Iran ने सीजफायर के दौरान खेली बड़ी बाजी; घबरा उठा America, बैकफुट पर Trump
ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के बीच एक नई और दिलचस्प तस्वीर सामने आ रही है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सुपरपावर देश अमेरिका इन दिनों डोनाल्ड ट्रंप की सनक के चलते बड़ी मुसीबत में फंस चुका है…खबर है कि एक ओर जहां सीजफायर के बीच ईरान ने एक ऐसी चाल चल दी है…
जिससे अमेरिकी सेना घबराई उठी है…तो ट्रंप खुद ईरान से फोन पर कनेक्ट होने को मजबूर हो गए हैं……जिससे अब बात सुपरपावर देश अमेरिका की नाक पर बन आई है…तो आखिर ईरान ने ऐसी कौन सी चाल चल दी है…जिससे अमेरिकी सेना समेत ट्रंप में खौफ पैदा कर दिया और तो और ट्रंप को ईरान से बात करने पर मजबूर होना पड़ा..
ट्रम्प ने राइफल के साथ फोटो शेयर करते हुए ईरान को धमकी दी और कहा कि… अब ज्यादा नरमी नहीं बरतेंगे…तो कैसे अमेरिका के खिलाफ ईरान UN पहुंच गया और सीजफायर होने के बावजूद अमेरिका की समुद्री डकैती को एक्सपोज कर के रख दिया…
दरअसल, ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के बीच एक नई और दिलचस्प तस्वीर सामने आ रही है….ऊपर से भले ही सीजफायर लागू हो…लेकिन अंदर ही अंदर दोनों देश अपनी-अपनी रणनीति को और मजबूत करने में लगे हैं….जिसे देखकर ऐसा लग रहा है कि ईरान ने शांति के इस दौर को अपने पक्ष में इस्तेमाल कर लिया है…जबकि अमेरिका अब थोड़ा दबाव में नजर आ रहा है…सबसे पहले समझते हैं कि आखिर हुआ क्या है…….तो अमेरिका और ईरान के बीच फिलहाल सीजफायर यानी युद्धविराम लागू है…
आम तौर पर ऐसे समय में देश बातचीत को आगे बढ़ाते हैं…लेकिन यहां मामला उल्टा पड़ गया है…ईरान ने इस मौके का इस्तेमाल अपनी सैन्य ताकत को छिपाने और मजबूत करने के लिए किया…रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने अपने कई बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर को इतनी अंदरूनी जगहों पर शिफ्ट कर दिया है कि अब वो अमेरिका की मौजूदा मिसाइलों की पहुंच से बाहर हो गए हैं…
जिससे अमेरिकी सेना घबरा उठी है और ट्रंप से मांग ‘ब्रह्मास्त्र’ रही है…क्योंकि, अमेरिकी सेना को अब ये महसूस हो रहा है कि…उनके पास मौजूद हथियार ईरान के इन छिपे ठिकानों को निशाना बनाने के लिए पर्याप्त नहीं हैं…कम हैं…इसी वजह से अब अमेरिका अपनी सबसे एडवांस हाइपरसोनिक मिसाइल ‘डार्क ईगल’ को तैनात करने पर विचार कर रहा है…
मिसाइल बेहद तेज और लंबी दूरी तक मार करने वाली है…लेकिन अभी पूरी तरह से ऑपरेशनल भी नहीं हुई है….यहां एक और जरूरी बात ये है कि…ये हथियार बहुत सीमित और महंगा है…एक मिसाइल की कीमत करोड़ों डॉलर में है और इसकी संख्या भी बहुत कम है…इसका मतलब ये है कि अमेरिका के पास ऑप्शन सीमित हैं और उसे बहुत सोच-समझकर कदम उठाना होगा….यही वजह है कि अमेरिका अब सीधे सैन्य कार्रवाई के बजाय diplomatic रास्ते पर भी जोर दे रहा है….
वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तो पहले ही ईरान के खिलाफ सख्त बयान दे चुके हैं…उन्होंने कहा था कि ईरान पर दबाव जारी रहेगा और उसे परमाणु मुद्दे पर झुकना ही होगा…लेकिन अब हालात थोड़े बदलते हुए दिखाई दे रहे हैं…
खबर है कि ट्रंप अब सीधे ईरान से फोन पर बातचीत कर रहे हैं…जोकि एक बड़ा संकेत है कि अमेरिका भी अब बातचीत के जरिए हल निकालने की कोशिश कर रहा है…….एक ओर जहां ट्रंप अब खुद बैकफुट पर नजर आ रहे हैं…तो वहीं दूसरी ओर इस पूरे मामले में पाकिस्तान का रोल भी चर्चा में रहा….शुरुआत में पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता करने की कोशिश की थी…लेकिन ये कोशिश फेल हो…ईरान ने साफ तौर पर पाकिस्तान पर भरोसा करने से इनकार कर दिया…ईरानी सांसद इब्राहिम रेजाई ने तो यहां तक कह दिया कि पाकिस्तान अमेरिका के ज्यादा करीब है और उस पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता….
हालांकि, उन्होंने ये भी माना कि पाकिस्तान एक अच्छा पड़ोसी है…लेकिन जब बात संवेदनशील बातचीत की आती है…तो भरोसा सबसे जरूरी होता है…यही वजह है कि अब पाकिस्तान इससे पूरी तरह से लगभग बाहर हो गया है….वहीं दूसरी ओर ट्रंप ने राइफल के साथ फोटो शेयर करते हुए ईरान को सीधी धमकी देकर ईरान को फिर से भड़का दिया है…
ट्रम्प ने कहा कि जल्दी समझदार बनो, अब ज्यादा देर नरमी नहीं बरती जाएगी…जिसके बाद गुस्साया ईरान…अमेरिका के खिलाफ UN पहुंचा और ईरान ने अमेरिका के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में शिकायत की है….तेहरान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक चिट्ठी में ईरान ने अमेरिका पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं…ईरान का कहना है कि अमेरिका ने उसके जहाजों को जब्त करके ‘समुद्री डकैती’ की है…
इस बीच एक और दिलचस्प पहलू सामने आया…बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप और Vladimir Putin के बीच लंबी फोन बातचीत हुई….करीब 90 मिनट तक चली इस बातचीत को क्रेमलिन ने दोस्ताना और प्रभावी बताया…इस दौरान ईरान, यूक्रेन और अन्य वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई….इसका मतलब साफ है कि अमेरिका अब इस पूरे मामले में रूस को भी एक अहम खिलाड़ी के रूप में देख रहा है…
अब सवाल उठता है कि क्या अमेरिका वाकई बैकफुट पर है?…तो इसका जवाब पूरी तरह हां या नहीं में देना आसान नहीं है…लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि ईरान ने इस बार रणनीतिक बढ़त हासिल कर ली है….उसने बिना सीधे टकराव के अपनी सैन्य स्थिति मजबूत कर ली है…जबकि अमेरिका को अब अपने ऑप्शन्स पर दोबारा सोचना करना पड़ रहा है….दूसरी तरफ, भारत भी इस पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है…
ईरान के विदेश मंत्री सैय्यद अब्बास अराघची और भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar के बीच हाल ही में बातचीत हुई…इस बातचीत में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम मुद्दे पर चर्चा की गई…जो दुनिया की ऊर्जा सप्लाई के लिए बेहद जरूरी समुद्री मार्ग है….
ये बातचीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है…क्योंकि अगर इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है…तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है…खासकर तेल की कीमतों पर…भारत जैसे देश, जो ऊर्जा के लिए आयात पर निर्भर हैं…उनके लिए ये स्थिति और भी संवेदनशील हो जाती है…अब अगर पूरे घटनाक्रम को एक साथ देखें…तो एक साफ तस्वीर बनती है…
जिसमें ईरान ने सीजफायर के दौरान अपनी सैन्य रणनीति को मजबूत किया…अमेरिका को चौंका दिया और अब बातचीत में भी बेहतर स्थिति में नजर आ रहा है…वहीं अमेरिका, जो पहले आक्रामक रुख में था…अब बातचीत पर ज्यादा ध्यान दे रहा है….
डोनाल्ड ट्रंप का ईरान से सीधे फोन पर बात करना इस बात की ओर ईशारा करता है कि अमेरिका भी अब स्थिति को ज्यादा बिगाड़ना नहीं चाहता…साथ ही रूस से बातचीत ये दिखाती है कि वो इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बैलेंस करने की कोशिश कर रहा है…कुल मिलाकर, ये पूरा मामला सिर्फ दो देशों के बीच का टकराव नहीं है…बल्कि एक बड़ी वैश्विक रणनीतिक शतरंज का हिस्सा है…
ईरान ने इस बार चालाकी से अपनी चाल चली है और अमेरिका को सोचने पर मजबूर कर दिया है…अब आने वाले दिनों में ये देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या ये तनाव बातचीत से खत्म होता है या फिर एक नए टकराव की ओर बढ़ता है…फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि युद्धविराम के इस शांत दिखने वाले दौर में भी असली खेल जारी है और इस बार ईरान ने बाजी मारने की कोशिश में अमेरिका को बैकफुट पर लाकर खड़ा कर दिया है..



