सरकार बनाते ही BJP ने कर दिया खेला, Nitish सरकार के फैसले को पलटा
बिहार की राजनीति में सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा के बीच का रिश्ता काफी समय से चर्चा में रहा है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बिहार में बीजेपी नेता सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनते ही…बड़े बदलाव देखे जा रहे हैं…जैसे ही सम्राट चौधरी ने बिहार की सत्ता की कमान संभाली…
वैसे ही उन्होंने नीतीश सरकार के फैसलों को बदलना शुरू कर दिया…जिसके बाद सवाल उठने लगे कि क्या बिहार में बीजेपी अपने हिसाब से सरकार चलाएगी?……..दरअसल, बिहार की राजनीति में उस वक्त बड़ा मोड़ आ गया…जब सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बना दिया गया…
अब इस फैसले ने बीजेपी के उन वरिष्ठ नेताओं की उम्मीदों पर पानी फेर दिया…जो लंबे समय से इस आस में थे कि पार्टी का सीएम बनने पर उनका नंबर भी आ सकता है…लेकिन तमाम कयासों के बीच बाजी मार गए सम्राट चौधरी…जो कभी आरजेडी…तो कभी जेडीयू और फिर बीजेपी में पहुंचे…सम्राट चौधरी की ताजपोशी के बाद पार्टी के अंदर हलचल तेज हो गई है…खासकर विजय सिन्हा का नाम…जो सीएम पद की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा था…अब सियासी समीकरणों में पीछे छूटता दिखाई दे रहा है…चर्चा है कि संगठन और शीर्ष नेतृत्व का झुकाव भी कभी उनके पक्ष में था…लेकिन नीतीश कुमार ने पूरा खेल बदल दिया…
बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी अब विजय कुमार सिन्हा की पकड़ को कम करने में लग गए हैं…डिप्टी सीएम रहते हुए विजय कुमार सिन्हा के फैसलों को पलटा जा रहा है और नई मंत्री की लिस्ट में उनका नाम न होना भी कई सवाल खड़े कर रहा है…..ऐसे में माना जा रहा है कि पार्टी के अंदर पावर गेम को नए सिरे से तय किया जा रहा है…जिससे बिहार बीजेपी में अंदरूनी खींचतान और तेज हो सकती है…
बिहार की राजनीति में सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा के बीच का रिश्ता काफी समय से चर्चा में रहा है…दोनों नेताओं की राजनीतिक पृष्ठभूमि, कार्यशैली और महत्वाकांक्षाएं अलग-अलग रही हैं…जिसने समय-समय पर उनके बीच खींचतान की खबरों को जन्म दिया…लेकिन अब जब सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है और आते ही तेज़ फैसले लेने शुरू कर दिए हैं….तो यह तनातनी एक बार फिर खुलकर सामने आती दिख रही है…
मुख्यमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी जिस तरह से एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं…उसने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है…खास बात ये है कि उनके कई फैसले सीधे तौर पर विजय कुमार सिन्हा के पुराने फैसलों को पलटते हुए दिख रहे हैं…इससे ये सवाल उठने लगा है कि क्या बिहार बीजेपी के अंदर सब कुछ ठीक चल रहा है या फिर अंदरखाने कोई बड़ा टकराव पनप रहा है…चलिए, सबसे पहले उन फैसलों की बात करें…जिन्होंने इस बहस को हवा दी है…
तो सम्राट चौधरी ने सत्ता संभालते ही पूर्व डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा के उस फैसले को बदल दिया…जिसमें 224 राजस्व कर्मचारियों को निलंबित किया गया था…बता दें कि ये कर्मचारी पिछले ढाई महीने से सस्पेंड थे…लेकिन नई सरकार ने उनका निलंबन वापस लेते हुए उन्हें बहाल कर दिया…राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर सचिव महेंद्र पाल द्वारा सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी किए गए कि 11 फरवरी से 19 अप्रैल के बीच निलंबित कर्मचारियों को वापस सेवा में लिया जाए…
ये मामला उस समय का है…जब 11 फरवरी 2026 से बिहार के राजस्व कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गए थे…उस समय विजय कुमार सिन्हा राजस्व मंत्री थे और उन्होंने इस हड़ताल को अनुशासनहीनता मानते हुए सख्त कार्रवाई की थी…लेकिन सम्राट सरकार ने आते ही इस फैसले को पलट दिया…
जिससे ये संदेश गया कि नई सरकार पुराने फैसलों से अलग रास्ता अपनाना चाहती है…इतना ही नहीं, बिहार सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के लिए सिर्फ एक बार परीक्षा देने वाले सख्त प्रावधान को भी वापस ले लिया है…ये नियम भी विजय कुमार सिन्हा के कार्यकाल में लागू किया गया था…यानी लगातार ऐसे फैसले सामने आ रहे हैं…जो ये इशारा करते हैं कि सम्राट चौधरी खास तौर पर विजय कुमार सिन्हा के निर्णयों को बदल रहे हैं……..वहीं जब सम्राट चौधरी के इस फैसले को लेकर मीडिया द्वारा विजय कुमार सिन्हा से पूछा गया…
विजय कुमार सिन्हा इस सवाल के जवाब में चुप्पी साधे हुए नजर आएं….और यहीं से राजनीतिक चर्चा और तेज हो जाती है और सवाल उठता है कि आखिर सम्राट चौधरी की नजर सिर्फ विजय सिन्हा के फैसलों पर ही क्यों है?…क्या ये केवल नीतिगत बदलाव है या इसके पीछे कोई व्यक्तिगत या राजनीतिक वजह छिपी है?….फिलहाल, इन फैसलों के बाद ये चर्चा भी जोर पकड़ने लगी है कि सम्राट चौधरी कहीं विजय कुमार सिन्हा से अपनी पुरानी नाराजगी तो नहीं निकाल रहे…..दरअसल, हाल ही में विजय कुमार सिन्हा की सुरक्षा Z+ से घटाकर Z कर दी गई थी…जिसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं….ऐसे में सम्राट का ये रवैया बीजेपी के लिए असहज स्थिति पैदा कर सकता है…
दरअसल, इन दोनों नेताओं के बीच मतभेद कोई नया नहीं है…दोनों की राजनीतिक जड़ें और काम करने का तरीका एक-दूसरे से काफी अलग है…सम्राट चौधरी का राजनीतिक सफर आरजेडी और जेडीयू से होते हुए बीजेपी तक पहुंचा है…वो पिछड़े वर्ग के एक आक्रामक नेता के रूप में जाने जाते हैं और खासकर कोयरी-कुर्मी समीकरण में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है…वहीं, विजय कुमार सिन्हा बीजेपी के पुराने कैडर से आते हैं और उनकी पृष्ठभूमि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ी रही है…उन्हें सवर्ण राजनीति का प्रतिनिधि चेहरा माना जाता है…यही वैचारिक और सामाजिक अंतर दोनों नेताओं के बीच टकराव की एक बड़ी वजह रहा है…
इनके बीच पहली बड़ी सार्वजनिक टकराहट मई 2022 में देखने को मिली थी…जब बिहार विधानसभा में कार्यवाही के दौरान दोनों के बीच तीखी बहस हुई थी…उस समय विजय कुमार सिन्हा विधानसभा अध्यक्ष थे और सम्राट चौधरी मंत्री….बहस के दौरान सम्राट चौधरी की एक टिप्पणी पर विजय कुमार सिन्हा ने कड़ी आपत्ति जताई थी और इसे सदन की गरिमा के खिलाफ बताया था…यहीं से दोनों के रिश्तों में दूरी साफ नजर आने लगी थी…हालांकि, बीजेपी नेतृत्व ने समय-समय पर दोनों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की…जब नीतीश कुमार ने पाला बदलकर बीजेपी को विपक्ष में ला दिया…तब पार्टी ने दोनों नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी दी…सम्राट चौधरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया और विजय कुमार सिन्हा को नेता प्रतिपक्ष की भूमिका सौंपी गई…
लेकिन ये संतुलन ज्यादा समय तक टिक नहीं पाया…राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यहीं से दोनों नेताओं के बीच नंबर एक बनने की होड़ शुरू हो गई…दोनों ही खुद को बिहार बीजेपी का सबसे बड़ा चेहरा साबित करने में जुट गए……और जैसा कि आप जानते हैं कि बिहार की राजनीति में जातीय समीकरण बेहद अहम भूमिका निभाते हैं…ऐसे में बीजेपी के लिए ये दोनों नेता जरूरी हैं…एक तरफ सम्राट चौधरी पिछड़े वर्ग में पार्टी की पकड़ मजबूत कर रहे हैं…तो वहीं दूसरी ओर विजय कुमार सिन्हा सवर्ण वोट बैंक को संभालते हैं…यही वजह है कि पार्टी दोनों के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश करती रही है….
लेकिन अंदरखाने ये संघर्ष लगातार बना रहा…ये अक्सर देखने को मिला कि जब भी पार्टी कोई बड़ा कार्यक्रम या आंदोलन करती…तो दोनों गुटों के बीच पोस्टर वार शुरू हो जाता…सम्राट समर्थक उन्हें बिहार का भविष्य बताते…जबकि विजय कुमार सिन्हा के समर्थक उन्हें सच्चा सिपाही कहकर प्रचार करते हैं…जनवरी 2024 में जब बीजेपी और जेडीयू फिर से साथ आए…तो पार्टी ने एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए दोनों को उपमुख्यमंत्री बना दिया…ये कदम साफ तौर पर संतुलन साधने की कोशिश थी…लेकिन सत्ता में साथ रहने के बावजूद दोनों के बीच कथित मनमुटाव की खबरें आती रहीं…
विभागों के बंटवारे से लेकर प्रशासनिक फैसलों तक…कई मुद्दों पर दोनों के बीच मतभेद की चर्चा होती रही…सार्वजनिक मंचों पर भी उनकी बॉडी लैंग्वेज अक्सर सवाल खड़े करती रही…वहीं अब जब सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बना दिया गया है…तो ये टकराव एक नए स्तर पर पहुंच गया है…हालांकि ये भी माना जा रहा है कि ये फैसला बीजेपी की पहली पसंद नहीं था….मिली जानकारी के मुताबकि, पार्टी विजय कुमार सिन्हा और नित्यानंद राय जैसे नामों पर भी विचार कर रही थी….लेकिन आखिर में नीतीश कुमार की पसंद को तवज्जों दी गई और सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बने और इस फैसले ने बीजेपी के अंदर नई चुनौती खड़ी कर दी है…
अब सबसे बड़ा सवाल मंत्रिमंडल गठन को लेकर है…जहां विजय कुमार सिन्हा जैसे बड़े कद के नेता को कौन सा पद दिया जाए…ये बीजेपी के लिए मुश्किल बन गया है…अगर उन्हें छोटा मंत्रालय दिया जाता है…तो इसे उनके कद में कमी के तौर पर देखा जाएगा……ऐसे में उनके लिए दो ही ऑपशन माने जा रहे हैं….या तो उन्हें फिर से विधानसभा अध्यक्ष बनाया जाए…या फिर पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष….लेकिन इन दोनों ऑपशन्स के अपने-अपने राजनीतिक मायने हैं…
कुल मिलाकर, बीजेपी ने अब तक सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा…दोनों चेहरों के सहारे बिहार में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है…लेकिन ये पावर स्ट्रगल खत्म होता नहीं दिख रहा है…अब आने वाले विधानसभा चुनावों में ये अंदरूनी खींचतान पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है….



