तमिलनाडु में लुका-छुपी तो बंगाल में हत्याएं

  • चुनाव बाद लोकतंत्र पर हिंसा और सौदेबाजी की दोहरी मार
  • पश्चिम बंगाल में सीएम पद के दावेदार के पीए की सरे राह की गई हत्या
  • जनादेश तो आया लेकिन बड़ा सवाल क्या लोकतंत्र बचा?

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। तमिलनाडु में विधायक रिसॉर्ट में बंद हैं तो पश्चिम बंगाल में राजनीतिक कार्यकर्ताओं की लाशें सड़कों पर गिर रही हैं। कहीं पार्टी बचाने की जुगत चल रही है। तो कहीं राजनीतिक बदले की आग में लोकतंत्र झुलस रहा है। जनता ने वोट देकर सरकार तो चुन ली। लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद जो तस्वीर सामने आ रही है उसने पूरे देश को सवाल पूछने पर मजबूर कर दिया है। आखिर यह कैसा लोकतंत्र है जहां चुनाव परिणाम आते ही राजनीतिक दल अपने ही विधायकों को सुरक्षित कैद में भेज देते हैं? और यह कैसी राजनीति है जहां विरोधी दल के नेताओं और उनके करीबी लोगों को खुलेआम निशाना बनाया जा रहा हैं?

पश्चिम बंगाल में जारी है हिंसा

पश्चिम बंगाल में हिंसा का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। चुनाव खत्म हुए नतीजे आ गए लेकिन सड़कों पर तनाव अब भी कायम है। बीजेपी हो या फिर टीएमसी दोनों राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता एक दूसरे को निशाने पर ले रहे है और इस पूरे घटनाक्रम में अबतक आधा दर्जन से ज्यादा राजनीतिक वकर्र के मारे जाने की सूचना है। आगजनी हमले और राजनीतिक प्रतिशोध की घटनाओं में इजाफा हो रहा है। ताजा घटनाक्रम में मुख्यमंत्री पद के दावेदार माने जा रहे सुवेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी की कार रोककर हत्या कर दिये जाने के बाद पूरे बंगाल का महौल गर्म हो चुका है। बीजेपी ने सीधे तौर पर ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी पर हत्या कराये जाने के आरोप लगाए हैं। वहीं टीएमसी खुद को इस मामले से अलग बताते हुए सीबीआई जांच की मांग कर रही है।

सुवेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के उत्तर 24 परगना जिले के मध्यग्राम (बरासत क्षेत्र) से एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। जानकारी के अनुसार मध्यग्राम इलाके में चंद्रनाथ को गोली मारी गई। गोली लगने के बाद वह गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें पास के डायवर्सिटी नर्सिंग होम ले जाया गया लेकिन उन्होंने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। हत्या का आरोप टीएमसी कार्यकर्ताओं पर लगाया गया है। वारदात की सूचना पाकर मौके पर पहुंची पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। पुलिस इलाके में लगे सीसीटीवी फुटेज को खंगालने में जुट गई है और हमलावरों की तलाश जारी है। सुवेंदु अधिकारी ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा है कि हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व अभी भी सक्रिय हैं। भाजपा की सरकार बनने के बाद पार्टी से जुड़ाव या बिना किसी भेदभाव के सभी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

हत्या में फर्जी नंबर प्लेट वाली गाड़ी का इस्तेमाल

अब तक की जांच में सामने आया है कि हत्या में इस्तेमाल की गई गाड़ी पर फर्जी नंबर प्लेट लगी थी। घटनास्थल से इस्तेमाल किए गए कारतूसों के खोखे और कुछ कारतूस भी बरामद किए गए हैं। मामले की विस्तृत जांच जारी है। राज्य पुलिस सूत्रों ने चश्मदीदों के हवाले से बताया है कि शुरुआत में ऐसा लगा था कि चंद्रनाथ रथ की कार का काफी देर तक एक चार पहिया गाड़ी पीछा कर रही थी। जब उनकी गाड़ी मध्यग्राम के दोहरिया मोड़ पर पहुंची तब पीछा कर रही गाड़ी ने उनकी कार को ओवरटेक कर रास्ता रोका और हमलावरों ने उन पर गोली चला दी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जिस सटीक तरीके से वारदात को अंजाम दिया गया उससे साफ है कि यह पूरी तरह से सुनियोजित हत्या थी और इसमें पेशेवर शूटर शामिल थे। इस बीच समीक भट्टाचार्य ने दावा किया कि चंद्रनाथ रथ की हत्या टीएमसी नेतृत्व की साजिश का नतीजा है। उन्होंने कहा कि हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारी हार से परेशान होकर यह साजिश रची गई। भट्टाचार्य ने कहा कि मैं शुरू से कह रहा था कि चुनाव परिणाम आने और नई कैबिनेट बनने के बीच के अंतरिम समय में राज्य में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है।

टीएमसी ने सीबीआई जांच की मांग की

टीएमसी ने सुवेंदु अधिकारी के करीबी सहयोगी की हत्या की निंदा करते हुए इस पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग की है। तृणमूल कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी कर हिंसा की निंदा की और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। पार्टी ने अपने बयान में कहा है कि हम मध्यग्राम में चंद्रनाथ रथ की निर्मम हत्या की कड़ी निंदा करते हैं। इसके साथ ही पिछले तीन दिनों में आचार संहिता लागू होने के बावजूद भाजपा समर्थित बदमाशों द्वारा कथित तौर पर की गई चुनाव बाद हिंसा में तीन टीएमसी कार्यकर्ताओं की हत्या की भी निंदा करते हैं। बयान में कहा गया है कि हम इस मामले में सबसे कड़ी कार्रवाई की मांग करते हैं जिसमें अदालत की निगरानी में सीबीआई जांच भी शामिल हो ताकि दोषियों की पहचान कर उन्हें जल्द से जल्द सजा दिलाई जा सके। लोकतंत्र में हिंसा और राजनीतिक हत्याओं की कोई जगह नहीं है और दोषियों को जल्द जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। तृणमूल कांग्रेस की लोकसभा सांसद सायोनी घोष ने भी इस घटना पर चिंता जताई और हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की अपील की। सायोनी घोष ने एक्स पर लिखा है कि चंद्रनाथ रथ से जुड़ी घटना बेहद चिंताजनक है। पार्टी राजनीति और वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठकर हम सभी की जिम्मेदारी है कि राज्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखें और हर व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करें। उन्होंने लिखा है कि इस तरह किसी की जान नहीं जानी चाहिए। पिछले कुछ दिनों में हुई हर हिंसक घटना से जुड़े दोषियों के खिलाफ पुलिस-प्रशासन से सख्त कार्रवाई और कड़े कदम उठाने की अपील करती हूं।

तमिलनाडु में राजनीतिक थ्रिल

दूसरी तरफ तमिलनाडु में सत्ता की राजनीति किसी थ्रिलर फिल्म जैसी नजर आ रही है। टीवीके प्रमुख विजय थलापती के सरकार गठन के दावे के बाद एआईएडीएमके ने अपने विधायकों को रिसॉर्ट में भेज दिया है। पार्टी को डर है कि कहीं सत्ता की खींचतान में विधायक टूट न जाएं। लोकतंत्र के मंदिर में चुने गए जनप्रतिनिधि अब जनता के बीच नहीं बल्कि आलीशान रिसॉर्टों में नजरबंद हैं। यह वही राजनीति है जिसमें जनता वोट देती है लेकिन चुनाव के बाद सबसे ज्यादा अविश्वास नेताओं को अपने ही विधायकों पर होता है। पूर्व मुख्यमंत्री स्टालिन ने विजय थलापती को खुली चुनौती दी है कि अगर दम है तो सरकार बनाकर दिखाओ और चला कर दिखाओ। यानी अब लड़ाई सिर्फ सीटों की नहीं बल्कि राजनीतिक अस्तित्व की बन चुकी है।

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