इधर झालमुड़ी खाने में व्यस्त मोदी, उधर गुजरात में पालयन को मजबूर हुए मजदूर!

गुजरात के सूरत में LPG गैस का भारी संकट छा गया है। मजदूरों को सिलेंडर नहीं मिल रहे। महंगे ब्लैक मार्केट में भी गैस मिल रही है तो कीमत आसमान छू रही है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भाजपा राज में गजब की नौटंकी चल रही है एक तरफ जहां गरीब जनता सड़कों पर है तो वहीं दूसरी तरफ भाजपा में बैठे देश चलाने वाले नेता चुनावी प्रचार में व्यस्त नजर आ रहे हैं। इस सरकार में लोगों को हर चीज की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।

अब तो ये आलम है कि लोगों को रोजगार से लेकर चूल्हे चौके तक की किल्लत का सामना करना पड़ता है, लोगों का हुजूम उमड़ जाता है इस घमंड में डूबी बीजेपी सरकार के खिलाफ। सोशल मीडिया के इस जमाने में बीजेपी सरकार की करतूत को उजागर करते हुए कई वीडियो ऐसे वायरल होते हैं जो की न सिर्फ इस निकम्मी सरकार की पोल खोलते हैं बल्कि समाज को आइना भी दिखाते हैं कि ये सरकार किसी की सगी नहीं है।

इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जो की मोदी सरकार की नाकामियों का जीता जागता सबूत है। या यूँ कह लें कि मोदी सरकार की बड़ी पोल खुल गई है। गुजरात के सूरत में LPG गैस का भारी संकट छा गया है। मजदूरों को सिलेंडर नहीं मिल रहे। महंगे ब्लैक मार्केट में भी गैस मिल रही है तो कीमत आसमान छू रही है। फैक्टरियां बंद हो रही हैं। खाना बनाने के लिए मजदूर लकड़ी जलाने को मजबूर हैं। अब हजारों मजदूर घर लौट रहे हैं और कह रहे हैं- “अब नहीं आएंगे”।

वहीं इस वीडियो के सामने आने के बाद लोग मोदी सरकार को जमकर घेरते हुए नजर आ रहे हैं। इसी बीच नेहा सिंह राठौर ने मोदी सरकार पर जमकर तंज कसा है उन्होने वीडियो जारी लिखा कि, अब्दुल को टाइट करने के चक्कर में पूरा यूपी-बिहार टाइट हो गया है. नया वीडियो गुजरात के सूरत से आया है जहाँ से प्रवासी मज़दूर जानवरों की तरह भाग रहे हैं और भागते हुए कह रहे हैं कि “अब कभी वापस नहीं आयेंगे”

जैसा की आप जानते हैं गुजरात मोदी का गढ़ है, यहां लोगों को हो रही समस्या का उन्हें समाधान करना चाहिए लेकिन मोदी जी हैं कि इन दिनों वो बंगाल चुनाव में बिजी हैं झालमूरी खा रहे और वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए वाह वाही लूटने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन वहीं दूसरी तरफ उनके गृह राज्य में एलपीजी की किल्लत के चलते मजदूर पलायन कर रहे हैं। गौरतलब है कि सूरत गुजरात की आर्थिक राजधानी है।

यहां टेक्सटाइल और दूसरे कामों में लाखों गरीब मजदूर यूपी, बिहार, राजस्थान से आकर काम करते थे। लेकिन LPG न मिलने से उनका खाना-पीना मुश्किल हो गया। मजदूरों का कहना है कि “300 रुपये कमाते हैं, 400 रुपये में गैस खरीदें तो क्या खाएंगे? भूखे मरने से बेहतर है घर लौट जाना।” उधना रेलवे स्टेशन पर भीड़ इतनी बढ़ गई कि पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। कुल मिलाकर मजदूरों का पलायन शुरू हो गया।

मोदी सरकार कहती है कि सब ठीक है, लेकिन हकीकत कुछ और है। मिडिल ईस्ट में जंग की वजह से गैस आयात रुक गया। सरकार ने पहले से तैयारी क्यों नहीं की? सालों से “सबका साथ, सबका विकास” का नारा दिया, लेकिन गरीब मजदूर आज भूख और परेशानी में हैं। गुजरात में मोरबी की सिरेमिक फैक्टरियां बंद हो गईं। काम बंद, मजदूर भाग रहे। अर्थव्यवस्था को नुकसान हो रहा है।यह मोदी सरकार की नाकामी है।

महंगाई, बेरोजगारी और अब गैस संकट। मजदूरों का विश्वास टूट गया। वे कह रहे हैं अब शहर नहीं आएंगे। सरकार को तुरंत गैस सप्लाई बढ़ानी चाहिए, ब्लैक मार्केटिंग रोकनी चाहिए और मजदूरों को राहत देनी चाहिए। वरना विकास का गुजरात मॉडल सिर्फ दिखावा साबित होगा। गरीबों की तकलीफ बढ़ रही है और BJP की छवि धूमिल हो रही है।

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