुरक्षित निवेश (safe haven) के तौर पर डॉलर की मांग घटी है।

क्यों पड़ा असर? समझिए पूरा गणित

जब वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ता है, तो निवेशक आमतौर पर डॉलर और सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख करते हैं। लेकिन जैसे ही स्थिति सामान्य होती है, निवेशक जोखिम वाले बाजारों (risk assets) में निवेश बढ़ाते हैं। इस बार भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। अमेरिका-ईरान के बीच तनाव कम होते ही, विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों में रुचि दिखाई,शेयर बाजार में तेजी आई,रुपये की मांग बढ़ी, इससे भारतीय रुपया मजबूत हुआ और डॉलर की कीमत नीचे आई।

भारतीय बाजार पर सकारात्मक असर

सीजफायर के बाद भारतीय शेयर बाजार में भी उत्साह देखने को मिला। निवेशकों ने बैंकिंग, आईटी और मेटल सेक्टर में खरीदारी बढ़ाई। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक हालात स्थिर रहते हैं, तो आने वाले दिनों में बाजार और मजबूत हो सकता है।

तेल की कीमतों में राहत

मध्य-पूर्व में तनाव कम होने का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ा है। तेल की कीमतों में गिरावट से भारत जैसे आयातक देशों को राहत मिलती है। इससे महंगाई पर दबाव कम हो सकता है, चालू खाता घाटा (CAD) नियंत्रित रह सकता है,रुपये को और मजबूती मिल सकती है।

विशेषज्ञों की राय

आर्थिक जानकारों का कहना है कि यह मजबूती फिलहाल वैश्विक संकेतों पर आधारित है। यदि सीजफायर लंबे समय तक कायम रहता है, तो भारतीय अर्थव्यवस्था को इसका और फायदा मिल सकता है। हालांकि, अगर फिर से तनाव बढ़ता है, तो स्थिति बदल भी सकती है।

आगे क्या?

विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशकों की नजर अब आगे की कूटनीतिक बातचीत और वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर रहेगी। अमेरिका और ईरान के रिश्तों में स्थायी सुधार होता है या नहीं, यह आने वाले समय में तय करेगा कि रुपये की मजबूती टिकाऊ होगी या नहीं। अमेरिका-ईरान के बीच जंग रुकने से जहां दुनिया को राहत मिली है, वहीं भारतीय अर्थव्यवस्था को भी इसका सकारात्मक असर देखने को मिला है। रुपये की मजबूती और डॉलर की गिरावट इस बात का संकेत है कि वैश्विक स्थिरता का सीधा फायदा भारत जैसे उभरते बाजारों को मिलता है।

Related Articles

Back to top button