उन्नाव: BEO अनीता शाह पर आरोप भारी, फिर भी नहीं छूटी कुर्सी… आखिर कौन बचा रहा?

उन्नाव के सफीपुर में खंड शिक्षा अधिकारी अनीता शाह पर भ्रष्टाचार के आरोपों के बावजूद 31 जुलाई 2025 का ट्रांसफर आदेश अब तक लागू नहीं हुआ। बीघापुर तबादला फाइलों में कैद है, जिससे शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही की बात अक्सर की जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत कई बार इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आती है। उन्नाव के सफीपुर ब्लॉक से सामने आया मामला इसी सवाल को फिर से चर्चा में ले आया है, जहां भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) अनीता शाह का तबादला आदेश महीनों बाद भी फाइलों से बाहर नहीं निकल पाया। 31 जुलाई 2025 को जारी ट्रांसफर आदेश के बावजूद आज तक उन्हें सफीपुर से बीघापुर नहीं भेजा गया। करीब 9 महीने बीत जाने के बाद भी वह उसी पद पर बनी हुई हैं, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

पूर्व BSA ने किया था तबादला

जानकारी के अनुसार, पूर्व बेसिक शिक्षा अधिकारी संगीता सिंह सेंगर ने खंड शिक्षा अधिकारी अनीता शाह के खिलाफ लगातार मिल रही शिकायतों और भ्रष्टाचार के आरोपों को देखते हुए उनका तबादला सफीपुर से बीघापुर कर दिया था। आदेश 31 जुलाई 2025 को जारी हुआ, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि आज तक इस पर अमल नहीं हुआ।

मौजूदा BSA के कार्यकाल में भी नहीं हुई कार्रवाई

वर्तमान BSA शैलेश पाण्डेय के कार्यकाल में भी यह आदेश ठंडे बस्ते में पड़ा हुआ है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि ट्रांसफर फाइल आगे नहीं बढ़ाई गई, जिससे यह मामला और संदिग्ध हो गया है। अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किसके संरक्षण में आदेश को रोका गया?

सिलेंडर रिफिलिंग मामले में भी आई थीं सुर्खियों में

अनीता शाह इससे पहले सिलेंडर रिफिलिंग मामले को लेकर भी चर्चा में रही थीं। उस मामले ने भी विभागीय कार्यशैली और निगरानी पर सवाल खड़े किए थे। स्थानीय स्तर पर लगातार उन पर मनमानी और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं।

सफीपुर ब्लॉक में बढ़ते सवाल

सफीपुर ब्लॉक में शिक्षकों और स्थानीय लोगों के बीच यह मामला लंबे समय से चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप है कि कार्रवाई न होने से विभागीय अनुशासन प्रभावित हो रहा है और गलत संदेश जा रहा है। कई लोगों का कहना है कि यदि ट्रांसफर आदेश भी प्रभावी नहीं होंगे, तो जवाबदेही की व्यवस्था कैसे मजबूत होगी।

विभाग की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

एक ओर सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख की बात करती है, वहीं दूसरी ओर ऐसे मामलों में कार्रवाई का लंबा इंतजार कई सवाल खड़े करता है। यदि आरोपों के बाद भी अधिकारी पद पर बने रहते हैं, तो इससे विभाग की पारदर्शिता और विश्वसनीयता दोनों प्रभावित होती हैं।

रिपोर्ट – रंजन बाजपाई

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