Asaduddin Owaisi का गुजरात में ऐलान, कहा- AIMIM ही दे सकती है BJP को टक्कर 

गुजरात की सियासत में नया मोड़! असदुद्दीन ओवैसी ने AIMIM को मजबूत विकल्प बताते हुए BJP को सीधी चुनौती दी...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात की सियासत में एक बार फिर तेज़ी आ गई है.. असदुद्दीन ओवैसी ने सूरत के लिंबायत क्षेत्र में आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए.. कई बड़े राजनीतिक बयान दिए.. जिनका असर आने वाले चुनावों पर पड़ सकता है.. आपको बता दें कि अपने भाषण में उन्होंने न सिर्फ कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी पर निशाना साधा.. बल्कि अपनी पार्टी AIMIM को BJP के खिलाफ सबसे प्रभावी राजनीतिक विकल्प बताया.. लिंबायत की सभा में ओवैसी ने मुस्लिम समुदाय और खासतौर पर युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि.. वोट केवल एक अधिकार नहीं बल्कि अमानत है.. उनका कहना था कि इस अमानत का इस्तेमाल सोच-समझकर.. और अपने हितों को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए..

वहीं सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि वोट का इस्तेमाल अपने जमात के लिए करो.. ताकि हम यह दिखा सकें कि हम लावारिस नहीं हैं.. हम इंसान हैं और हमारी आवाज सुनी जाएगी.. ओवैसी ने यह भी जोर देकर कहा कि किसी भी समाज की आवाज तभी सुनी जाती है.. जब उसका अपना मजबूत नेतृत्व होता है.. और उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे राजनीतिक रूप से जागरूक बनें.. और अपने प्रतिनिधित्व को मजबूत करें.. अपने भाषण में ओवैसी ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला.. और उन्होंने कहा कि अगर लोग यह सोचते हैं कि कांग्रेस को वोट देकर BJP को रोका जा सकता है, तो यह गलत धारणा है..

ओवैसी का आरोप था कि कांग्रेस ने लंबे समय तक मुस्लिम समाज का इस्तेमाल केवल वोट बैंक के रूप में किया.. लेकिन उन्हें राजनीतिक नेतृत्व या वास्तविक भागीदारी नहीं दी.. उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास में देश के बंटवारे के लिए मुसलमानों को दोषी ठहराया जाता है.. जबकि असल जिम्मेदारी कांग्रेस की नीतियों और फैसलों की थी.. यह बयान राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है.. और इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं..

ओवैसी ने दावा किया कि अगर कोई पार्टी संविधान के दायरे में रहकर BJP को चुनौती दे सकती है.. तो वह AIMIM है.. उन्होंने कहा कि BJP को कोई रोक सकता है और उनकी आंख में आंख डालकर.. उन्हें हमारे अधिकार मानने पर मजबूर कर सकता है.. तो वह AIMIM है.. यह बयान AIMIM की चुनावी रणनीति को स्पष्ट करता है.. जिसमें वह खुद को एक आक्रामक लेकिन संवैधानिक विपक्ष के रूप में पेश करना चाहती है.. हम लावारिस नहीं, इंसान हैं हम  पहचान और अधिकार की राजनीति करते हैं..

 

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