बिहार पुलिस की दलील सुन SC भी चौंका, कहा- रिश्वत के नोट चूहे खा गए
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार की पूर्व सीडीपीओ अरुणा कुमारी को जमानत दे दी. इन्होंने भ्रष्टाचार मामले में 'चूहों द्वारा रिश्वत के नोट कुतरने' का दावा किया गया था.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सुप्रीम कोर्ट ने बिहार की पूर्व सीडीपीओ अरुणा कुमारी को जमानत दे दी. इन्होंने भ्रष्टाचार मामले में ‘चूहों द्वारा रिश्वत के नोट कुतरने’ का दावा किया गया था.
कोर्ट ने बिहार पुलिस के सबूतों के नष्ट होने के दावे पर हैरानी जताई और इसे राज्य के लिए बड़ा राजस्व नुकसान बताया. बेंच ने कहा कि ऐसे मामलों में बरामद पैसे की सुरक्षा अहम है.
सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में बिहार में भ्रष्टाचार के आरोपी एक पूर्व सरकारी अधिकारी को जमानत दे दी. कोर्ट ने इस दावे पर हैरानी जताई थी कि इस मामले में जब्त किए गए नोट पुलिस के एविडेंस रूम में चूहों ने कुतर दिए थे. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की बेंच ने आरोपी अधिकारी अरुणा कुमारी नाम की एक पूर्व बाल विकास कार्यक्रम अधिकारी (CDPO) की चार साल की सजा को निलंबित कर दिया. उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया. कोर्ट ने यह पाया कि उनके खिलाफ मौजूद सबूत सचमुच नष्ट हो चुके थे. जमानत देते हुए बेंच ने कहा कि हमें ये जानकर हैरानी हुई कि नोट चूहों ने नष्ट कर दिए.
जमानत देते हुए बेंच ने कहा कि हमें ये जानकर हैरानी हुई कि करंसी नोट चूहों ने नष्ट कर दिए. कोर्ट ने आगे जब्त की गई करंसी के खत्म होने को बिहार राज्य के लिए एक बड़ा राजस्व नुकसान बताया. कोर्ट ने कहा कि हमें हैरानी है कि इस तरह के अपराधों में बरामद कितने ऐसे करंसी नोट नष्ट हो जाते हैं, क्योंकि उन्हें सुरक्षित जगह पर नहीं रखा जाता. ये राज्य के लिए एक बहुत बड़ा राजस्व नुकसान है.
10 हजार का रिश्वत मांगने का लगा था आरोप
ये मामला 2019 का है, जब बिहार की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने कुमारी के खिलाफ एक जाल बिछाकर कार्रवाई की थी. उन पर CDPO के तौर पर ₹10,000 की रिश्वत मांगने और लेने का आरोप था. छापेमारी के बाद EOU ने दावा किया कि उन्होंने उनके पास से करंसी नोट बरामद किए थे. इसके बाद उन नोटों को एक लिफाफे में सील करके, ट्रायल के लिए प्राथमिक सबूत के तौर पर स्थानीय एविडेंस रूम में जमा करा दिया गया था.
असली नोट अदालत में पेश नहीं किए जा सकते’
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत चले मुकदमे के दौरान, अभियोजन पक्ष को एक अजीब मुश्किल का सामना करना पड़ा. रिश्वत की रकम गायब हो गई थी. अभियोजन पक्ष ने दलील दी कि भले ही एविडेंस रूम में रजिस्टर से लिफाफा मिलने की पुष्टि होती है, लेकिन असली नोट अदालत में पेश नहीं किए जा सके. इसका कारण यह बताया गया कि सबूत रखने वाले कमरे में चूहों का आतंक हो गया था, जिन्होंने लिफाफे के साथ-साथ नकदी को भी नष्ट कर दिया.
निचली अदालत ने शुरू में कुमारी को सभी आरोपों से बरी कर दिया था, जिसके बाद राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ पटना हाई कोर्ट में अपील दायर की.
फरवरी 2025 में पटना हाई कोर्ट ने बरी करने के फैसले को रद्द करते हुए कुमारी को दोषी ठहराया. अपने फैसले में हाई कोर्ट ने चूहों की समस्या को स्वीकार किया, लेकिन यह फैसला दिया कि इस वजह से अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर नहीं पड़ जाता.



