मोदी के फुटबॉल वाले बयान पर सियासत, नेहा ने जमकर लगाई लताड़

नेहा सिंह राठौर ने पीएम मोदी की एक हरकत को बेशर्मी बताते हुए कहा मणिपुर सुलग रहा है लेकिन प्रधानमंत्री छोटे-छोटे बच्चों के साथ फुटबॉल खेल रहे हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: इस भाजपा राज में जनता का हाल बेहाल है, लोगों के पास रोजगार नहीं है आए दिन लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन साहब है कि वो अपनी ही मस्ती में मस्त नजर आ रहे हैं। साहब जनता के हालात से बेखबर होकर अलग ही दुनिया में जी रहे हैं।

जिसपर विपक्ष और आम जनता भी उन्हें लगातार लताड़ लगाती हुई नजर आ रही है। इसी बीच नेहा सिंह राठौर ने पीएम मोदी की एक हरकत को बेशर्मी बताते हुए कहा मणिपुर सुलग रहा है लेकिन प्रधानमंत्री छोटे-छोटे बच्चों के साथ फुटबॉल खेल रहे हैं।  यह बयान हाल ही में सिक्किम के गंगटोक में पीएम मोदी द्वारा बच्चों के साथ फुटबॉल खेलने की तस्वीरों के बाद वायरल हुआ। लोकगायिका और राजनीतिक टिप्पणीकार नेहा सिंह राठौर ने इसे देश के दुर्भाग्य या प्रधानमंत्री की बेशर्मी करार दिया।

मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय हिंसा ने राज्य को तबाह कर रखा है। सैकड़ों मौतें, हजारों घर जलाए गए, 60 हजार से अधिक लोग विस्थापित हुए, महिलाओं के साथ अमानवीय अत्याचार हुए – निर्वस्त्र घुमाया जाना, सामूहिक बलात्कार की घटनाएं। राज्य में शांति स्थापना में केंद्र सरकार की भूमिका पर सवाल उठते रहे।

विपक्ष ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने शुरुआती महीनों में चुप्पी साध ली, संसद में चर्चा से कतराया और राज्य का दौरा करने में दो साल लग गए। सितंबर 2025 में आखिरकार मोदी का मणिपुर दौरा हुआ, जहां उन्होंने शांति की अपील की और विकास परियोजनाओं की घोषणा की, लेकिन आलोचक इसे ‘बहुत कम, बहुत देर से’ मानते हैं।

नेहा सिंह राठौर जैसे आलोचक इस संदर्भ में पीएम की फुटबॉल वाली तस्वीर को प्रतीकात्मक तौर पर पेश करते हैं – एक तरफ राज्य जल रहा है, दूसरी तरफ प्रधानमंत्री दूसरे राज्यों में बच्चों के साथ खेल-कूद में व्यस्त। उनका कहना है कि यह जनता से कटाव दर्शाता है। जब मणिपुर की बेटियां सुरक्षा के लिए तरस रही थीं, तब केंद्र की प्राथमिकताएं कहीं और थीं।

राठौर की टिप्पणी सत्ताधारी दल की ‘इमेज मैनेजमेंट’ की आलोचना करती है – जहां विकास, योग, खेल और फोटो-ऑप को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है, लेकिन गंभीर संकटों पर ठोस कार्रवाई नदारद रहती है।

बीजेपी सरकार पर आरोप है कि मणिपुर में स्थानीय भाजपा सरकार की नीतियों ने संघर्ष को भड़काया। राज्यपाल की रिपोर्ट, सुरक्षा बलों की निष्क्रियता और केंद्र की मौन नीति ने स्थिति को बिगड़ने दिया। जबकि पूरे देश में ‘सबका साथ, सबका विकास’ का नारा गूंजता रहा, मणिपुर जैसे संवेदनशील क्षेत्र में केंद्र की उदासीनता सवाल खड़े करती है।

विपक्षी दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि मोदी सरकार चुनिंदा मुद्दों पर तेजी दिखाती है – चुनावी राज्यों में विकास की घोषणाएं, लेकिन जहां वोट बैंक कमजोर हो, वहां उपेक्षा। मणिपुर की हिंसा को ‘राज्य का आंतरिक मामला’ बताकर केंद्र ने जिम्मेदारी से किनारा किया, जबकि संवैधानिक दायित्व प्रधानमंत्री का है पूरे देश की एकता और सुरक्षा सुनिश्चित करना।

राठौर की आलोचना सिर्फ एक घटना तक सीमित नहीं। वे लगातार मोदी सरकार की ‘प्रचार प्रधान’ शैली पर सवाल उठाती रही हैं। फुटबॉल वाला वीडियो उनके लिए प्रतीक बन गया – जब देश के एक हिस्से में आग लगी हो, तो प्रधानमंत्री का बच्चों के साथ खेलना ‘बेशर्मी’ लगता है क्योंकि यह पीड़ा से अनभिज्ञता या जानबूझकर अनदेखी दर्शाता है।

मणिपुर में महिलाओं के सम्मान की बात करने वाले आज महिला सशक्तिकरण का ढिंढोरा पीटते हैं, लेकिन उस वक्त चुप्पी साधे रहे जब वीडियो वायरल होकर पूरे देश को झकझोर गया। नेहा राठौर की ‘बेशर्मी’ वाली टिप्पणी इसी गुस्से और निराशा की अभिव्यक्ति है जो कई नागरिक महसूस करते हैं। सत्ता को आईना दिखाने वाली ऐसी आवाजों को दबाने की बजाय, गंभीर मुद्दों पर संवाद और समाधान की जरूरत है। मणिपुर की पीड़ा को भुलाकर भारत की प्रगति अधूरी रहेगी।

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