सूरत में LPG संकट से हाहाकार! रेलवे स्टेशन पर उमड़ा जन सैलाब, पुलिस ने बरसाईं लाठियां

सूरत में LPG की किल्लत से हालात बिगड़ते नजर आ रहे हैं... आम लोगों की भारी भीड़ रेलवे स्टेशन पर उमड़ पड़ी...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः मिडिल ईस्ट जंग के चलते देश में गैस ही भारी कमी है.. जिससे आम जनता की हालत खराब हो गई है.. लोग भूखों मर रहे हैं.. गैस मिल नहीं रही है.. लेकिन मोदी सरकार इसे गंभीरता से नहीं ले रही है.. और गैस की कमी को अफवाह बता रही है.. और चुनाव प्रचार में व्यस्त है.. लेकिन मोदी के दावों की पोल खोलते हुए.. उनके गृह राज्य गुजरात से एक ऐसी तस्वीर निकल कर सामने आई है.. जो मोदी और बीजेपी नेताओं के दावों पर तमाचा है.. बता दें कि गुजरात के सूरत में गैस किल्लत से हाहाकार मचा हुआ है.. वहां पर रहने वाले प्रवासी मजदूर अपने वतन वापस लौट रहे हैं.. जिसके चलते सूरत के उधना स्टेशन पर प्रवासी मजदूरों का जन सैलाब उमड़ पड़ा है..

आपको बता दें कि 19 अप्रैल की सुबह सूरत के उधना रेलवे स्टेशन पर ऐसी भगदड़ मच गई कि पूरा माहौल हाहाकार में बदल गया.. हजारों प्रवासी मजदूर, जिनमें ज्यादातर उत्तर प्रदेश और बिहार के थे.. ट्रेनों में सीट पाने के लिए एक-दूसरे से भिड़ गए.. लंबी-लंबी कतारें स्टेशन के बाहर दो किलोमीटर तक फैली हुई थीं.. गर्मी, प्यास और थकान से लोग बेहाल थे.. जब कुछ यात्री लाइन तोड़कर ट्रेन की ओर भागे.. तो स्थिति बेकाबू हो गई.. पुलिस और आरपीएफ के जवानों को भीड़ को काबू में करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा.. कई लोग घायल हो गए.. कुछ यात्री लोहे की जालियों पर चढ़कर कूदते हुए भागने लगे.. यह तस्वीर सिर्फ एक स्टेशन की नहीं.. बल्कि पूरे देश में चल रहे LPG संकट की कहानी बयां करती है.. मिडिल ईस्ट में इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग का असर भारत के घर-घर तक पहुंच गया है..

वहीं यह संकट अचानक नहीं आया.. फरवरी के अंत में जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले शुरू किए.. तो स्थिति तेजी से बिगड़ने लगी.. ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया.. दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस का परिवहन इसी रास्ते से होता है.. भारत LPG का दूसरा सबसे बड़ा आयातक देश है.. हम अपनी जरूरत का करीब 60 प्रतिशत LPG विदेशों से मंगाते हैं.. और उसमें से लगभग 90 प्रतिशत इसी होर्मुज जलडमरूमध्य से आता है.. जंग शुरू होते ही जहाजों की आवाजाही रुक गई.. सप्लाई चेन टूट गई और घरेलू गैस सिलेंडरों की किल्लत पूरे देश में फैल गई..

शुरुआत में लोगों ने इसे एक छोटी समस्या समझा.. लेकिन मार्च आते-आते यह संकट गहरा गया.. ब्लैक मार्केट में 14.2 किलो का सिलेंडर हजारों रुपये में बिकने लगा.. कई जगहों पर कीमत 500 प्रति किलो तक पहुंच गई.. आम लोगों के लिए गैस खरीदना मुश्किल हो गया.. इस संकट का सबसे ज्यादा असर सूरत पर पड़ा.. सूरत को देश का टेक्सटाइल हब कहा जाता है.. जहां लाखों प्रवासी मजदूर काम करते हैं.. इनमें से ज्यादातर मजदूर उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा और राजस्थान से आते हैं..

ये मजदूर पावरलूम, टेक्सटाइल मिलों और छोटी-छोटी फैक्टरियों में काम करते हैं.. उनका जीवन बेहद साधारण होता है.. वे किराए के कमरों में रहते हैं, सादा भोजन करते हैं.. और अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा गांव में अपने परिवार को भेजते हैं.. लेकिन LPG उनके लिए सिर्फ खाना पकाने का साधन नहीं.. बल्कि जीवन की बुनियादी जरूरत है.. जब गैस मिलनी बंद हो गई, तो उनके लिए खाना बनाना भी मुश्किल हो गया..

कई मजदूरों ने बताया कि 15–20 दिनों से गैस नहीं मिल रही थी.. वे गैस एजेंसी पर लाइन में लगते.. लेकिन हर बार स्टॉक खत्म होने की बात कह दी जाती.. ब्लैक मार्केट में गैस इतनी महंगी थी कि उनकी रोज की कमाई का बड़ा हिस्सा सिर्फ गैस खरीदने में चला जाता..  एक मजदूर बताया कि हम गांव जा रहे हैं.. क्योंकि कई दिनों से गैस नहीं मिल रही.. कंपनियां भी बंद हो रही हैं.. यहां पैसे नहीं हैं, कोई मदद नहीं कर रहा.. गैस की समस्या ठीक होने पर ही वापस आएंगे..

 

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