नामांकन खत्म मतलब लोकतंत्र खत्म! चुनाव नहीं चयन का अधिकार निशाने पर

- मीनाक्षी नटराजन के राज्यसभा नामांकन खारिज होने का मामला सुप्रीम कोर्ट में, कल होगी सुनवाई
- गुजरात ताल्लुका चुनाव में 700 से ज्यादा प्रत्याशी बिना लड़े ही जीत गये थे चुनाव
- अगर विपक्ष मैदान में ही न उतरे तो चुनाव किससे होगा?
- नटराजन का आरोप-बीजेपी कार्यकर्ता की तरह काम कर रहे हैं रिटार्निंग आफिसर
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। लोकतंत्र की हत्या टैंकों और बंदूकों से ही नहीं बल्कि कई बार कागज के एक टुकड़े से भी हो जाती है। वही कागज का टुकड़ा जिसे हम नामांकन पत्र कहते हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है और पूरी दुनिया भारत के इस दावे को स्वीकार करती है। लेकिन आज सवाल उठ रहे हैं कि क्या लोकतंत्र सिर्फ मतदान का नाम है या फिर जनता के सामने विकल्प मौजूद रहने का भी नाम है? क्योंकि अगर विकल्प ही खत्म कर दिए जाएंगे तो वोट डालने का अधिकार भी बेमानी हो जाता है। कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द होने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट की चौखट तक पहुंच चुका है। अदालत तय करेगी कि उनके साथ न्याय हुआ या अन्याय। कल शीर्ष अदालत में सुनवाई होगी। लेकिन इस विवाद ने देश के सामने एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है जो किसी एक नेता किसी एक पार्टी या किसी एक चुनाव से कहीं बड़ा है…। अप्रैल-26 में गुजरात के नगरपालिका जिला पंचायत और तालुका पंचायत चुनावों में 717 उम्मीदवार बिना मुकाबले के ही विजेता घोषित कर दिए गए। न कोई चुनावी जंग हुई न जनता को फैसला सुनाने का मौका मिला। लोकतंत्र का अंतिम अध्याय शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया। चिंता यही से शुरू होती है कि क्या लोकतंत्र की असली ताकत वोट नहीं बल्कि विकल्प है। जनता तभी मालिक होती है जब उसके सामने चुनने के लिए कई दरवाजे खुले हों। लेकिन यदि कोई व्यवस्था, कोई प्रक्रिया या कोई राजनीतिक खेल उन दरवाजों को एक-एक कर बंद करने लगे तो फिर मतदान केंद्रों पर लगने वाली लंबी कतारें भी लोकतंत्र को जीवित नहीं रख सकतीं।
सुप्रीम कोर्ट पहुंची कांग्रेस
मध्य प्रदेश से अपनी राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द किए जाने के खिलाफ कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उम्मीद की जा रही है कि आज कोर्ट की वेकेशन बेंच के सामने इस मामले पर जल्द सुनवाई के लिए इसे उठाया जाएगा। भाजपा की आपत्तियों के बाद रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र रद्द करने के बाद कांग्रेस ने उठाया है।
औपचारिक रस्म बनकर रह जाएगा लोकतंत्र!
देश में पिछले कुछ वर्षों से नामांकन प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। विपक्ष आरोप लगाता रहा है कि चुनावी लड़ाई अब जनता के बीच कम और नामांकन की मेजों पर ज्यादा लड़ी जा रही है। मीनाक्षी नटराजन का मामला और गुजरात के सैकड़ों निर्विरोध विजेता इसी बहस को और गहरा कर रहे हैं। सवाल सीधा है कि अगर चुनाव लडऩे का अधिकार ही विवादों में घिर जाए अगर उम्मीदवार मैदान में उतरने से पहले ही बाहर हो जाएं अगर जनता के सामने विकल्प सिकुड़ते चले जाएं तो क्या लोकतंत्र सिर्फ एक औपचारिक रस्म बनकर नहीं रह जाएगा? क्योंकि लोकतंत्र तब नहीं मरता जब लोग वोट डालना छोड़ देते हैं। लोकतंत्र तब मरना शुरू होता है जब लोगों के पास चुनने के लिए कोई बचता ही नहीं।
लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संदेश
मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन खारिज किए जाने के मामले के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने पर कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने न्यायपालिका से सकारात्मक फैसले की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि हमें पूरी उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट से हमें न्याय मिलेगा। जिस तरह से भाजपा अब वोट चोरी ही नहीं बल्कि सीट चोरी पर भी उतर आई है वह लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक संदेश है। लोकतंत्र अब हिटलरशाही की ओर बढ़ रहा है, जहां विपक्ष के नामांकन तक को खारिज किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि मीनाक्षी नटराजन के मामले में जिस आधार पर नामांकन रद्द किया गया उसी तरह की आपत्ति झारखंड में एक व्यापारी के खिलाफ भी उठाई गई थी लेकिन उन्हें समय देकर उनका नामांकन स्वीकार कर लिया गया। राजपूत ने आरोप लगाया कि यह शासन और सत्ता की दोमुंही व्यवस्था को दर्शाता है। चुनाव आयोग भी निंदनीय भूमिका निभा रहा है। हमें पूरी उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट से न्याय मिलेगा।
संवैधानिक संस्थाओं का अनादर हो रहा है : नटराजन
मीनाक्षी नटराजन ने मीडिया से बात करते हुए कहा है कि हम एक ऐसे रणक्षेत्र में हैं जहां कांग्रेस नेता न सिर्फ विपक्षी पार्टी के खिलाफ लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से हमारे संविधान बनाने वाले पूर्वजों ने जो संस्थाएं बनायी थीं उनका अब अनादर हो रहा है और वह इस तरह से प्रभावित दिखती हैं कि हमें लगता है कि हम उनके खिलाफ भी लड़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कोई फॉर्म भरना कैसे नहीं जान सकता? इसमें कुछ भी कानूनी या तकनीकी नहीं है। यह सिर्फ राजनीतिक दुर्भावना है जो हमने कल हर कदम पर देखी कि कैसे लोकतंत्र को कमज़ोर करने की कोशिशें की जा रही थीं। भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ कहूंगी कि कल रिटर्निंग ऑफिसर निष्पक्ष नहीं थे। वह मौजूदा सरकार के प्रवक्ताओं और उनके फ्रं टल संगठनों के प्रमुखों की तरह काम कर रहे थे।
कानूनी मामले की जानकारी न देने के चलते रद्द हुआ नामांकन
बीजेपी का दावा है कि कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन ने अपने नामांकन पत्रों के साथ दिए गए हलफनामे में तेलंगाना में चल रहे एक कानूनी मामले के बारे में जानकारी नहीं दी थी। नटराजन के नामांकन के खिलाफ दायर आपत्ति के अनुसार पूर्व कॉर्पोरेट एग्जीक्यूटिव ए श्रीलता ने चौथे अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट की अदालत में याचिका दायर की है। उनका आरोप है कि नटराजन ने कुंभम शिवकुमार रेड्डी को राजनीतिक संरक्षण दिया था जिन पर श्रीलता ने छेड़छाड़ और जान से मारने की धमकी जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि नटराजन ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश करार दिया है और हैदराबाद की अदालत में श्रीलता की याचिका का विरोध करते हुए कहा है कि यह उनकी छवि खराब करने की कोशिश है। इससे पहले नटराजन ने आरोप लगाया था कि रिटर्निंग ऑफिसर सरकार के इशारे पर काम कर रहे थे। नटराजन मध्य प्रदेश से कांग्रेस की एकमात्र राज्यसभा उम्मीदवार थीं लेकिन भाजपा की ओर से एक बड़ी आपत्ति जताए जाने के बाद उनके नामांकन पत्र रद्द कर दिए गए। भाजपा का आरोप था कि उन्होंने तेलंगाना की अदालत में लंबित एक मामले के बारे में जानकारी छिपाई थी।




