मिर्ज़ापुर में पीएम शहरी आवास योजना पर घोटाले के आरोप, दोगुनी किस्त और पति-पत्नी दोनों को मिला लाभ
मिर्ज़ापुर में प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना में बड़े घोटाले के आरोप लगे हैं। अहरौरा नगर पालिका में पति-पत्नी दोनों को लाभ देने और कई खातों में दोगुनी किस्त भेजने के मामले में जांच ठंडे बस्ते में चली गई है, जिससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: गरीबों को पक्का मकान देने के उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना अब मिर्ज़ापुर में गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि योजना के नाम पर बड़े स्तर पर अनियमितताएं हुईं, लेकिन जांच की फाइलें अब ठंडे बस्ते में डाल दी गई हैं। मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है और कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। मामला मिर्ज़ापुर जिले की अहरौरा नगर पालिका से जुड़ा है, जहां नगरीय विकास अभिकरण यानी DUDA मिर्ज़ापुर पर योजना के तहत लाभार्थियों को दोगुनी धनराशि भेजने और पति-पत्नी दोनों को आवास योजना का लाभ देने के आरोप लगे हैं।
गरीबों के आवास पर भ्रष्टाचार का आरोप
केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना का उद्देश्य शहरी गरीबों को पक्का घर उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को लगभग ढाई लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है। लेकिन आरोप है कि मीरजापुर में इस योजना का दुरुपयोग किया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई अपात्र लोगों को योजना का लाभ दिया गया, जबकि नियमों के अनुसार परिवार के केवल एक सदस्य को ही लाभ मिलना चाहिए।
पति-पत्नी दोनों को मिली आवास राशि
आरोपों के मुताबिक अहरौरा क्षेत्र में कुछ मामलों में पति और पत्नी दोनों के खातों में आवास योजना की राशि भेज दी गई। उदाहरण के तौर पर चमेला देवी और उनके पति राजेंद्र को अलग-अलग आवास राशि मिलने का मामला सामने आया। इतना ही नहीं, कुछ लाभार्थियों को दूसरी किस्त की रकम भी दो-दो बार भेजे जाने का आरोप है। सूत्रों के अनुसार ऐसे मामलों की संख्या 200 से अधिक हो सकती है।
कई नामों पर उठे सवाल
विभागीय सूत्रों के अनुसार जिन लाभार्थियों के मामलों में अनियमितताओं की चर्चा है, उनमें अंजलि, गुड्डी देवी और अस्मा बानो जैसे नाम भी सामने आए हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही संभव होगी।
पूर्व जिलाधिकारियों ने दिए थे जांच के आदेश
मामले के तूल पकड़ने के बाद तत्कालीन जिलाधिकारी प्रवीण कुमार लास्कर ने नए आवास स्वीकृत करने पर रोक लगाते हुए जांच के निर्देश दिए थे। बाद में लोगों ने तत्कालीन जिलाधिकारीदिव्या मित्तल से भी शिकायत कर कार्रवाई की मांग की थी। बताया जाता है कि दोनों अधिकारियों ने जांच के निर्देश दिए थे, लेकिन उनके स्थानांतरण के बाद कार्रवाई की गति धीमी पड़ गई और मामला ठंडे बस्ते में चला गया।
डूडा कार्यालय पर भी उठे सवाल
हाल ही में मीडिया रिपोर्ट सामने आने के बाद डूडा कार्यालय में कार्यरत कुछ कर्मचारियों की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। आरोप है कि संविदा और भुगतान संबंधी विवादों के बावजूद कुछ कर्मचारी वर्षों से कार्यालय में कार्यरत हैं। हालांकि विभाग की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
लोगों ने की निष्पक्ष जांच की मांग
स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी महत्वपूर्ण योजना में यदि अनियमितताएं हुई हैं तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। लोगों की मांग है कि यदि जांच में गड़बड़ी साबित होती है तो दोषियों से राशि की वसूली की जाए और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो। मामला अब प्रशासनिक जवाबदेही और सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।
रिपोर्ट – संतोष देव गिरी
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