पीएम मोदी पर बयान से यूपी से दिल्ली तक घमासान

भाजपा ने सपा व कांग्रेस को घेरा

कांग्रेस केहरिप्रसाद ने की महिषासुर से तुलना
सपा सांसद ने सबसे बेकार प्रधानमंत्री बताया

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। पीएम मोदी पर बयान को लेकर यूपी से दिल्ली तक घमासान मच गया। बयान को लेकर भाजपा ने सपा व कांग्रेस पर करारा प्रहार किया। वीके हरिप्रसाद ने पीएम मोदी पर चुनाव के दौरान शासन को नजरअंदाज कर आरएसएस को सौंपने का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार राहुल गांधी की पश्चिम एशिया संकट पर दी गई चेतावनी पर कार्रवाई करने में विफल रही। उन्होंने दावा किया कि आरएसएस लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं को खत्म करने की कोशिश कर रहा है।
कांग्रेस विधायक बीके हरिप्रसाद ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को महिषासुर कहकर संबोधित किया और भाजपा पर क्षेत्रीय दलों को कमजोर करने और अपने ही संगठन के नेताओं को दरकिनार करने का आरोप लगाया।हरिप्रसाद ने कहा कि इस महिषासुर को ही ले लीजिए, इसने अकाली दल को खत्म कर दिया, इसने शिवसेना को खत्म कर दिया, इसने जनता दल को खत्म कर दिया, इसने एआईएडीएमके को खत्म कर दिया, इसने एनसीपी को खत्म कर दिया। यह क्या बात कर रहा है? अगर इसे लगता है कि कांग्रेस ने किसी के साथ विश्वासघात किया है, तो इसकी शुरुआत सबसे पहले खुद से होती है।

पीएम ने अपने विरोधियों का सफाया कर दिया

जिस व्यक्ति ने आडवाणी का सफाया किया, उसने सभी विरोधियों का सफाया कर दिया, और संजय जोशी इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं। वह पकड़े गए और उन्होंने उनका पूरा राजनीतिक करियर बर्बाद कर दिया। कांग्रेस द्वारा अन्य दलों को नष्ट करने के आरोपों का बचाव करते हुए उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस की उदारता, लोकतंत्र में कांग्रेस का विश्वास और संविधान में कांग्रेस का विश्वास ही वह कारण है जिससे सभी क्षेत्रीय दल फले-फूले। हमने उन्हें कभी नष्ट नहीं किया। कांग्रेस ने कभी ये सब नहीं किया। कांग्रेस पारदर्शिता और सच्चे लोकतंत्र में विश्वास करती है। तेल संकट और आर्थिक नियंत्रण उपायों के संबंध में प्रधानमंत्री की हालिया टिप्पणियों की आलोचना करते हुए हरिप्रसाद ने यह भी आरोप लगाया कि पश्चिम एशिया की स्थिति के बारे में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की चेतावनियों के बावजूद सरकार समय पर कार्रवाई करने में विफल रही।

कांग्रेस की चेतावनी का भाजपा ने गंभीरता से नहीं लिया

हरिप्रसाद ने आगे कहा कि पूरी दुनिया जानती थी कि पश्चिम एशिया में 28 फरवरी से ही संकट मंडरा रहा है, जबकि मेरे नेता और विपक्ष के नेता राहुल गांधी जी ने उस समय सरकार को इस संकट के बारे में चेतावनी दी थी। भाजपा ने उनकी बात को गंभीरता से नहीं लिया। अब, लगभग सभी को पता था कि चुनाव लगभग चार महीने से चल रहे हैं। इस मोगैम्बो ने दुनिया में व्याप्त संकट पर कभी कुछ नहीं कहा। पूरे चुनाव के दौरान, उन्होंने सिर्फ जिम्मेदारी लेने की बात की और कहा कि वे पूरे देश की जिम्मेदारी नहीं ले सकते, लेकिन उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे सोना न खरीदें, पेट्रोलियम उत्पादों का कम इस्तेमाल करें और विदेश यात्रा न करें। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी पर चुनाव के लिए देश भर में यात्रा करने, शासन को दरकिनार करने और आरएसएस को सौंपने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इन चार महीनों में वो क्या कर रहे थे? पूरे देश में घूम रहे थे, झालमुरी देखने जा रहे थे, सिक्किम फुटबॉल देखने जा रहे थे, हुगली नदी पर जा रहे थे, मंदिरों में दर्शन करने जा रहे थे, और शासन कहाँ था? उन्होंने पूरा शासन और सरकार आरएसएस को सौंप दी है, और आरएसएस संविधान और लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकारों के साथ-साथ चुनाव आयोग और अदालतों जैसे संवैधानिक निकायों को भी खत्म करने पर तुला हुआ है। आरएसएस हर जगह हावी है। उन्हें आरएसएस को सलाह देनी चाहिए, और सलाह देने से पहले उन्हें खुद इसका अभ्यास करना चाहिए।

पीएम के खिलाफ बयान देकरविवादों में घिरे सपा सांसद अजेंद्र सिंह लोधी

बुंदेलखंड की हमीरपुर-महोबा-तिंदवारी संसदीय सीट से नवनिर्वाचित समाजवादी पार्टी के सांसद अजेंद्र सिंह लोधी विवादों में घिर गए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ दिए गए उनके एक बयान ने प्रदेश की सियासत में उबाल ला दिया है। इस मामले में पुलिस ने सांसद के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अजेंद्र सिंह लोधी ने प्रधानमंत्री को देशविरोधी तक कह डाला। सांसद ने पीएम के खिलाफ कुछ ऐसे शब्दों का प्रयोग किया, जिसे भाजपा ने देश के सर्वोच्च पद का अपमान बताया है।
इस बयान के सामने आते ही भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश फैल गया, जिसके बाद शहर के आल्हा चौक पर जोरदार विरोध प्रदर्शन और पुतला दहन किया गया। वहीं, भाजपा द्वारा सांसद पर मुदकमा दर्ज कर कार्रवाई की मांग की गई थी। सोमवार को समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता बिजली कटौती, पेयजल संकट, स्मार्ट मीटर की समस्याओं और फसल बीमा घोटाले को लेकर कलक्ट्रेट में प्रदर्शन कर रहे थे। इसी दौरान मीडिया से मुखातिब होते हुए सांसद अजेंद्र सिंह लोधी ने मर्यादा की सीमाएं लांघ दीं। उन्होंने प्रधानमंत्री पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें देशविरोधी बताया और कहा कि ऐसा प्रधानमंत्री न पहले कभी हुआ और न आने वाली सरकारों में होगा।ईवीएम सांसद ने केवल व्यक्तिगत टिप्पणी ही नहीं की, बल्कि सरकार की नीतियों पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि घरों में लगे स्मार्ट मीटर बिजली न रहने पर भी चलते रहते हैं। साथ ही, उन्होंने जिले में फसल बीमा के बड़े घोटाले और सैकड़ों विद्यालयों के बंद होने का मुद्दा उठाया। सांसद ने बंगाल की स्थिति और ईवीएम की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े किए और दावा किया कि 2027 में प्रदेश में सपा की सरकार बनेगी। पुतला फूंके जाने और विरोध की खबरों के बीच सपा सांसद अजेंद्र सिंह लोधी के तेवर नरम नहीं पड़े हैं। उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि विरोधी लोग कुछ भी कर सकते हैं, उन्हें करने दें। हम डरने वाले नहीं हैं और सच्चाई बोलते रहेंगे। अगर भाजपा वाले मुकदमा लिखवाना चाहते हैं, तो लिखवा दें, इससे ज्यादा और क्या होगा।

एआईडीएमकेमें फिर सियासी हलचल

शनमुगम के नेतृत्व वाले गुट ने विजय को दिया समर्थन

 4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
चेन्नई। तमिलनाडु की सियासत में मंगलवार को एक ऐतिहासिक मोड़ आया जब एआईडीएमके केवरिष्ठ नेता शनमुगम के नेतृत्व में कम से कम 30 विधायकों ने मुख्यमंत्री विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) को अपना समर्थन देने की घोषणा की। यह कदम ऐसे समय में आया है जब राज्य की सत्ताधारी टीवीके सरकार बुधवार को विधानसभा में अपना पहला फ्लोर टेस्ट (बहुमत परीक्षण) देने जा रही है।
समर्थन की घोषणा करते हुए शनमुगम ने पार्टी के भीतर किसी भी तरह की फूट की खबरों को खारिज कर दिया और कहा कि उनका पार्टी को तोडऩे का कोई इरादा नहीं है। यह घटनाक्रम उन खबरों के बीच सामने आया है, जिनमें कहा जा रहा था कि शनमुगम के नेतृत्व वाला विधायकों का यह गुट चाहता है कि पार्टी प्रमुख एडप्पादी पलानीस्वामी अपने पद से इस्तीफा दे दें। शनमुगम ने यह भी साफ किया कि वह किसी भी गठबंधन का हिस्सा नहीं है, इसका सीधा मतलब यह था कि पार्टी का कोई संबंध नहीं है। तमिलनाडु विधानसभा में होने वाले एक अहम फ्लोर टेस्ट (बहुमत परीक्षण) से ठीक एक दिन पहले आया है। इस फ्लोर टेस्ट के दौरान मुख्यमंत्री विजय को यह साबित करना होगा कि उन्हें सदन में बहुमत का समर्थन हासिल है। चुनावों में टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और उसने 108 सीटें जीती थीं, लेकिन बहुमत के आंकड़े से वह 10 सीटें पीछे रह गई थी। ?
विजय ने कांग्रेस, वामपंथी दलों, विदुथलाई चिरुथैगल काची और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग की मदद से सरकार बनाई थी। चेन्नई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, शनमुगम ने पार्टी को चुनावों में मिली हार की ओर इशारा किया। 23 अप्रैल को हुए चुनावों में पार्टी 234 विधानसभा सीटों में से सिर्फ 47 सीटें ही जीत पाई थी। 2021 के चुनावों में, डीएमकेके नेतृत्व वाले गठबंधन ने एआईडीएमकेको एक दशक बाद सत्ता से बेदखल कर दिया था,उस चुनाव में पार्टी को सिर्फ 75 सीटें मिली थीं। 2019 के लोकसभा चुनावों में पार्टी 39 सीटों में से सिर्फ एक सीट ही जीत पाई थी, जबकि 2024 के संसदीय चुनावों में उसका खाता भी नहीं खुल पाया। लोगों का जनादेश खास तौर पर विजय के मुख्यमंत्री बनने के लिए है। यह सबसे पहली और सबसे ज़रूरी बात है जिसे हमें समझना होगा। लोगों का जनादेश विजय के मुख्यमंत्री बनने के पक्ष में है। इसलिए, हम लोगों के जनादेश का सम्मान करते हैं। उस जनादेश का मान रखने के लिए, हम मुख्यमंत्री विजय को पूरे दिल से बधाई देते हैं।

हिमंत बिस्व सरमा ने ली सीएम पद की शपथ

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
गुवहटी। हिमंत बिस्व सरमा ने आज एक बार फिर असम की कमान संभाल ली। राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने खानापारा क्षेत्र के वेटरनरी मैदान में 11 बजकर 40 मिनट पर हिमंत बिस्व सरमा को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। सरमा के साथ चार अन्य विधायकों ने पद एवं गोपनीयता की शपथ ली। हिमंत का राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में यह लगातार दूसरा कार्यकाल है।
शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन, राजग शासित राज्यों के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री तथा कई केंद्रीय मंत्री व भाजपा के राष्ट्रीय व राज्य पदाधिकारी तथा एनडीए के तमाम नेता उपस्थित थे। शपथ समारोह में कई शीर्ष उद्योगपति, सत्राधिकार (वैष्णव मठों के प्रमुख) और अन्य गणमान्य व्यक्ति, भाजपा कार्यकर्ता और बूथ समिति अध्यक्ष भी शामिल हुए। 57 वर्षीय हिमंत बिस्व सरमा असम में लगातार दूसरी बार शपथ लेने वाले पहले गैर-कांग्रेसी मुख्यमंत्री बन गए हैं। सरमा के साथ शपथ लेने वाले चार विधायकों में भाजपा के अजंता नियोग और रामेश्वर तेली, सहयोगी दल असम गण परिषद (अगप) के अतुल बोरा और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रं ट (बीपीएफ) के चरण बोरो शामिल हैं। अंजता नियोग, अतुल बोरा और चरण बोरो इससे पहले भी सरमा के पहले मंत्रिमंडल में सदस्य थे, जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री रामेश्वर तेली ने राज्य की राजनीति में फिर से वापसी की है। यह राज्य में एनडीए गठबंधन की तीसरी सरकार है। एनडीए पहली बार 2016 में सर्वानंद सोनोवाल के नेतृत्व में सत्ता में आया था जो अब केंद्र सरकार में मंत्री हैं।

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