तनाव चरम पर, बस ट्रिगर दबने की देर
ईरान-इजरायल आमने-सामने

- इजरायली सेना हाई अलर्ट पर, हम लडऩे को तैयार आईडीएफ चीफ
- ईरानी मिसाइलों का रूख इजरायल पर बस बटन दबाने की देर
- बेनतीजा बातचीत, उधर चीन ने भी अमेरिका का धमकाया
- रूसी एयरपोर्ट पर इजरायली नागरिकों की गिरफ्तारी
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। एक दूसरे के युद्धपोतों पर हमलों के बाद एक बार फिर मध्य पूर्व में जंग का मैदान तैयार है और बस बटन दबाने की देर है। आईडीएफ और आईआरजीसी ने स्वंय को हाई एलर्ट मोड पर तैयार रखा हैं। पाकिस्तान के जरिये सुलाह की कोशिशें नाकाम हो गयी और जंग के दरवाजे एक साथ कई मोर्चां पर खुलते हुए दिखाई दे रहे हैं। ईरान में विद्रोह को अंजाम देने वाली आठ महिलाओं को फांसी पर लटकने में वक्त कम बचा है। वहीं चीन ने अमेरिका की आख में आंख डालते हुए किसी भी कार्रवाई के अंजाम को अमेरिका को भुकतने के लिए तैयार रहने के लिए कहा है। वहीं रूसी एयरपोर्ट पर इजरायली नागरिकों की गिरफ्तारी का सुलगता मामला भी धधक चुका है। कुल मिलाकर जंग फेज टू का दायदा और वृहद होगा और इसमें कई दूसरे नये मुल्कों की भागीदारी भी हो सकती है।
इजरायली सेना हाई अलर्ट पर
पश्चिम एशिया संकट का हल फिलहाल नहीं निकला है। अमेरिका के राष्ट्रपति ने 2 हफ्ते के अस्थायी संघर्ष विराम की मियाद को बढ़ा दिया है। आईडीएफ चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल इयाल जमीर ने अपनी सेना को किसी भी परिस्थिति में तैयार रहने को कहा है। उन्होंने कहा कि ईरान और लेबनान में नाजुक युद्धविराम के बीच सेना हाई अलर्ट पर है और सभी मोर्चों पर लड़ाई के लिए तैयार है। आज राष्ट्रपति नेतनयाहू के घर पर इजरायली स्वतंत्रता दिवस समारोह में सम्मानित किए गए 120 बेहतरीन सैनिकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि 7 अक्टूबर की आग के बाद से हम लगातार लड़ाई के जरिए अपनी सैन्य ताकत को फिर से बढ़ाने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि गाजा में आईडीएफ हमास के खिलाफ लड़ाई में जीती और इस कमांड को बनाए रखा हमने किसी को नहीं बख्शा। सैनिकों का हौसला बढ़ाते हुए जमीर ने आगे कहा कि इस समय हम उत्तरी समुदायों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए लेबनान में जोरदार लड़ाई लड़ रहे हैं।
वैश्विक समीकरणों ने बढ़ाई जटिलता
तनाव केवल क्षेत्रीय स्तर तक सीमित नहीं है। चीन द्वारा अमेरिका को दी गई चेतावनी और रूस में इजरायली नागरिकों की गिरफ्तारी जैसी घटनाओं ने इस संकट को अंतरराष्ट्रीय आयाम दे दिया है। यदि महाशक्तियां खुलकर इसमें शामिल होती हैं तो यह संघर्ष बड़े भू-राजनीतिक टकराव में बदल सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, संभावित संघर्ष केवल जमीन तक सीमित नहीं रहेगा। हवाई हमले, ड्रोन स्ट्राइक और समुद्री मार्गों पर नियंत्रण की कोशिशें इस जंग का हिस्सा बन सकती हैं। मध्य-पूर्व के रणनीतिक जलमार्गों और हवाई क्षेत्रों का महत्व इस स्थिति को और संवेदनशील बना देता है।
कूटनीति की विफलता ने बढ़ाई चिंता
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि दोनों पक्षों के बीच चल रही बातचीत किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है। कूटनीतिक स्तर पर गतिरोध गहराता जा रहा है जिससे सैन्य विकल्पों की संभावना बढ़ती दिख रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब संवाद के रास्ते बंद होने लगते हैं तब गलतफहमियां और आक्रामक निर्णय तेजी से बढ़ते हैं। यही स्थिति फिलहाल क्षेत्र में दिखाई दे रही है। इजरायल की ओर से हाई अलर्ट और ईरान की ओर से मिसाइल तैयारी दोनों ही कदम केवल सुरक्षा उपाय नहीं बल्कि रणनीतिक संदेश भी हैं। इजरायल अपनी सैन्य क्षमता और तत्परता के जरिए विरोधियों को यह संकेत देना चाहता है कि वह किसी भी खतरे का सामना करने में सक्षम है। वहीं ईरान अपने बयान और तैयारी के जरिए यह दिखाने की कोशिश कर रहा है कि वह किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है। इस तरह के माहौल में डिटरेंस यानी एक दूसरे को डराकर रोकने की रणनीति अक्सर उल्टा असर भी डाल सकती है।
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्र्स का जवाब
दूसरी ओर, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉप्र्स (आईआरजीसी) की स्थापना की वर्षगांठ पर ईरानी सेना के कमांडर-इन-चीफ, मेजर जनरल अमीर हातामी ने भी संदेश जारी किया। अपनी सेना के शौर्य पराक्रम की प्रशंसा करते हुए कहा है कि आठ साल के पवित्र युद्ध और इजरायली-अमेरिकी शासन की ओर से थोपी गई जंग में आईआरजीसी ने सशक्त भूमिका निभाई। इस दौरान संस्था की सेनाओं की क्षमता, बुद्धिमत्ता और जिहादी भावना को प्रदर्शित किया गया। इस भूमिका ने एक बार फिर दुनिया के सामने इस्लामिक गणराज्य ईरान की डिफेंस पावर को सिद्ध कर दिया है। उन्होंने दावा किया कि आईआरजीसी सशस्त्र बलों के सुप्रीम कमांडर, अयातुल्ला सैयद मोजतबा खामेनेई की कमान में इस्लामी सरजमीं की क्षेत्रीय अखंडता को हर हाल में सुरक्षित रहने की गारंटी देती है।
आर्थिक असर की आशंका
इस टकराव का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका, व्यापार मार्गों में बाधा और निवेशकों की अनिश्चितता—ये सभी संकेत पहले से दिखाई देने लगे हैं। भारत समेत कई देशों की नजरें इस स्थिति पर टिकी हैं क्योंकि ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। हालांकि हालात गंभीर हैं लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि अभी भी कूटनीति के लिए जगह बची हुई है। कई अंतरराष्ट्रीय ताकतें पर्दे के पीछे तनाव कम करने की कोशिश कर रही हैं। लेकिन यदि बयानबाजी और सैन्य गतिविधियां इसी तरह बढ़ती रहीं तो हालात नियंत्रण से बाहर भी हो सकते हैं।




