बांदा में दबंगई का आतंक: घर में घुसकर हमला, बहन का हाथ टूटा, कानून-व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
बांदा के बिलहरका गांव में दबंगों ने घर में घुसकर युवक और उसके परिवार पर हमला किया, जिसमें बहन का हाथ टूट गया। घटना ने पुलिस की कार्यशैली और कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, ग्रामीणों में डर और आक्रोश है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: बांदा जिले में कानून-व्यवस्था को चुनौती देती एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया है। बिलहरका गांव में 7–8 दबंगों द्वारा दिनदहाड़े एक परिवार पर किए गए हमले ने न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि ग्रामीणों में गुस्सा और डर दोनों बढ़ा दिए हैं।
घटना के अनुसार, पीड़ित युवक राहुल सिंह के घर में घुसकर हमलावरों ने अचानक जानलेवा हमला कर दिया। जब परिवार की महिलाएं बहन और मां उन्हें बचाने के लिए आगे आईं, तो दबंगों ने उन्हें भी बेरहमी से पीट दिया। इस हमले में युवती का हाथ टूट गया, जिससे उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।
शराब के नशे में दबंगों का आतंक
स्थानीय लोगों का कहना है कि आरोपित अक्सर शराब के नशे में गांव में दहशत फैलाते हैं। कई बार मारपीट और धमकी की घटनाएं सामने आने के बावजूद, ठोस कार्रवाई न होने से उनके हौसले लगातार बढ़ते गए। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस की ढिलाई के कारण दबंग इतने बेखौफ हो गए कि अब घरों में घुसकर सीधे हमला करने लगे हैं। पीड़ित परिवार का कहना है कि उन्होंने इस मामले की शिकायत पहले भी स्थानीय थाने में की थी, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। परिवार का आरोप है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया। इसी लापरवाही के कारण दबंगों ने दोबारा हमला कर दिया, जिसमें पूरा परिवार बुरी तरह घायल हो गया।
एसपी कार्यालय पहुंचा पीड़ित परिवार
हमले के बाद पीड़ित परिवार न्याय की मांग को लेकर बांदा पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा। यहां उन्होंने सुरक्षा और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने कर्तल थाना पुलिस को तत्काल जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। हालांकि, ग्रामीणों का सवाल अब भी वही है, क्या अगर समय रहते कार्रवाई होती, तो यह दर्दनाक घटना टल सकती थी?
घटना के बाद बिलहरका गांव में भय और आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो स्थिति और बिगड़ सकती है। गांव के लोगों के अनुसार, दबंगों का यह रवैया लंबे समय से जारी है, लेकिन अब तक उन्हें रोकने के लिए कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया।
घायल युवती ने भावुक होकर कहा “हमें बस न्याय चाहिए… क्या अपने ही घर में जीना भी अब खतरे से खाली नहीं?” उसकी यह बात गांव की मौजूदा स्थिति की सच्चाई को बयां करती है, जहां लोग अपने ही घरों में सुरक्षित महसूस नहीं कर पा रहे हैं।
बड़ा सवाल, दबंगों पर लगाम कब?
यह घटना सिर्फ एक पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था की गंभीर चुनौती बनकर सामने आई है। सवाल यह है कि-
- क्या दबंगों पर समय रहते लगाम लगेगी?
- क्या शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा?
- और सबसे महत्वपूर्ण, पुलिस की जवाबदेही तय कौन करेगा?
बांदा की यह घटना प्रशासन के लिए एक चेतावनी की तरह है, जहां अब कार्रवाई केवल बयान नहीं, जमीन पर दिखाई देनी जरूरी है।
रिपोर्ट -इक़बाल खान
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