देश के मुसलमानों से नफरत विदेशियों को लगा रहे गले, मोदी का दोहरा चरित्र आया सामने, संजय सिंह ने कसा तंज
पिछले 12 साल में मोदी सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर टैक्स के नाम पर जनता से करीब 44 लाख करोड़ रुपये वसूले हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: जबतक चुनाव थे तब तक देश में सबकुछ ठीक था, न ही तेल की कमी थी और न सोने चांदी पर रोक। सबकुछ सही चल रहा था। चुनाव जीतने के लिए भाजपाई मंचों पर बड़े बड़े वादे और दावे भी करते थे। लेकिन जबसे चुनावी नतीजे आये हैं अचानक देश में संकट सा आ गया है।
तेज से लेकर सोने तक की खरीद पर पीएम मोदी त्याग की बातें करने लगे हैं। जिससे देश में हलचल तेज हो गई है और अफरातफरी का माहौल बना हुआ। दरअसल मोदी सरकार पर तेल कंपनियों का रोजाना 1000 करोड़ का घाटा का रोना चल रहा है। गोदी मीडिया छाती पीट-पीटकर जनता से कह रहा है कि चुपचाप महंगाई सह लो। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने खुद कहा कि कंपनियां रोज 1000 करोड़ घाटा झेल रही हैं। लेकिन विपक्ष पूछता है – जब तेल कंपनियों ने पिछले सालों में 3.5 लाख करोड़ से ज्यादा मुनाफा कमाया तब ये गोदी चैनल कहां थे?
पिछले 12 साल में मोदी सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर टैक्स के नाम पर जनता से करीब 44 लाख करोड़ रुपये वसूले हैं। जब कच्चा तेल सस्ता था तो सरकार ने एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर जनता की जेब काटी। टैक्स का बोझ इतना बढ़ाया कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में टैक्स का हिस्सा 50-60% तक पहुंच गया। कंपनियां मुनाफा कमा रही थीं, सरकार का खजाना भर रहा था, लेकिन आम आदमी को कोई राहत नहीं दी गई। अब जब ग्लोबल कीमत बढ़ी है तो घाटे का रोना शुरू हो गया और जनता से महंगाई बर्दाश्त करने को कहा जा रहा है।
कुल मिलाकर यह साफ लूट है। जब प्रॉफिट था तब टैक्स कम क्यों नहीं किया? मुनाफे के समय पैसा कहां गया? सड़कें, इंफ्रा बनीं, लेकिन आम जनता की जेब से निकाला गया पैसा अब महंगाई के रूप में वापस लौटा दिया जा रहा है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्ट, सब्जी, दूध, राशन सब महंगा हो जाता है। गरीब और मध्यम वर्ग सबसे ज्यादा परेशान है। वहीं इसी बीच AAP नेता संजय सिंह ने मोदी की विदेश यात्राओं पर जोरदार हमला बोला है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा कि- गोदी मीडिया छाती पीट रहा है।
जनता से चीख-चीख के कह रहा है “तेल कंपनियों को प्रतिदिन 1 हज़ार करोड़ का घाटा हो रहा है, चुप-चाप मँहगाई बर्दाश्त करो” गोदियों से पूछो 12 साल में मोदी जी ने टैक्स के नाम पर जनता से 44 लाख करोड़ रु लूटा।
तेल कंपनियों ने 3.5 लाख करोड़ मुनाफा कमाया तब ये गोदी कहाँ थे? अगर इतना मुनाफा कमाया है तो थोड़े दिन छूट दो मँहगाई कंट्रोल करो, बकवास बंद करो।
हैरानी की बात है एक तरफ जहां मोदी जी जनता से अपील कर रहे हैं कि तेल बचाओ, विदेश मत जाओ, सोना कम खरीदो। वहीं दूसरी तरफ खुद सरकार की विदेश यात्राएं, रोडशो, रैलियां जारी हैं। संजय सिंह ने कहा कि चुनाव तक तो बोझ सह लिया, अब चुनाव खत्म होने के बाद जनता को बलिदान देने को कहा जा रहा है। यह दोहरा मापदंड है। जनता से किफायत बरतने को कहो, लेकिन सत्ता की शान-शौकत पर खर्चा जारी रखो – यह जनता के साथ अन्याय है। मोदी सरकार 85-90% तेल आयात करती है। ग्लोबल संकट का बहाना लेकर जनता पर बोझ डाला जा रहा है। लेकिन सवाल यह है कि पिछले 12 साल में तेल पर जितना टैक्स वसूला, उसका सही उपयोग क्यों नहीं हुआ? क्यों कंपनियों के घाटे को अब जनता को चुकाना पड़ रहा है?
आम आदमी पहले से महंगाई की चक्की में पिस रहा है। रोज की कमाई में ईंधन का खर्च बढ़ना परिवार की रोटी-रोजी पर असर डाल रहा है। मोदी सरकार की नीति साफ दिखती है – प्रॉफिट में चुप, घाटे में जनता को रोना। यह जनविरोधी रवैया है। सरकार को पहले टैक्स में राहत देनी चाहिए, खर्चे कम करने चाहिए और फिर जनता से बलिदान मांगना चाहिए। जबसे भाजपा सरकार में आई है और मोदी प्रधानमंत्री की गद्दी पर बैठे हैं तबसे लेकर अबतक कई बार जनता को परेशानी के समंदर में धकेल चुके हैं। लेकिन अंधभक्त हैं जो देश की इस हालत पर भी मोदी-मोदी कर रहे हैं।



