अहमदाबाद का खड़िया वॉर्ड, 57 साल बाद BJP का किला ढहा | बड़ा सियासी संकेत?
गुजरात स्थानीय निकाय चुनावों में जहां भाजपा ने 15 नगर निगमों में जीत दर्ज की... वहीं अहमदाबाद के खड़िया वॉर्ड में बड़ा उलटफेर देखने को मिला...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः गुजरात के स्थानीय निकाय चुनाव 2026 के नतीजे घोषित हो गए हैं.. और इनमें भाजपा ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन किया है.. पार्टी ने राज्य के सभी 15 नगर निगमों पर कब्जा कर लिया है.. कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को बड़े स्तर पर झटका लगा है.. भाजपा ने शहरी.. और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में अपनी मजबूत पकड़ दिखाई..
कुल मिलाकर भाजपा ने लगभग 6,472 सीटें जीतीं.. जबकि कांग्रेस और AAP काफी पीछे रह गए। इस भारी जीत के बावजूद एक जगह की चर्चा पूरे राज्य में हो रही है.. जो अहमदाबाद का खड़िया वार्ड है.. यहां 57 सालों में पहली बार भाजपा के सभी उम्मीदवार हार गए.. और कांग्रेस ने क्लीन स्वीप कर दिया.. यह नतीजा भाजपा की बड़ी जीत के बीच एक बड़ा अपवाद बन गया है.. 28 अप्रैल 2026 को मतगणना के बाद जो नतीजे आए.. उनमें भाजपा की ताकत साफ दिखी.. गुजरात में 15 नगर निगमों में चुनाव हुए थे.. इनमें अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, राजकोट, जामनगर, भावनगर, गांधीनगर, नवसारी, पोरबंदर, मोरबी, सुरेंद्रनगर, मेहसाणा, आनंद, नडियाद और वापी शामिल थे..
भाजपा ने इन सभी 15 नगर निगमों में बहुमत हासिल किया.. अहमदाबाद नगर निगम में भाजपा ने 192 सीटों में से 160 सीटें जीतीं.. जबकि कांग्रेस को सिर्फ 32 सीटें मिलीं.. सूरत में भाजपा ने 115 सीटें जीतीं.. और AAP का प्रदर्शन बहुत कमजोर रहा.. वडोदरा में भी भाजपा ने 69 सीटें हासिल की.. नए बने नगर निगमों जैसे मोरबी और पोरबंदर में भाजपा ने क्लीन स्वीप किया.. ग्रामीण क्षेत्रों में भी भाजपा ने जिला पंचायतों.. और तालुका पंचायतों में अच्छा प्रदर्शन किया.. कुल 9,992 सीटों में भाजपा का वर्चस्व साफ था..
वहीं यह जीत इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चुनाव से पहले एंटी-इंकंबेंसी की बातें हो रही थी.. पुराने पार्षदों के खिलाफ नाराजगी भी थी.. गर्मी के मौसम में मतदान हुआ.. फिर भी भाजपा ने अपनी मशीनरी को अच्छी तरह चलाया.. पार्टी ने विकास कार्यों, सड़क, पानी, सफाई और बुनियादी सुविधाओं को अपना मुख्य मुद्दा बनाया था..
अहमदाबाद नगर निगम के कुल 48 वार्डों में खड़िया वार्ड सबसे ज्यादा चर्चा में रहा.. यह वार्ड अहमदाबाद के पुराने शहर का हिस्सा है.. खड़िया को लंबे समय से भाजपा का गढ़ माना जाता था.. यहां 57 सालों से भाजपा या पहले जनसंघ का कब्जा था.. यह इलाका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ.. और भाजपा की विचारधारा का केंद्र रहा है.. लेकिन इस बार नतीजे उलट गए.. खड़िया वार्ड में 4 सीटें हैं.. कांग्रेस के चारों उम्मीदवारों ने जीत हासिल की.. और भाजपा के सभी उम्मीदवार हार गए..
कांग्रेस के विजयी उम्मीदवारों में ध्रुव प्रियकांत कलापी, इलियास खान, मीना नायक.. और बीरजू ठक्कर शामिल हैं.. भाजपा के उम्मीदवारों में पूर्व पार्षद पंकज भट्ट, परेश कुमार आनंद (पूर्व मेयर के बेटे), श्वेतल शाह और हेतलबेन नायक थे.. कांग्रेस ने इन सभी को हराया.. जीत के अंतर भी अच्छे रहे.. वहीं यह पहला मौका है जब इतने लंबे समय बाद खड़िया में भाजपा पूरी तरह बाहर हो गई..
यह नतीजा भाजपा के लिए बड़ा झटका है.. क्योंकि यह वार्ड उसकी विचारधारा का प्रतीक माना जाता था.. खड़िया वार्ड में भाजपा की हार के कई कारण बताए जा रहे हैं.. स्थानीय लोग कहते हैं कि पुराने पार्षदों के काम से नाराजगी थी.. इलाके में साफ-सफाई, पानी की समस्या, नालियों का जाम.. और ट्रैफिक जैसी छोटी-छोटी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई थी.. कांग्रेस ने इन मुद्दों को अच्छी तरह उठाया.. पार्टी के उम्मीदवारों ने घर-घर जाकर लोगों से संपर्क किया.. और वादा किया कि वे स्थानीय समस्याओं को प्राथमिकता देंगे..
कुछ रिपोर्ट्स में AIMIM के वोटों के बंटवारे का भी जिक्र है.. लेकिन इस बार कांग्रेस ने मजबूती से लड़ाई लड़ी.. खड़िया में हिंदू बहुल आबादी है.. लेकिन स्थानीय स्तर पर कुछ सामाजिक और आर्थिक मुद्दे उभरे.. पुरानी पीढ़ी के साथ नई पीढ़ी के वोटर भी बदलाव चाहते थे.. भाजपा के कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं में भी अंदरूनी कलह की खबरें आईं..
भाजपा नेताओं ने कहा कि यह सिर्फ एक वार्ड की हार है.. और पूरे अहमदाबाद में पार्टी ने 160 सीटें जीती हैं.. फिर भी खड़िया की हार पर पार्टी के अंदर चर्चा हो रही है.. कांग्रेस के लिए खड़िया की जीत एक बड़ी राहत है.. पूरे गुजरात में कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत कमजोर रहा.. अहमदाबाद में भी उसे सिर्फ 32 सीटें मिलीं.. लेकिन खड़िया में क्लीन स्वीप ने पार्टी के कार्यकर्ताओं में कुछ उत्साह भर दिया..



