पूर्व सांसद डॉ. रमेश चंद बिंद ने पीड़ित परिवारों को दी 50 हजार की मदद, बोले, हम हमेशा साथ खड़े रहेंगे
मिर्जापुर के ड्रमंडगंज घाटी हादसे में 12 लोगों की मौत के बाद पूर्व सांसद डॉ. रमेश चंद बिंद पीड़ित परिवारों से मिले। उन्होंने 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी और पुलिस व फायर ब्रिगेड की लापरवाही पर सवाल उठाए।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मिर्जापुर के ड्रमंडगंज घाटी में हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को गहरे शोक में डाल दिया है। इस भीषण दुर्घटना में 12 लोगों की जिंदा जलकर मौत हो गई, जिसके बाद हर तरफ मातम पसरा हुआ है। इस त्रासदी के बीच समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद डॉ. रमेश चंद बिंद पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे और उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान की। पूर्व सांसद ने अपनी बेटी ज्योति बिंद के साथ शोक संतप्त परिवारों से मुलाकात की, संवेदना व्यक्त की और अपनी ओर से 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी। इस दौरान उन्होंने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए।
पीड़ित परिवारों से मिलकर जताई संवेदना
डॉ. रमेश चंद बिंद ने कहा कि ड्रमंडगंज घाटी में हुई यह घटना बेहद दर्दनाक और असहनीय है। एक ही हादसे में 12 लोगों की जान चली जाना पूरे समाज के लिए बड़ा आघात है। उन्होंने कहा, “हम आज पीड़ित परिवारों से मिलकर शोक संवेदना व्यक्त करने आए हैं। यह दुख केवल उनका नहीं, हम सबका है। हमने अपनी ओर से 50 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी है और हम तन, मन और धन से हमेशा उनके साथ खड़े रहेंगे।”
प्रशासनिक लापरवाही पर उठाए सवाल
पूर्व सांसद ने इस हादसे को लेकर पुलिस और फायर ब्रिगेड की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर समय पर राहत और बचाव कार्य शुरू हो जाता, तो शायद कुछ लोगों की जान बचाई जा सकती थी। उनका कहना था कि दुर्घटना के तुरंत बाद यदि फायर ब्रिगेड की गाड़ी और बचाव दल मौके पर पहुंच जाते, तो इतना बड़ा नुकसान टाला जा सकता था। उन्होंने कहा, “लापरवाही के कारण आज इतने परिवार उजड़ गए। अगर समय पर पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम पहुंच जाती, तो शायद कुछ लोगों को बचाया जा सकता था।”
विपक्ष की भूमिका पर भी दिया जवाब
मीडिया द्वारा विपक्षी दलों के सांसदों और अन्य नेताओं की भूमिका पर सवाल पूछे जाने पर डॉ. रमेश चंद बिंद ने साफ कहा कि राजनीति से ऊपर उठकर मानवता को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में केवल बयान नहीं, बल्कि जमीन पर जाकर पीड़ितों के साथ खड़ा होना जरूरी है।
पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल
ड्रमंडगंज घाटी हादसे के बाद पूरे मिर्जापुर और आसपास के क्षेत्रों में गहरा शोक है। जिन परिवारों ने अपने अपनों को खोया है, उनके घरों में चीख-पुकार और मातम का माहौल है। स्थानीय लोग भी प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि हादसे की निष्पक्ष जांच हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएं।
राहत से ज्यादा जरूरी जवाबदेही
यह हादसा केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि आपदा प्रबंधन और प्रशासनिक तैयारी पर भी बड़ा सवाल है। पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है यह सुनिश्चित करना कि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोहराई न जाए। डॉ. रमेश चंद बिंद की यह पहल जहां मानवीय संवेदना का संदेश देती है, वहीं प्रशासन को भी अपनी जिम्मेदारी याद दिलाती है।
रिपोर्ट -संतोष देव गिरी
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