नाजिया इलाही की गुंडागर्दी का वीडियो वायरल होते ही मचा बवाल, मुस्लिम मैनेजर को धमकाकर बुरा फंसी

बीजेपी में ऐसे नेताओं की भरमार है जिन्हे न ही समाज से मतलब है और न ही जनता से लेकिन साहब को फायदा पहुंचाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: भाजपा राज में हिन्दू-मुसलमान का चलन इस कदर बढ़ गया है जिसकी कोई हद नहीं है। आज आलम ये है कि भाजपाई अपना नाम बनाने के लिए और साहब की नजरों में आने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार बैठे रहते हैं।

बीजेपी में ऐसे नेताओं की भरमार है जिन्हे न ही समाज से मतलब है और न ही जनता से लेकिन साहब को फायदा पहुंचाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। सही सुना आपने तो ऐसी ही बीजेपी की एक महिला नेता है जो फर्जी हिंदुत्व का ढोंग रचाकर टहल रही हैं लोगों को धमकाती हुई नजर आ रही हैं। दरअसल हुआ कुछ यूँ कि भाजपा की अल्पसंख्यक मोर्चा की नेता नाजिया इलाही खान मुंबई के अंधेरी इलाके में लेंसकार्ट के एक शोरूम में पहुंचीं।

वहां उन्होंने हिंदू कर्मचारियों के माथे पर तिलक लगाया, हाथ में कलावा बांधा और जय श्री राम के नारे भी लगवाए। इसके साथ ही उन्होंने शोरूम के मुस्लिम मैनेजर मोहसिन खान को खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने कहा कि क्या यहां शरिया कानून लागू करना है? कंपनी हिंदू कर्मचारियों को उनके धार्मिक प्रतीक पहनने से क्यों रोक रही है? यह वीडियो उन्होंने खुद एक्स पर पोस्ट किया, जिससे पूरा मामला और ज्यादा चर्चा में आ गया और न सिर्फ उनकी बल्कि उनके साथ-साथ भाजपा की भी जमकर आलोचना होने लगी।

यह घटना सिर्फ एक दुकान की नहीं है। यह भाजपा की राजनीति का एक बड़ा जीता जागता उदाहरण है। भाजपा हमेशा हिंदू-मुस्लिम मुद्दों को उठाकर वोट बटोरने की कोशिश करती है। नाजिया की भाजपा में उनकी भूमिका हिंदुत्व की छवि बनाने में इस्तेमाल होती है। एक निजी कंपनी के शोरूम में घुसकर कर्मचारियों को तिलक लगाना और मैनेजर को डराना, यह लोकतंत्र और व्यवसाय की आजादी के खिलाफ है।

जो की साफ़ झलकता है लेकिन मोदी सरकार इस मामले पर भी चुप्पी साधे हुए है। लेंसकार्ट जैसी कंपनी पूरे देश में काम करती है। वहां ड्रेस कोड होता है, जो हर कर्मचारी पर लागू होता है। लेकिन भाजपा नेता इसे धार्मिक भेदभाव बताकर मुद्दा बना रही है। इससे साफ पता चलता है कि भाजपा विकास और रोजगार की बात कम, मंदिर-मस्जिद और तिलक-कलावा की बात ज्यादा करती है।

जैसा की आप देख ही रहे हैं देश में पहले से ही धार्मिक तनाव बढ़ा हुआ है। ऐसे में भाजपा के नेता इस तरह की हरकतें करके माहौल और खराब कर रहे हैं। नाजिया ने मैनेजर मोहसिन खान को मोहसिन खान बनाकर सबको मोहसिन बनाने का आरोप लगाया। यह आरोप कितना संवेदनशील है?

एक मुस्लिम मैनेजर को इस तरह घेरना, उसे पाकिस्तानी या जिहादी जैसे शब्दों से जोड़ना, यह साफ कम्युनल पॉलिटिक्स है। भाजपा कहती है कि वह सबका साथ, सबका विकास की बात करती है, लेकिन हकीकत में अल्पसंख्यक नेता को आगे करके हिंदू वोटर्स को खुश करने की रणनीति अपनाती है। यह घटना दिखाती है कि भाजपा के लिए देश की एकता से ज्यादा अपनी पार्टी की छवि मायने रखती है।

लेंसकार्ट कंपनी ने पहले ही स्पष्ट किया था कि उनकी पॉलिसी सभी पर बराबर लागू होती है। हिजाब या तिलक, दोनों पर नियम हैं। लेकिन भाजपा इसे हिंदू-विरोधी बताकर बॉयकॉट का आह्वान कर रही है। इससे कंपनी को नुकसान हो रहा है। शेयर मार्केट में भी इसका असर दिखा। एक छोटी सी घटना से पूरी कंपनी बदनाम हो गई। सवाल बनता है कि क्या यह सही है?

भाजपा को सत्ता में आने के बाद देश को एकजुट करने की कोशिश करनी चाहिए थी, लेकिन उल्टा हो रहा है। मुंबई जैसे बड़े शहर में इस तरह की घटना से आम लोगों में डर पैदा होता है। दुकानदार सोचते हैं कि कल कोई नेता आकर हमारी दुकान में घुसकर नियम तोड़ेगा तो क्या होगा?

भारत इतना बड़ा और महान देश है, आज जिस भारत को भगत सिंह जैसे शहीदों ने आजादी दिलवाई। उसी भारत में भाजपाई हिन्दू-मुस्लमान कर रहे हैं। आलम ये है कि भाजपा की वजह से ये छोटी-छोटी घटनाएं बड़े विवाद में बदल जाती हैं। नाजिया जैसी नेता को भाजपा ने इसलिए चुना क्योंकि वह मुस्लिम चेहरे से हिंदुत्व की बात कर सकती है। इससे भाजपा को फायदा होता है।

हिंदू वोटर सोचते हैं कि देखो, मुस्लिम नेता भी हमारे साथ है। लेकिन असल में यह फूट डालने की साजिश है। मुस्लिम समुदाय में डर बढ़ता है, हिंदू समुदाय में गुस्सा। दोनों तरफ तनाव। विकास के मुद्दे जैसे बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा पीछे छूट जाते हैं। भाजपा सरकार में पिछले कई सालों से यही हो रहा है। राम मंदिर, सीएए, एनआरसी जैसे मुद्दों से शुरू करके अब दुकानों तक पहुंच गए हैं।

इस घटना से एक चीज तो साफ़ है कि भाजपा की राजनीति अब दुकानों और कर्मचारियों तक पहुंच चुकी है। जहां पहले राजनीति संसद और सड़कों पर होती थी, वहां अब शोरूम में घुसकर तिलक लगाने लगे हैं। यह लोकतंत्र के लिए खतरा है। निजी व्यवसाय पर दबाव डालना गलत है।

अगर कंपनी का नियम गलत है तो कोर्ट जाओ, सरकार से शिकायत करो। लेकिन कैमरा लेकर घुसना और फटकार लगाना, यह गुंडागर्दी जैसा लगता है। भाजपा के नेता कहते हैं कि वे हिंदू हित में काम कर रहे हैं, लेकिन हकीकत में वे देश को बांट रहे हैं। मोहसिन खान जैसे आम मैनेजर को टारगेट करना, यह दिखाता है कि भाजपा अल्पसंख्यकों को कैसे देखती है।

कुल मिलाकर दोस्तों इतना ही कहना है कि यह घटना भाजपा की असली तस्वीर दिखाती है। वे कहते हैं सबका साथ, लेकिन करते हैं सिर्फ अपना साथ। नाजिया इलाही खान की यह हरकत देश के लिए शर्मनाक है। भारत जैसे विविधता वाले देश में ऐसे काम से एकता टूटती है।

लोगों को चाहिए कि वे इन राजनीतिक स्टंट्स से ऊपर उठें। विकास की बात करें, रोजगार की बात करें। भाजपा को भी समझना चाहिए कि तिलक और कलावा से देश नहीं चलता, शिक्षा और स्वास्थ्य से चलता है। यह घटना एक चेतावनी है कि अगर भाजपा इसी राह पर चली तो देश का भविष्य और बिगड़ सकता है।

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