कानपुर: 3 घंटे तक धधकती रही आग, राखी मंडी में सामने आई प्रशासनिक लापरवाही?

कानपुर के राखी मंडी क्षेत्र में प्लास्टिक फैक्ट्री और गोदाम में लगी भीषण आग पर 3 घंटे बाद काबू पाया गया। हादसे के बाद अवैध फैक्ट्रियों, कबाड़ कारोबार और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्कः कानपुर के जूही थाना क्षेत्र स्थित राखी मंडी में शुक्रवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक प्लास्टिक उत्पाद बनाने वाली फैक्ट्री और गोदाम में भीषण आग लग गई। कुछ ही मिनटों में आग ने इतना विकराल रूप ले लिया कि आसपास के इलाके में दहशत फैल गई। काले धुएं के गुबार दूर-दूर तक दिखाई देने लगे और लोगों में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।

घटना बारा देवी स्थित शर्मा मोटर्स के पीछे की बताई जा रही है, जहां बाइक वाइजर और अन्य प्लास्टिक सामान तैयार करने का काम किया जाता था। सूचना मिलते ही कई दमकल गाड़ियां, पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। करीब तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका।

प्लास्टिक और ज्वलनशील सामान ने बढ़ाई आग की भयावहता

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गोदाम में भारी मात्रा में प्लास्टिक और ज्वलनशील सामग्री रखी हुई थी। इसी वजह से आग तेजी से फैलती चली गई और कुछ ही देर में पूरे परिसर को अपनी चपेट में ले लिया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर दमकल विभाग समय पर नहीं पहुंचता, तो आग आसपास की बस्तियों तक पहुंच सकती थी। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक, इस हादसे में लाखों रुपये का सामान जलकर राख हो गया है।

हजारों लोगों की जिंदगी खतरे में थी

सबसे गंभीर बात यह रही कि जिस स्थान पर आग लगी, उसके ठीक सामने बड़ी संख्या में झुग्गी-झोपड़ियां मौजूद हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार यहां करीब 4 से 5 हजार लोग रहते हैं, जिनमें अधिकांश कबाड़ कारोबार से जुड़े हैं।

आसपास अवैध रूप से कबाड़ का भंडारण भी किए जाने की बात सामने आ रही है। ऐसे में अगर आग और फैल जाती, तो यह हादसा बड़े जनहानि का कारण बन सकता था।

“राखी मंडी बारूद के ढेर पर बैठी है”

घटना के बाद क्षेत्रीय पार्षद पति सुनील कनौजिया ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राखी मंडी इलाके में रिहायशी क्षेत्र के बीच अवैध रूप से फैक्ट्रियां और कबाड़ गोदाम संचालित किए जा रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग कार्रवाई नहीं कर रहे।

उन्होंने मांग की कि अवैध फैक्ट्रियों और कबाड़ कारोबार को तत्काल हटाया जाए, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।

प्रशासन और विभागों पर उठे कई सवाल

इस घटना के बाद अब कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं-

  • क्या इन फैक्ट्रियों के पास फायर विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की वैध एनओसी थी?
  • रिहायशी इलाके में ज्वलनशील सामग्री का भंडारण कैसे किया जा रहा था?
  • क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
  • अगर आग झुग्गियों तक पहुंच जाती, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेता?

स्थानीय लोगों का कहना है कि इलाके में लंबे समय से अवैध गतिविधियां चल रही हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

जांच में जुटा फायर विभाग और पुलिस

फिलहाल पुलिस और फायर विभाग आग लगने के कारणों की जांच कर रहे हैं। शुरुआती जांच में शॉर्ट सर्किट या तकनीकी खराबी की आशंका जताई जा रही है, हालांकि अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इस घटना ने एक बार फिर कानपुर में अवैध फैक्ट्रियों, कबाड़ मंडियों और सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर बहस छेड़ दी है। अब लोगों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी है कि क्या यह मामला भी सिर्फ जांच तक सीमित रहेगा या वास्तव में कोई सख्त कदम उठाया जाएगा।

रिपोर्ट: प्रांजुल मिश्रा

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