उन्नाव: कोर्ट केस के बावजूद कब्जा! BJP के दो MLA आमने-सामने, जमीन को लेकर खुला युद्ध!

उन्नाव में BJP के दो विधायकों ब्रजेश रावत और पंकज गुप्ता के बीच जमीन विवाद ने तूल पकड़ लिया है। कोर्ट में मामला लंबित होने के बावजूद कब्जे की कोशिश, धमकी और पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल, जानिए पूरा मामला।

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क: उन्नाव से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर की खींचतान को खुलकर सामने ला दिया है। मामला केवल जमीन का नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रभाव और स्थानीय वर्चस्व की लड़ाई का भी माना जा रहा है। एक ही पार्टी के दो विधायकों के बीच टकराव ने प्रशासनिक निष्पक्षता और कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद उन्नाव के सदर कोतवाली क्षेत्र के राजेपुर वाजिदपुर इलाके का है। आरोप है कि ब्रजेश रावत (मोहान से विधायक) और उनके भाई के नाम पर दर्ज जमीन पर जबरन कब्जा करने की कोशिश की गई। दूसरी ओर, आरोप सीधे पंकज गुप्ता और उनकी बहन दीप्ति गुप्ता पर लगाए गए हैं। शिकायत के मुताबिक, वे 15–20 समर्थकों के साथ मौके पर पहुंचे और विवादित जमीन पर दीवार खड़ी करने लगे।

कोर्ट में मामला लंबित, फिर भी कब्जे की कोशिश?

ब्रजेश रावत का कहना है कि यह जमीन पहले से ही न्यायालय में विचाराधीन है। ऐसे में किसी भी तरह का निर्माण या कब्जा कोर्ट के आदेश का उल्लंघन माना जाएगा। इसके बावजूद, विपक्षी पक्ष द्वारा कथित तौर पर निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया। यह बिंदु मामले को और गंभीर बनाता है, क्योंकि अगर कोर्ट के आदेश की अवहेलना साबित होती है, तो यह सीधे-सीधे न्यायिक प्रक्रिया की अनदेखी होगी।

धमकी और विवाद की स्थिति

शिकायत में यह भी कहा गया है कि जब ब्रजेश रावत के पक्ष के लोगों ने इसका विरोध किया, तो उनके साथ गाली-गलौज की गई और जान से मारने की धमकी दी गई। यह आरोप स्थानीय स्तर पर तनाव बढ़ने का संकेत देता है। ब्रजेश रावत के भाई राजेश रावत ने इस मामले में सदर कोतवाली में लिखित तहरीर दी है, जिसमें पूरी घटना का विवरण दर्ज कराया गया है।

पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

मामले का सबसे संवेदनशील पहलू पुलिस की भूमिका को लेकर सामने आ रहा है। आरोप है कि राजनीतिक दबाव के चलते पुलिस इस मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, अभी तक पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

राजनीतिक संदेश क्या है?

एक ही पार्टी के दो विधायकों के बीच इस तरह का खुला विवाद कई सवाल खड़े करता है-

  • क्या स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक समन्वय कमजोर हो रहा है?
  • क्या प्रशासन राजनीतिक दबाव में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं कर पा रहा?
  • और सबसे अहम, क्या कानून से ऊपर राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल हो रहा है?

अब नजर इस बात पर है कि पुलिस इस मामले में कितनी निष्पक्ष जांच करती है और क्या न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित किया जाता है। अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला सिर्फ जमीन विवाद नहीं रहेगा, बल्कि राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर बड़ा मुद्दा बन सकता है।

रिपोर्ट-रंजन बाजपई

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