यूपी से 2 करोड़ वोटर ‘OUT’ : एसआईआर की फाइनल लिस्ट जारी

- वोटो की इंजीनियरिंग में नाम कटे करोड़ों, जवाब जीरो, आखिर कौन देगा हिसाब?
- एसआईआर फेस-2 से 6.8 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए गए हैं।
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। क्या भारत में वोट देना अब किस्मत का खेल बन गया है? लगता कुछ ऐसा ही है विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के फेज-2 का काम पूरा हो चुका है और चुनाव आयोग ने फाइनल सूची जारी करते हुए बताया है कि 9 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों से 6.8 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूचियों से हटा दिए गए हैं। उत्तर प्रदेश से लगभग 2 करोड़ और पश्चिम बंगाल से 91 लाख वोटरों के नाम काट दिए जाने की सूचना है। सूंची जारी होने के बाद राजनीति में महाभूचाल की स्थिति है और देश के विपक्षी सियासी दल सवाल पूछ रहे हैं कि यह सफाई है या सियासी छंटनी? यह डेटा क्लीनिंग है या लोकतंत्र की री-इंजीनियरिंग? चुनाव आयोग इसे प्रक्रिया कह रहा है जबकि विपक्ष ने इसे चुनावी साजिश का नाम दिया है। जबकि जनता पूछ रही है कि लिस्ट में मेरा नाम कहां है?
6 करोड़ से ज्यादा नाम हटे
इन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की ओर से शेयर किए गए आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल 27 अक्टूबर को जब एसआईआर की घोषणा की गई थी तब इन 12 राज्यों और केंद्र-शासित प्रदेशों की वोटर लिस्ट में लगभग 51 करोड़ मतदाताओं के नाम थे। इसके बाद एसआईआर प्रक्रिया में कई मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। अब ताजा आंकड़ों के मुताबिक एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की वोटर लिस्ट में लगभग 44.92 करोड़ नाम दर्ज हैं। इसका सीधा मतलब है कि 6.08 करोड़ नाम हटाये जा चुके हैं। यह सभी नाम अलग-अलग राज्यों से हटाए गए हैं।
उत्तर प्रदेश में अब 13.4० करोड़ मतदाता रह गए
उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि यूपी में अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई है। यूपी में एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कुल 13 करोड़ 39 लाख 84 हजार 792 वोटर हैं। 84,28,767 मतदाता बढ़े हैं। हालांकि, 2024 के मुकाबले 2.06 करोड़ वोटर के नाम कट गए हैं। अभियान से पहले प्रदेश में 15.44 करोड़ मतदाता थे जबकि अब 13.40 करोड़ मतदाता रह गए हैं। यानी कुल मतदाताओं की संख्या में 13.24 प्रतिशत की कमी आई है।
‘चुनाव आयोग पर अब भरोसा नहीं’
समाजवादी पार्टी के सांसद धर्मेंद्र यादव ने चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए भाजपा के पक्ष में मतदाता सूची में हेरफेर का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष के विरोध के बावजूद चुनाव आयोग भाजपा के इशारे पर वोट काटने के षड्यंत्रों में लगा हुआ है। उन्होंने कहा कि मैं अपने कार्यकर्ताओं से कहना चाहता हूं कि बूथ लेवल पर चेक करें कि कितने योग्य वोट काटे गए हैं। उन्हें जोडऩा है क्योंकि भाजपा के लोग सिर्फ और सिर्फ षड्यंत्र कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यूपी में दो करोड़ से अधिक वोट काटे गए हैं। धर्मेंद्र यादव ने कहा कि आजमगढ़ में साढ़े तीन लाख वोट काटे जाने की सूचना है। हम लोग शुरू से शक जता रहे हैं कि वोट काटे जाएंगे। एसआईआर के जरिए वे घुसपैठियों को भगाने का दावा कर रहे हैं। उन्हें पहले ये बताना चाहिए कि बिहार से कितने घुसपैठियों का नाम हटाया गया। ये विपक्ष के लोगों के वोट काटने की प्रक्रिया थी।
वोट जोड़े जाने पर भी संशय
एसआईआर के दौरान 84 लाख वोटरों के जोड़े जाने पर उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग पर अब भरोसा नहीं है। जिस तरह टीएमसी और चुनावी अधिकारियों के साथ व्यवहार किया गया वह सबके सामने है। चुनाव आयोग के लिए जितनी मान्यताएं मर्यादा, आदर्श और परंपराएं थीं सारे तोड़कर आयोग स्वामीभक्ति में लगा हुआ है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थानों की मर्यादाएं तार-तार हो रही हैं। संविधान मानने वाले लोग आहत हैं। जब से एसआईआर चल रहा है तब से हम लोग आवाज उठा रहे हैं। संसद के सत्र में हमने आवाज उठाई। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को सजग रहने की अपील करते हुए कहा कि हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष की तरफ से अंगूठा लगाने वालों के हस्ताक्षर वाले फॉर्म भर दिए गए हैं। इसको लेकर आवाज उठाई गई है। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर धांधली हुई है।
विपक्षी पार्टियां लगातार एसआईआर का कर रही है विरोध
पिछले काफी समय से देशभर में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का मुद्दा काफी ज्यादा चर्चा में रहा है। चुनाव आयोग ने वोटर लिस्ट में सुधार के लिए यह प्रक्रिया शुरू की थी। विपक्ष इस प्रक्रिया का लगातार विरोध कर रहा था और चुनाव आयोग के साथ-साथ बीजेपी पर भी हमलावर रहा। तमाम विवादों के बीच यह प्रक्रिया बीते शुक्रवार को पूरी हो चुकी है और प्रोसस पूरा होने के बाद 9 राज्यों और 3 केंद्र-शासित प्रदेशों की वोटर लिस्ट से लगभग 6.8 करोड़ मतदाताओं के नाम हट गए हैं। चुनावी राज्य बंगाल से भी करीब 91 लाख वोटरों के नाम हटाए गए हैं। उत्तर प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण का दूसरा चरण पूरा हो गया है। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, राजस्थान, छत्तीसगढ़, केरल, पुडुचेरी, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, लक्षद्वीप, गुजरात, मध्यप्रदेश और गोवा की अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की गई है।




