सीजफायर के तुरंत बाद जयशंकर UAE दौरे पर, द्विपक्षीय चर्चा की संभावना
मध्य पूर्व क्षेत्र में हाल ही में सीजफायर की घोषणा के तुरंत बाद भारत ने कूटनीतिक पहल तेज कर दी है। विदेश मंत्री S. Jaishankar कल गुरुवार से अपनी 4 दिन की यात्रा शुरू कर रहे हैं।

4pm न्यूज नेटवर्क: मध्य पूर्व क्षेत्र में हाल ही में सीजफायर की घोषणा के तुरंत बाद भारत ने कूटनीतिक पहल तेज कर दी है। विदेश मंत्री S. Jaishankar कल गुरुवार से अपनी 4 दिन की यात्रा शुरू कर रहे हैं। इस यात्रा के तहत वह पहले मॉरीशस और उसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का दौरा करेंगे।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर पहले 9वीं हिंद महासागर सम्मेलन में भाग लेने के लिए कल मॉरीशस गणराज्य पहुंचेंगे। वह मॉरीशस में 9 और 10 अप्रैल को रहेंगे। इस दौरान वह मॉरीशस के नेतृत्व से मुलाकात करेंगे और द्विपक्षीय संबंधों के संपूर्ण दायरे की समीक्षा करेंगे। इसके बाद जयशंकर UAE के दौरे पर होंगे। यह दौरा विशेष रूप से अहम है क्योंकि 38 दिन के हालिया संघर्ष में ईरान ने सबसे अधिक हमले UAE पर ही किए थे। भारत की यह कूटनीतिक पहल क्षेत्रीय स्थिरता और सुरक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि विदेश मंत्री जयशंकर की यह यात्रा भारत की सक्रिय कूटनीति और मध्य पूर्व में शांति स्थापित करने के प्रयासों को दर्शाती है। मॉरीशस में हिंद महासागर सम्मेलन में भागीदारी से भारत के क्षेत्रीय सहयोग और समुद्री सुरक्षा में नेतृत्व को मजबूती मिलेगी।
UAE दौरा भी खास महत्व रखता है। 38 दिन के संघर्ष में UAE पर हमलों के बाद भारत के लिए यह आवश्यक है कि वह अपने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत कर, क्षेत्रीय व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करे। विश्लेषकों का कहना है कि इस दौरे से भारत की भूमिका एक जिम्मेदार मध्यस्थ और विश्वस्तरीय कूटनीतिक खिलाड़ी के रूप में और उभरेगी।
विदेश मंत्री की यह यात्रा क्षेत्रीय सुरक्षा, व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। यात्रा के दौरान द्विपक्षीय समझौतों, सहयोग और कूटनीतिक वार्ता पर जोर रहेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि मॉरीशस और UAE दौरे से भारत मध्य पूर्व और हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक भूमिका को और मजबूत करेगा।
तो मध्य पूर्व में सीजफायर के तुरंत बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर की यात्रा क्षेत्रीय कूटनीति और सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मॉरीशस और UAE दौरे के बाद देखना होगा कि भारत की इस पहल का क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा पर क्या असर पड़ता है।



