पहलगाम आतंकी हमले के शहीदों को श्रद्धांजलि: कानपुर में 22 अप्रैल को होगा विशेष कार्यक्रम

पहलगाम आतंकी हमले में शहीद शुभम द्विवेदी समेत 26 वीरों की स्मृति में कानपुर के लाजपत भवन में 22 अप्रैल 2026 को श्रद्धांजलि सभा आयोजित होगी। कार्यक्रम में प्रमुख हस्तियां शामिल होंगी, परिवार ने लोगों से शामिल होने की अपील की है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क:  कभी-कभी शहर सिर्फ सड़कों और इमारतों से नहीं, बल्कि अपने लोगों की यादों से जिंदा रहता है। पहलगाम आतंकी हमले में जान गंवाने वाले 26 लोगों की स्मृति में कानपुर में एक ऐसी ही भावुक और गर्व से भरी श्रद्धांजलि सभा का आयोजन होने जा रहा है। इस आयोजन का केंद्र होंगे शहीद शुभम द्विवेदी, जिनकी बहादुरी और देश के प्रति समर्पण आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है।

शहादत को सलाम करने का दिन, 22 अप्रैल को विशेष आयोजन

पहलगाम हमले में दिवंगत हुए शुभम द्विवेदी के प्रथम बलिदान दिवस के मौके पर 22 अप्रैल 2026, बुधवार को श्रद्धांजलि सभा आयोजित की जाएगी। यह कार्यक्रम शाम 4 बजे से लाजपत भवन, मोतीझील में शुरू होगा। इस दौरान शहीदों के साहस, बलिदान और राष्ट्रभक्ति को याद किया जाएगा।

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के नायकों को भी किया जाएगा नमन

इस कार्यक्रम की खास बात यह है कि इसमें केवल पहलगाम हमले के शहीद ही नहीं, बल्कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के वीरों को भी श्रद्धापूर्वक याद किया जाएगा। आयोजन का उद्देश्य नई पीढ़ी को देशभक्ति और बलिदान के मूल्यों से जोड़ना है, ताकि वे इन कहानियों से प्रेरणा ले सकें।

बड़े चेहरे होंगे शामिल, शहर की नजरें कार्यक्रम पर

इस श्रद्धांजलि सभा में कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहेंगी। मुख्य अतिथि के रूप में स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती शिरकत करेंगे। वहीं विशिष्ट अतिथियों में सतीश महाना और बृजेश पाठक भी शामिल होंगे। इनकी उपस्थिति कार्यक्रम को और महत्वपूर्ण बना रही है।

परिवार की अपील, शहर से जुड़ने का मौका

शहीद शुभम द्विवेदी की पत्नी ऐशान्यां द्विवेदी और उनके पिता संजय द्विवेदी ने शहरवासियों से अपील की है कि वे बड़ी संख्या में पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित करें। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन वीरों को याद करने का मौका है, जिन्होंने देश के लिए अपनी जान दी।

सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं, एक संदेश भी

यह आयोजन केवल श्रद्धांजलि देने तक सीमित नहीं है। यह एक संदेश भी है कि देश अपने शहीदों को कभी नहीं भूलता। पहलगाम हमले की यादें आज भी लोगों के दिलों में ताजा हैं और ऐसे कार्यक्रम उन्हें एकजुट होकर उन बलिदानों को सम्मान देने का मौका देते हैं।

रिपोर्ट – प्रांजुल मिश्रा

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