गुजरात में बुलडोजर घोटाला, 100 आशियाने ढहाए गए, कार्रवाई पर उठे बड़े सवाल!

गुजरात में बुलडोज़र कार्रवाई को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है... करीब 100 मकानों को गिराए जाने के बाद सवाल उठ रहे हैं कि...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात में विकास के नाम पर बुलडोजर कार्रवाई की एक नई घटना ने विवाद खड़ा कर दिया है.. 30 मई को सुबह-सुबह अचानक 100 से ज्यादा घरों पर बुलडोजर चला दिए गए.. जो परिवार पिछले 40 साल से वहां शांति से रह रहे थे.. उन्हें न कोई नोटिस मिला, न कोई चेतावनी और न ही सुनवाई का मौका.. सरकारी मशीनरी का पूरा इस्तेमाल हुआ.. लेकिन सरकारी नियमों का पालन नहीं किया गया.. जेसीबी और पोकलेन मशीनें दीवारों में छेद करती हुई आगे बढ़ीं.. लोग अभी सो रहे थे या चाय पी रहे थे कि उनके घर ढहने लगे.. महिलाएं और बच्चे रोते-चिल्लाते रह गए.. इस घटना को विपक्ष ‘बुलडोजर घोटाला’ बता रहा है.. और कह रहा है कि यह बिल्डरों.. और जमीन माफिया को फायदा पहुंचाने के लिए रची गई साजिश है..

वहीं यह कार्रवाई गुजरात के किस इलाके में हुई.. इसका पूरा विवरण अभी सामने आ रहा है.. स्थानीय लोगों के अनुसार यह घटना सूरत या आसपास के किसी इलाके में हुई.. जहां गरीब मजदूर, छोटे कामगार.. और लंबे समय से बसे परिवार रहते थे.. 30 मई की सुबह करीब 6 बजे भारी पुलिस बल के साथ बुलडोजर पहुंचे.. लोगों को उठने तक का समय नहीं मिला.. जब उन्होंने विरोध करना चाहा तो उन्हें रोका गया.. कुछ ही घंटों में 100 से ज्यादा मकान मलबे के ढेर में बदल गए..

40 साल से रह रहे परिवारों के लिए यह सपने टूटने जैसा था.. एक बुजुर्ग महिला ने बताया कि हमारे बच्चे यहीं पैदा हुए, बड़े हुए.. घर बनाते वक्त हमने मेहनत की, ईंट-ईंट जोड़कर.. अब सब कुछ एक झटके में खत्म हो गया.. कई परिवारों के पास कोई पक्का दस्तावेज नहीं था.. क्योंकि वे लंबे समय से अनौपचारिक रूप से बसे हुए थे.. लेकिन कानून कहता है कि इतने लंबे समय तक कब्जे के बाद बिना नोटिस.. और सुनवाई के घर नहीं तोड़े जा सकते.. बच्चे स्कूल बैग लेकर खड़े थे.. महिलाएं रसोई का सामान बचाने की कोशिश कर रही थीं.. और बुजुर्ग बीमार पड़ गए.. रात में खुले आसमान के नीचे सोना पड़ रहा है.. बारिश का मौसम आने वाला है.. ऐसे में इन परिवारों की स्थिति बेहद खराब है.. कपड़े, बर्तन और फर्नीचर सब मलबे में दब गए..

भारतीय कानून और सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में साफ कहा गया है कि.. किसी भी बस्ती को हटाने से पहले उचित नोटिस, सुनवाई का मौका और वैकल्पिक व्यवस्था देना जरूरी है.. खासकर गरीबों और लंबे समय से बसे लोगों के मामलों में और ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए.. लेकिन यहां न नोटिस दिया गया, न सुनवाई हुई.. और न ही कोई वैकल्पिक जगह बताई गई.. सीधे बुलडोजर चला दिया गया.. पुलिस और नगर निगम अधिकारियों से जब सवाल पूछा गया तो कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला.. विपक्षी नेता कह रहे हैं कि यह जानबूझकर किया गया ताकि बिल्डर जल्दी से जल्दी अपने प्रोजेक्ट शुरू कर सकें..

 

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