दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद 4PM नेशनल न्यूज चैनल खुला

- 50 हजार वीडियो में सिर्फ 26 पर आपत्ति बता कर चल गया सरकारी हंटर
- संपादक संजय शर्मा ने बताया कितना खौफनाक रहा 60 दिनों के चैनल बंदी का सफर
- कोर्ट हैरान रह गया कि ऐसा कैसे हो सकता है
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद एक बार फिर 4PM नेशनल चैनल फिर से बहाल हो चुका है। सरकार ने चैनल को एंटी नेशनल बताते हुए इस पर भारत में पाबंदी लगा थी। पाबंदी के बाद संपादक संजय शर्मा कोर्ट गये जहां से चैनल को राहत मिली। दिल्ली हाईकोर्ट में 4PM चैनल की अपील को सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल, उनके बेटे अखिल सिब्बल और देश के जाने माने वकील एस एम हैदर रिजवी और तलहा अब्दुल रहमान ने रखा। कोर्ट उस समय हैरान रह गया जब उसे यह पता चला कि चैनल के 50 हजार वीडियो में से सरकार को 26 वीडियो पर आपत्ति है और इन्हीं 26 वीडियो को अधार बना कर चैनल को बंद कर दिया गया है। संपादक संजय शर्मा का कहना है कि इस 60 दिन की बंदी ने सिर्फ चैनल नहीं तोड़ा बल्कि उससे जुड़े कर्मचारियों और उनके परिवारों को भी संकट में डाल दिया। व्यूअरशिप गिरी, एल्गोरिद्म टूटे, आर्थिक नुकसान हुआ और चैनल की वर्षों की मेहनत पर गहरा असर पड़ा। उन्हें भरोसा है कि जल्द ही चैनल पुरानी लय को हासिल कर लेगा और फिर से नम्बर एक स्थान पर होगा। उन्होंने दर्शकों से अपील की है कि वह वीडियो को देखें और शेयर करें।
चैनल की वापसी पर डिजिटल मीडिया अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता बड़ी बहस
राजनीतिक और मीडिया हलकों में इस पूरे घटनाक्रम को सिर्फ एक चैनल की वापसी नहीं माना जा रहा बल्कि इसे डिजिटल मीडिया अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और आलोचनात्मक पत्रकारिता पर चल रही बड़ी बहस का हिस्सा माना जा रहा है। 60 दिनों की बंदी के बाद 4PM नेशनल की वापसी ने यह सवाल फिर खड़ा कर दिया है कि लोकतंत्र में असहमति की सीमा क्या है और क्या सवाल पूछना अब भी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत माना जाएगा?
50 हजार वीडियो में सिर्फ 26 पर आपत्ति फिर पूरा चैनल क्यों बंद?
4PM के संपादक संजय शर्मा ने अपने वीडियो संदेश में सबसे बड़ा और सबसे गंभीर सवाल यही उठाया कि आखिर 50 हजार से ज्यादा वीडियो वाले एक पूरे डिजिटल प्लेटफॉर्म को सिर्फ 26 वीडियो के आधार पर कैसे बंद किया जा सकता है? संजय शर्मा के मुताबिक यही वह बिंदु था जिसने अदालत में भी पूरी बहस का रुख बदल दिया। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने जिन वीडियो को आधार बनाकर कार्रवाई की उनकी संख्या कुल कंटेंट के मुकाबले बेहद कम थी। लेकिन उन 26 वीडियो को आधार बनाकर पूरे चैनल को भारत में ब्लॉक कर दिया गया। संजय शर्मा के अनुसार अदालत ने भी सुनवाई के दौरान इस बात पर आश्चर्य जताया कि यदि कुछ वीडियो पर आपत्ति थी तो उन वीडियो पर अलग कार्रवाई क्यों नहीं की गई और पूरे चैनल को ही बंद करने की जरूरत क्यों पड़ी।
वही सवाल पूछे जो एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी पत्रकार और नागरिक को पूछने का अधिकार है : संजय शर्मा
संजय शर्मा ने बताया कि सरकार की मंशा चैनल को सदा के लिए बंद करने की थी शायद इसी लिए खुद अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने सरकार की कार्रवाई का बचाव किया और तर्क दिया कि चैनल पर अपलोड की गई सामग्री भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए हानिकारक थी। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा अदालत में दिये गये शपथ पत्र में कहा गया कि उनके वीडियो मणिपुर और कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में माहौल खराब कर सकते हैं। इस पर उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने सिर्फ वही सवाल पूछे जो एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी पत्रकार और नागरिक को पूछने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को मणिपुर जाना चाहिए था यह पूछना गलत है? मणिपुर भारत का हिस्सा है। वहां महीनों तक हिंसा होती रही, लोग मारे जाते रहे, घर जलते रहे तो क्या मीडिया को इस पर सवाल नहीं पूछना चाहिए? अगर पत्रकार सरकार से जवाब मांगता है तो क्या उसे देशविरोधी मान लिया जाएगा? कश्मीर को लेकर भी संजय शर्मा ने कहा कि उन्होंने केवल सुरक्षा व्यवस्था और आतंकवाद से जुड़े सवाल उठाए थे। उनके मुताबिक उन्होंने सिर्फ इतना पूछा था कि आखिर आतंकवादी वहां तक कैसे पहुंचे और सुरक्षा में चूक कहां हुई। उन्होंने कहा कि अगर देश का नागरिक यह सवाल भी नहीं पूछ सकता कि आतंकवादी कैसे आए तो फिर लोकतंत्र का मतलब क्या रह जाएगा? सवाल पूछना अगर अपराध बना दिया जाएगा तो फिर मीडिया सिर्फ सरकारी सूचना बोर्ड बनकर रह जाएगी। संजय शर्मा ने यह भी कहा कि इस कार्रवाई ने सिर्फ चैनल को नहीं बल्कि उससे जुड़े पत्रकारों एडिटर्स, तकनीकी कर्मचारियों और उनके परिवारों को भी गहरे संकट में डाल दिया। उनके अनुसार यह मामला अब सिर्फ एक चैनल का नहीं बल्कि डिजिटल मीडिया की स्वतंत्रता और आलोचनात्मक पत्रकारिता के भविष्य का सवाल बन चुका है।
अब कोर्ट से पूछेंगे आखिर उन 26 वीडियो में ऐसा क्या था?
चैनल के संपादक संजय शर्मा बताया कि सुनवाई के दौरान उनके वकीलों ने कई बार अदालत में यह सवाल उठाया कि सरकार स्पष्ट करे कि उन 26 वीडियो में आखिर दिक्कत क्या है। कौन सा कंटेंट गलत था? कौन सा बयान कानून के खिलाफ था? किस लाइन, किस तथ्य या किस टिप्पणी को आधार बनाकर पूरे चैनल को भारत में ब्लॉक किया गया? सरकार अदालत में इन सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं दे सकी। संजय शर्मा ने कहा है कि अब उनकी अगली कानूनी लड़ाई इसी मुद्दे पर होगी। उनका कहना है कि वह दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे और सरकार से यह जवाब मांगेंगे कि आखिर उन 26 वीडियो में ऐसा क्या था जिसे राष्ट्रविरोधी या देश के खिलाफ माना गया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर कोई वीडियो गलत था तो बताइए उसमें क्या गलत था। कौन सा तथ्य झूठा था? कौन सा सवाल कानून के खिलाफ था? सिर्फ आपत्तिजनक कह देने से लोकतंत्र नहीं चलता। संजय शर्मा के मुताबिक यह मामला अब सिर्फ उनके चैनल का नहीं रह गया है बल्कि यह डिजिटल मीडिया की स्वतंत्रता और आलोचनात्मक पत्रकारिता की सीमाओं का बड़ा सवाल बन चुका है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार किसी भी असहज सवाल को समस्या मानने लगे और बिना स्पष्ट कारण बताए पूरे प्लेटफॉर्म पर कार्रवाई करने लगे तो आने वाले समय में हर स्वतंत्र मीडिया संस्थान डर के साये में काम करेगा।
संपादक संजय शर्मा ने दर्शकों, समर्थकों और सब्सक्राइबर्स को दिया धन्यवाद
संपादक संजय शर्मा ने अपने दर्शकों समर्थकों और सब्सक्राइबर्स का भी विशेष तौर पर धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि 60 दिन की बंदी के दौरान देशभर से उन्हें लगातार संदेश, फोन कॉल और समर्थन मिलता रहा। यही समर्थन उनके लिए सबसे बड़ी ताकत बना। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों का प्यार और भरोसा ही हमारी असली पूंजी है। चैनल बंद हुआ लेकिन लोगों का साथ नहीं टूटा। यही वजह है कि हम फिर खड़े हैं। संजय शर्मा ने साफ किया कि 4PM नेशनल अब पहले की तरह फिर सवाल पूछेगा और जनसरोकार के मुद्दों को उठाता रहेगा। उनके मुताबिक पत्रकारिता का काम सत्ता से सवाल पूछना है न कि सिर्फ सरकारी बयान दोहराना।
मुझे भारत की न्याय व्यवस्था पर अपनी जान से ज्यादा भरोसा है
मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति न्यायमूर्ति पुरुषइंद्र कुमार कौरव की अदालत में जब दोनों पक्षों की दलीलें रखी गईं, तब यह सवाल सबसे ज्यादा अहम बनकर सामने आया कि क्या कुछ चुनिंदा वीडियो के आधार पर किसी पूरे डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म को पूरी तरह बंद किया जा सकता है। न्यायमूर्ति ने माना कि यह गलत हुआ है और उन्होंने चैनल को बहाल करने के आदेश पारित कर दिये। संजय शर्मा ने अपने वीडियो संदेश में कहा है कि पिछले दो महीने उनके जीवन और पत्रकारिता के सबसे कठिन दौरों में से एक रहे। एक तरफ चैनल बंद था, दूसरी तरफ लगातार आरोप लगाए जा रहे थे। डिजिटल प्लेटफॉर्म रुक चुका था, आर्थिक नुकसान बढ़ रहा था और वर्षों की मेहनत अचानक संकट में दिखाई देने लगी थी। लेकिन इन सबके बीच अगर किसी चीज ने उन्हें टूटने नहीं दिया तो वह था भारतीय न्यायपालिका पर उनका विश्वास। उन्होंने कहा कि मुझे भारत की न्याय व्यवस्था पर अपनी जान से ज्यादा भरोसा है।




