Trump ने फिर दिया धोखा, Cease fire तोड़कर Iran पर की बमबारी
अमेरिका ने सीजफायर तोड़कर ईरान पर फिर बमबारी की...बोले- डील नहीं की तो और हमले करेंगे.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: जिसका डर था, वही हो गया…मिडिल ईस्ट में जो थोड़ी बहुत शांति की उम्मीद दिख रही थी…वो अब फिर से टूटती नजर आ रही है…
एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की बात चल रही थी…लेकिन दूसरी तरफ हालात ऐसे बिगड़े कि अब मामला सीधे मिसाइल और ड्रोन हमलों तक पहुंच गया है…खबर है कि ट्रंप ने अबतक की सबसे बड़ी धोखेबाजी की है…
अमेरिका ने सीजफायर तोड़कर ईरान पर फिर बमबारी की…बोले- डील नहीं की तो और हमले करेंगे…ट्रंप की इसी धोखेबाजी से ईरान आगबबुला हो गया और UAE पर बड़ा ड्रोन और मिसाइल अटैक कर दिया…जिससे सवाल उठा कि क्या फिर से भयंकर युद्ध शुरू होगा?…इसी बीच खबर तो ये भी है कि UN में फिर रूस-चीन ने खेल बिगाड़ दिया और ताल ठोककर आए ईरान के साथ खड़े हो गए है…जिससे अमेरिका के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खुलना सपना बन जाएगा?…
ईरान इस वक्त अमेरिका के लिए एक ऐसी हड्डी बन चुका है…जो उसके गले में फंसा हुआ है…जिस युद्ध को वो पहले आसान मान रहा था…वो अब बवाल बना हुआ है…इसमें उसके लिए सबसे ज्यादा मुश्किल पैदा कर रहे हैं रूस-चीन…जो यूएन में जो भी ईरान के खिलाफ प्रस्ताव आता है…उस पर वीटो लगा देते हैं…
पूरे मामले को अगर आसान तरीके से समझें…तो मामला सिर्फ हमला और जवाब का नहीं है…बल्कि इसमें भरोसे की कमी, राजनीति और ताकत दिखाने की होड़ साफ नजर आ रही है और सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति ने ही इस आग को फिर से भड़का दिया?
मिडिल ईस्ट में हालात एक बार फिर हाथ से निकलते दिख रहे हैं…ऊपर से भले ही शांति की बातें हो रही थीं…लेकिन अंदर ही अंदर सब कुछ सुलग रहा था और अब जो हुआ है…उसने साफ कर दिया कि मामला सिर्फ बयानबाजी तक नहीं रहा…अब सीधा हमला और जवाबी हमला चल रहा है…
दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल को एक अस्थायी सीजफायर हुआ था…उम्मीद थी कि इससे हालात सामान्य होंगे…लेकिन असलियत कुछ और ही निकली…सबसे बड़ा आरोप ईरान की तरफ से आया…ईरान ने साफ कहा कि डोनाल्ड ट्रंप की अगुवाई में अमेरिका ने सीजफायर के बीच ही हमला कर दिया…ओमान की खाड़ी में ईरानी तेल टैंकर को निशाना बनाया गया और जास्क के पास ये हमला हुआ…जहां से जहाज स्ट्रेट ऑप होर्मुज की तरफ बढ़ रहा था…
ईरान के लिए ये सिर्फ एक हमला नहीं था, बल्कि भरोसे पर सीधा वार था…क्योंकि जब सीजफायर चल रहा हो और उसी बीच हमला हो जाए…तो सामने वाले देश को यही लगता है कि उसके साथ धोखा हुआ है…अब अमेरिका की तरफ से भी जवाब आया…
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान ने पहले अमेरिकी जंगी जहाजों पर हमला किया था…उनके मुताबिक, अमेरिकी सेना ने सिर्फ जवाबी कार्रवाई की और ईरानी छोटी नावों को तबाह कर दिया…लेकिन यहीं पर कहानी उलझ जाती है…एक तरफ सीजफायर की बात, दूसरी तरफ हमले—तो आखिर सच क्या है?…
अगर जमीन की सच्चाई देखें, तो हालात साफ बताते हैं कि सीजफायर सिर्फ कागज पर था…असल में दोनों तरफ से तनाव लगातार बढ़ रहा था और इसी तनाव का सबसे बड़ा नतीजा देखने को मिला—UAE पर हमला…
शुक्रवार तड़के ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात यानी UAE पर ड्रोन और मिसाइल अटैक कर दिया…ये हमला बहुत बड़ा था…लेकिन यूएई के एयर डिफेंस सिस्टम ने ज्यादातर मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया..फिर भी, इस हमले ने पूरे इलाके में डर फैला दिया…
अब सवाल ये उठता है कि ईरान ने सीधे अमेरिका पर हमला क्यों नहीं किया?…UAE को ही क्यों चुना?…तो इसका जवाब सीधा है…UAE, अमेरिका का करीबी सहयोगी है…मिडिल ईस्ट में अमेरिका की मौजूदगी और रणनीति में UAE का अहम रोल है…
ऐसे में ईरान ने अमेरिका को सीधा मैसेज देने के लिए उसके दोस्त को निशाना बनाया…यानी ये सिर्फ हमला नहीं था, बल्कि एक चेतावनी थी कि अगर अमेरिका नहीं रुका, तो उसके साथ खड़े देश भी सुरक्षित नहीं रहेंगे…इससे पहले भी हालात बिगड़ चुके थे…अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, होर्मुज में अमेरिकी युद्धपोतों पर ड्रोन और मिसाइल से हमला हुआ था…अमेरिका ने इन हमलों को इंटरसेप्ट किया और फिर जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया…यानी एक के बाद एक कार्रवाई और फिर जवाबी हमला…यही सिलसिला चलता रहा…
इस पूरी लड़ाई की असली वजह है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज…ये दुनिया का सबसे अहम समुद्री रास्ता है…जहां से तेल और गैस की सप्लाई होती है…अगर ये बंद हो जाए…तो पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था हिल सकती है…अभी हालात ये हैं कि करीब 1500 जहाज इस इलाके में फंसे हुए हैं…लगभग 20 हजार नाविक भी वहीं अटके हैं…
इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ रहा है…अमेरिका ने इस समस्या को हल करने के लिए प्रोजेक्ट फ्रीडम शुरू किया था…इसका मकसद था फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालना…लेकिन ये प्लान भी फ्लॉप साबित हुआ…दो दिन में सिर्फ 3 जहाज ही निकल पाए, और फिर इस मिशन को बंद करना पड़ा…इससे अमेरिका की रणनीति पर और सवाल खड़े हो गए…
अब मामला सिर्फ अमेरिका और ईरान के बीच नहीं रहा। ये लड़ाई अब अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंच गई है…United Nations में अमेरिका ने एक प्रस्ताव रखा, जिसमें दुनिया के देशों से कहा गया कि वे ईरान पर दबाव बनाएं….लेकिन यहां भी अमेरिका को झटका लगा…रूस और चीन खुलकर ईरान के साथ खड़े हो गए।
दोनों देशों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया और कहा कि ये एकतरफा है…यहां तक कि ये भी कहा जा रहा है कि रूस और चीन इस प्रस्ताव को वीटो कर सकते हैं…इसका मतलब साफ है…अमेरिका अब अकेला पड़ता दिख रहा है…ईरान के राजदूत ने भी अमेरिका पर पलटवार करते हुए कहा कि जिसे खुद समुद्री नाकेबंदी करनी हो, वो दूसरों को नियम न सिखाए…
यानी अब अमेरिका को सिर्फ मैदान में ही नहीं, बल्कि कूटनीति में भी चुनौती मिल रही है…इस बीच एक और मोर्चा खुल गया है…इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच भी संघर्ष तेज हो गया है…इजराइल ने दावा किया कि उसने हिजबुल्लाह के बड़े कमांडरों को मार गिराया है…इसके जवाब में हिजबुल्लाह ने भी हमले किए…अब हालात ये हैं कि पूरा मिडिल ईस्ट एक बड़े संघर्ष की तरफ बढ़ता दिख रहा है…अगर पूरे घटनाक्रम को जोड़कर देखें, तो तस्वीर साफ दिखती है…पहले सीजफायर हुआ…फिर अमेरिका पर आरोप लगा कि उसने हमला किया…फिर अमेरिका ने जवाब दिया…और आखिर में ईरान ने UAE पर मिसाइल दाग दी..
यानी एक तरह से ये पूरी चेन रिएक्शन है..और इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा सवाल डोनाल्ड ट्रंप की रणनीति पर उठ रहे हैं..क्योंकि एक तरफ वो डील और शांति की बात करते हैं और दूसरी तरफ हमले भी जारी रहते हैं…यही वजह है कि ईरान अब उन पर भरोसा नहीं कर रहा…अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि आगे क्या होगा?…क्या अमेरिका और ईरान फिर से बातचीत करेंगे?…क्या होर्मुज स्ट्रेट फिर से खुलेगा?…क्या रूस और चीन का समर्थन ईरान को और मजबूत करेगा?…फिलहाल तो हालात यही बताते हैं कि मामला और बिगड़ सकता है…सीजफायर अब सिर्फ नाम का रह गया है…जमीन पर तो जंग जैसे हालात हैं…
सीधे तौर से समझें तो…ट्रंप की धोखेबाजी और बार-बार बदली रणनीति ने हालात को और खराब किया है…ईरान अब खुलकर जवाब दे रहा है…UAE पर मिसाइल हमला उसी गुस्से का नतीजा है और ऊपर से UN में भी अमेरिका को विरोध झेलना पड़ रहा है…
यानी अब ट्रंप के लिए ये सिर्फ एक युद्ध नहीं…बल्कि खुद के लिए एक बड़ी मुसीबत बन गया है और अगर जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया…तो ये टकराव और बड़ा रूप ले सकता है…ऐसे हालातों में देखने वाली बात होगी कि क्या ट्रंप अपने कथित पागलपन से बाज आएंगे या फिर यूं ही अपने गलत फैसलों से सुपरपावर देश अमेरिका को जंग की आग में धकेल देंगे?



