मुरादाबाद में छात्रा के बुर्का पहनने पर हुई थी FIR, कोर्ट से मिली जमानत, जज बोले- कोई ठोस सबूत नहीं

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जनपद के बिलारी थाना इलाके में नाबालिग छात्रा के धर्म परिवर्तन और ‘ब्रेनवॉश’ के चर्चित मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आरोपी युवती को बड़ी राहत दी है. न्यायमूर्ति ने आरोपी छात्रा फातिमा की अग्रिम जमानत अर्जी को स्वीकार करते हुए उसे गिरफ्तारी से सुरक्षा प्रदान की है. गौरतलब है कि आरोपी फातिमा पर उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धारा 3 और 5(1) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था.
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि पीड़िता के बयानों के अतिरिक्त रिकॉर्ड पर ऐसा कोई ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं है, जिससे प्रथम दृष्टया आरोपी की इस अपराध में संलिप्तता पूरी तरह स्थापित हो सके. न्यायालय ने इस तथ्य को भी संज्ञान में लिया कि आरोपी के फरार होने की संभावना बेहद कम है और उसने जांच व ट्रायल में पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है.
बिलारी का मामला तब तूल पकड़ गया था, जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें एक नाबालिग छात्रा को बुर्का पहनते हुए देखा गया था. इसके बाद हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों के विरोध के बीच पीड़िता के भाई की तहरीर पर पुलिस ने धर्मांतरण की धाराओं में केस दर्ज किया था. अब उच्च न्यायालय द्वारा साक्ष्यों के अभाव और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को ध्यान में रखते हुए आरोपी को राहत दी गई है.
वीडियो वायरल होने के बाद गरमाया था मुद्दा
मुरादाबाद जनपद के बिलारी इलाके में यह मामला एक कोचिंग इंस्टीट्यूट के बाहर से शुरू हुआ था. सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में कुछ छात्राएं आपस में बातचीत करती नजर आ रही थीं. आरोप था कि फातिमा ने पीड़िता को बुर्का (हिजाब) पहनने के लिए प्रेरित करते हुए कहा था कि “तुम इसमें अच्छी लगोगी.”
वीडियो में छात्रा को बुर्का पहनते हुए भी देखा गया, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर काफी विवाद हुआ था. परिजनों और कुछ स्थानीय संगठनों ने इसे योजनाबद्ध तरीके से किया गया धर्मांतरण का प्रयास बताया था. इसके बाद पीड़िता के भाई ने पुलिस को शिकायत दी थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि उसकी नाबालिग बहन का ब्रेनवॉश कर उसे इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर किया जा रहा है.
कैसे मिली जमानत?
पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए मुकदमा दर्ज कर आरोपी को हिरासत में लेकर कार्रवाई शुरू की थी. हालांकि, मामला जब हाईकोर्ट पहुंचा, तो बचाव पक्ष ने दलीलों में इसे केवल सहेलियों के बीच की सामान्य बातचीत और स्वेच्छा से पहना गया वस्त्र बताया.
कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि केवल बयानों के आधार पर किसी को लंबे समय तक हिरासत में रखना उचित नहीं है, विशेषकर जब जांच में सहयोग की गारंटी दी गई हो. इन परिस्थितियों को देखते हुए कोर्ट ने शर्तों के साथ फातिमा की अग्रिम जमानत मंजूर कर ली, जो इस विवादित मामले में आरोपी पक्ष के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है.



