बांदा में अनोखा विरोध: दूल्हा बारात लेकर पहुंचा कलेक्ट्रेट, ‘नेग’ में मांगा स्मार्ट मीटर बंद करने का वादा
बांदा में दूल्हा बारात लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचा और सरकार से नेग में स्मार्ट मीटर बंद करने की मांग की। बारातियों संग नारेबाजी, महंगाई और बिजली बिल को लेकर उठाए सवाल। अनोखा विरोध पूरे जिले में चर्चा का विषय बना।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में सोमवार को विरोध का एक ऐसा अनोखा तरीका देखने को मिला, जिसने प्रशासन के साथ-साथ आम लोगों का भी ध्यान खींच लिया। शादी के दिन जहां आमतौर पर दूल्हा अपने नए जीवन की शुरुआत की तैयारी में होता है, वहीं यहां एक दूल्हा अपनी बारात लेकर सीधे कलेक्ट्रेट पहुंच गया और सरकार से ‘नेग’ के रूप में स्मार्ट मीटर बंद करने की मांग कर दी।
बारात के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचा दूल्हा
यह मामला उस वक्त चर्चा में आया जब दूल्हा बने कुलदीप सिर पर सेहरा बांधे, बारातियों के साथ जिला अधिकारी कार्यालय पहुंच गए। हाथों में पोस्टर और बैनर लिए दूल्हे और उसके साथियों ने स्मार्ट बिजली मीटरों के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया।
उनकी मांग थी कि प्रदेश में लागू की जा रही स्मार्ट मीटर व्यवस्था को बंद कर पुराने बिजली मीटर दोबारा बहाल किए जाएं।
दूल्हे के साथ आए बारातियों ने भी इस विरोध में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कलेक्ट्रेट परिसर में नारेबाजी करते हुए उन्होंने सरकार से इस नीति पर पुनर्विचार की मांग की। इस अनोखे विरोध ने वहां मौजूद लोगों को भी हैरान कर दिया और देखते ही देखते बड़ी संख्या में भीड़ जुट गई।
समाजसेवी ने उठाए महंगाई और रोजगार के मुद्दे
बारात में शामिल समाजसेवी एस नोमानी ने इस दौरान कहा कि वर्तमान समय में महंगाई अपने चरम पर है और आम लोगों के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना भी मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में सरकार को स्मार्ट मीटर लगाने की बजाय रोजगार के अवसर बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए।
‘नेग’ के रूप में रखी मांग, चर्चा में आया विरोध
दूल्हा कुलदीप ने इस विरोध को ‘नेग’ से जोड़ते हुए कहा कि जब तक उनकी मांगों पर विचार नहीं किया जाएगा, तब तक यह मुद्दा उठाते रहेंगे। उनका कहना है कि स्मार्ट मीटर से बिजली बिल बढ़ने की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे आम उपभोक्ता परेशान हैं।
कलेक्ट्रेट में हुए इस अनोखे प्रदर्शन ने पूरे इलाके में चर्चा का माहौल बना दिया है। लोग इस विरोध के तरीके को लेकर अलग-अलग राय दे रहे हैं, कुछ इसे रचनात्मक मान रहे हैं, तो कुछ इसे महज प्रतीकात्मक विरोध बता रहे हैं। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस मांग को गंभीरता से लेगा या यह विरोध सिर्फ चर्चा तक सीमित रह जाएगा।
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रिपोर्ट- इक़बाल खान



