दो बार टेस्ट में फेल, फिर चला DM का डंडा… कानपुर कलेक्ट्रेट के 3 बाबुओं का डिमोशन
कानपुर में जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कलेक्ट्रेट के तीन कनिष्ठ लिपिकों को टाइपिंग टेस्ट पास न करने पर चपरासी बना दिया। दो बार मौका मिलने के बाद भी परीक्षा पास न करने पर प्रशासन ने यह फैसला लिया।

4 पीएम न्यूज़ नेटवर्क: कानपुर कलेक्ट्रेट में जिलाधिकारी ने एक सख्त प्रशासनिक फैसला लेते हुए तीन कनिष्ठ लिपिकों पर बड़ी कार्रवाई की है। टाइपिंग टेस्ट पास न करने पर इन तीनों कर्मचारियों का डिमोशन कर दिया गया है और अब इन्हें चतुर्थ श्रेणी यानी चपरासी के पद पर तैनात कर दिया गया है। इस फैसले के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में चर्चा तेज हो गई है। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी सेवा में नियमों का पालन जरूरी है और बार-बार मौका देने के बाद भी परीक्षा पास न करने पर यह कार्रवाई की गई है।
जिलाधिकारी ने लिया सख्त फैसला
कानपुर के जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह ने कलेक्ट्रेट में तैनात तीन कनिष्ठ लिपिकों के खिलाफ यह कार्रवाई की है। जानकारी के मुताबिक इन कर्मचारियों को नौकरी के दौरान अनिवार्य टाइपिंग टेस्ट पास करना था, लेकिन वे दो बार मौका मिलने के बावजूद इसे पास नहीं कर सके। नियमों के मुताबिक टाइपिंग टेस्ट पास करना कनिष्ठ लिपिक के पद के लिए जरूरी माना जाता है। इसी आधार पर प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए उन्हें पदावनत कर दिया।
पहले रोकी गई वेतन वृद्धि
सूत्रों के मुताबिक जब इन कर्मचारियों ने पहली बार टाइपिंग टेस्ट पास नहीं किया था, तब प्रशासन ने उनकी वेतन वृद्धि रोक दी थी। उस समय उन्हें दोबारा परीक्षा देने का मौका भी दिया गया था। लेकिन दूसरी बार भी परीक्षा पास न करने पर प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए तीनों को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बना दिया।
मृतक आश्रित कोटे से मिली थी नौकरी
बताया जा रहा है कि इन तीनों कर्मचारियों को नौकरी मृतक आश्रित कोटे के तहत मिली थी। यानी परिवार के किसी सदस्य की सरकारी सेवा के दौरान मृत्यु के बाद उन्हें नौकरी दी गई थी। अब टाइपिंग टेस्ट में असफल रहने के कारण उनकी जिम्मेदारी और पद दोनों में बदलाव कर दिया गया है।
इन कर्मचारियों पर हुई कार्रवाई
प्रशासन की ओर से जिन कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है, उनके नाम इस प्रकार हैं:
- प्रेमनाथ यादव
- अमित यादव
- नेहा श्रीवास्तव
इन तीनों को कनिष्ठ लिपिक के पद से हटाकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी यानी चपरासी के पद पर तैनात किया गया है।
प्रशासन का क्या कहना है
मामले में एडीएम सिटी राजेश कुमार का कहना है कि नियमों के तहत यह कार्रवाई की गई है। कर्मचारियों को पहले भी मौका दिया गया था, लेकिन जरूरी परीक्षा पास न करने के कारण प्रशासन को यह फैसला लेना पड़ा।
रिपोर्ट- प्रांजुल मिश्रा
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