राजकोट में 12 मंदिर टूटने पर बवाल | BJP पर हिंदू विरोधी होने के आरोप | सड़कों पर उतरे लोग

राजकोट में रातों-रात 12 मंदिर गिराए जाने के बाद भारी विरोध शुरू हो गया है... लोगों ने सड़कों पर उतरकर भाजपा सरकार के खिलाफ...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः राजकोट शहर में 14 मई की देर रात एक चौंकाने वाली घटना घटी.. राजकोट नगर निगम की टीम ने लगभग 12 छोटे मंदिरों को बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया.. मावड़ी मेन रोड समेत कई इलाकों में यह कार्रवाई अचानक शुरू की गई.. स्थानीय लोगों ने इसे हिंदू आस्था पर हमला बताया.. रात के अंधेरे में मंदिर तोड़ने की खबर फैलते ही लोग सड़कों पर उतर आए.. और भाजपा की नीति पर सवाल उठाने लगे.. लोगों का कहना है कि भाजपा धर्म और हिंदुत्व के नाम पर वोट मांगकर सत्ता में आई है.. लेकिन अब सत्ता मिलते ही मंदिरों पर बुलडोजर चलवा रही है.. हिंदुओं ने भारी संख्या में भाजपा को वोट दिए थे.. लेकिन अब पार्षद चैन से सो रहे हैं.. यह घटना पूरे राजकोट में चर्चा का विषय बन गई है.. और हिंदू समाज में गहरा आक्रोश फैल गया है..

जानकारी के मुताबिक 14 मई की रात करीब 1:30 बजे राजकोट नगर निगम की टीम भारी पुलिस सुरक्षा के साथ मंदिर तोड़ने पहुंची.. अतिक्रमण हटाने के नाम पर यह कार्रवाई सुबह 5 बजे तक चली.. टीम के साथ फायर ब्रिगेड, पीजीवीसीएल, सतर्कता विभाग और स्थानीय पुलिस की भारी फोर्स मौजूद थी.. मावड़ी मेन रोड पर स्थित कई छोटे मंदिरों को एक साथ जमींदोज कर दिया गया.. इन मंदिरों में हनुमान जी, शिव जी और अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां थीं.. स्थानीय लोगों का आरोप है कि कार्रवाई इतनी अचानक की गई कि उन्हें संभलने का समय तक नहीं मिला.. कई जगहों पर मंदिर के पुजारी और भक्त सो रहे थे, जिन्हें अचानक जगा दिया गया..

मालवीय नगर पुलिस स्टेशन के पास स्थित हनुमान मंदिर को पहले ही नोटिस दिया गया था.. जैसे ही तोड़फोड़ की खबर फैली, स्थानीय युवा.. और लोग बड़ी संख्या में वहां जमा हो गए.. और उन्होंने सड़क पर रामधुन और जय श्रीराम के नारे लगाए.. और चार घंटे तक धरना दिया.. भीड़ इतनी ज्यादा हो गई कि विभाग के अधिकारियों को पीछे हटना पड़ा.. स्थानीय लोगों के दबाव में अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि 48 घंटे के अंदर मंदिर का आकार छोटा करके अतिक्रमण हटाया जाएगा.. इस आश्वासन के बाद लोगों ने धरना समाप्त किया, लेकिन गुस्सा अभी भी बरकरार है..

स्थानीय निवासी हितेशभाई डाभी ने खुलकर अपनी बात रखी.. उन्होंने कहा कि आज सत्ता में बैठे पार्षद चैन से सो रहे हैं.. और उन्हें जनता की कोई परवाह नहीं है.. मैंने खुद पार्षदों और भानुबेन बाबरिया को फोन किया था.. लेकिन अब उन्हें वोट मिल गए हैं.. इसलिए वे चैन से सो रही हैं.. हम दिन-रात मेहनत करते हैं.. और अचानक रात 1 बजे हमें बताया जाता है कि मंदिर ढहाया जाएगा.. मंदिर जनता की आस्था का केंद्र है.. आप मंदिर गिराकर क्या साबित करना चाहते हैं..

हितेशभाई ने आगे कहा कि भाजपा ने धर्म के नाम पर वोट मांगे थे.. प्रधानमंत्री हों या मुख्यमंत्री, सभी हिंदुत्व.. और सनातन संस्कृति के नाम पर सत्ता में आए हैं.. अगर काम करना है तो राजकोट में और भी कई जरूरी काम हैं.. उन पर ध्यान दीजिए.. मंदिरों पर समय बर्बाद मत कीजिए.. स्थानीय लोगों ने बताया कि मावड़ी मेन रोड पर ज्योति लाइट बिल्डिंग के पास स्थित मंदिर 35-40 साल पुराना है.. मंदिर के खंभे पर तारीख भी लिखी हुई है.. लोग कहते हैं कि अगर किसी को परेशानी होती तो जनता खुद शिकायत करती.. यहां बड़ी-बड़ी दुकानें चलाने वाले दुकानदार भी कहते हैं कि.. यह मंदिर उनका दादा है.. अगर दुकानदारों को कोई आपत्ति नहीं है.. तो सरकार को क्यों है.. मंदिर में आने वाले, पूजा करने वाले और आसपास रहने वाले सभी लोग इससे खुश थे..

लोग बार-बार भाजपा पर सवाल उठा रहे हैं.. उनका कहना है कि भाजपा हिंदुओं के दम पर सत्ता में आई है.. जब वोट चाहिए थे, तब मंदिर-मस्जिद, राम मंदिर.. और हिंदुत्व का नारा दिया गया.. लेकिन अब सत्ता मिल गई है तो मंदिरों पर बुलडोजर चल रहा है.. लोग चेतावनी दे रहे हैं कि.. हिंदुओं को नाराज करके भाजपा को सत्ता में बने रहने में ज्यादा समय नहीं लगेगा.. आज 5 लोग जाग रहे हैं, कल 5 हजार जागेंगे.. जनता अगर एक बार सोच ले, तो सत्ता उखाड़ फेंकने में देर नहीं लगेगी.. स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम ने जानबूझकर रात 1:30 बजे कार्रवाई शुरू की ताकि लोगों को पता न चले और विरोध न हो.. सड़कों पर झड़प से बचने के लिए रात का समय चुना गया..

वहीं यह तरीका कई लोगों को गलत लगा.. उनका कहना है कि अगर कार्रवाई सही थी.. तो दिन में क्यों नहीं की गई.. रात के अंधेरे में मंदिर क्यों तोड़े गए.. इससे साफ है कि प्रशासन जानता था कि.. दिन में लोग विरोध करेंगे.. नगर निगम का कहना है कि यह अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई है.. लेकिन लोग पूछ रहे हैं कि क्या सिर्फ छोटे मंदिर ही अतिक्रमण हैं.. शहर में कई बड़े होटल, दुकानें.. और अन्य निर्माण भी सड़क पर अतिक्रमण करते हैं.. उन पर कार्रवाई क्यों नहीं होती..

 

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