उन्नाव रेप केस में कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम झटका
दिल्ली हाईकोर्ट के सजा निलंबन के फैसले को पलटा

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 2017 के उन्नाव रेप केस में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा को निलंबित करने वाले दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है। इससे पहले, इस मामले में सीबीआई (सीबीआई) की ओर से दायर एक अपील पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी।
सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह दो महीने के भीतर इस मामले पर नए सिरे से फैसला करे। साथ ही, शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया है कि हाई कोर्ट अपना नया निर्णय लेते समय सुप्रीम कोर्ट द्वारा पिछला आदेश रद्द किए जाने के फैसले से बिल्कुल भी प्रभावित न हो।

25 लााख का जुर्माना व अतिरिक्त 1० साल की सजा हुई थी
सुप्रीम कोर्ट ने पूरा मामला दिल्ली स्थानांतरित कर दिया। दिसंबर 19 में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने कुलदीप सिंह सेंगर को नाबालिग से दुष्कर्म का दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई और 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। पिता की मौत के मामले में भी उन्हें अतिरिक्त 1० साल की सजा हुई।
2०17 का था मामला : 17 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म का आरोप
जून 17 में उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर पर एक 17 वर्षीय किशोरी ने आरोप लगाया कि नौकरी दिलाने के झांसे में उसे अपने घर बुलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया गया। पुलिस ने विधायक के प्रभाव के कारण शुरू में मुकदमा दर्ज नहीं किया। मार्च-अप्रैल 18 तक लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने पर किशोरी ने लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के सामने आत्मदाह का प्रयास किया, जिसके बाद 9 अप्रैल 18 को सेंगर के खिलाफ दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज हुआ।इस दौरान पीडि़ता के पिता को जेल भेज दिया गया, जहां अप्रैल 18 में उनकी मौत हो गई। मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई और जुलाई 18 में कुलदीप सिंह सेंगर को गिरफ्तार कर लिया गया। भाजपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया। जुलाई 19 में पीडि़ता, उसके वकील और परिवार को ले जा रही कार में एक ट्रक ने टक्कर मार दी, जिसमें पीडि़ता की दो रिश्तेदारों की मौत हो गई। परिवार ने इसे सुनियोजित साजिश बताया।
सपा चीफ से मिलीं आजम खां की पत्नी तंजीन फातिमा
अखिलेश यादव का दु:ख बांटने लखनऊ आया परिवार
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की पत्नी और उनके बेटे ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात की। सपा चीफ ने मुलाकात की तस्वीरें भी साझा कीं। सपा चीफ ने तस्वीरें साझा करते हुए लिखा- दुख में सब साथ हैं। सपा चीफ से मिलने के लिए आजम की पत्नी तंजीन फातिमा और उनके बड़े बेटे अदीब आज़म खान पहुंचे।
आजम परिवार ने सपा संस्थापक दिवंगत मुलायम सिंह यादव के बेटे प्रतीक यादव के निधन के बाद अखिलेश यादव से मुलाकात की।
गुरुवार प्रतीक यादव पंचतत्व में विलीन हो गए। इससे पहे उनकी शव यात्रा के दौरान सपा के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव के बेटे आदित्य यादव ने अर्थी को कंधा दिया। इस दौरान प्रतीक की पत्नी और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की नेता एवं राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव, उनकी बेटियों प्रथमा तथा पद्मजा तथा अन्य रिश्तेदारों ने उन्हें अश्रुपूर्ण विदाई दी।
अपर्णा अपनी दोनों बेटियों तथा जूना अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि के साथ श्मशान घाट पहुंचीं। सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव के छोटे बेटे और शारीरिक फिटनेस के शौकीन प्रतीक बेहद प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से होने के बावजूद सियासत से दूर रहना पसंद करते थे।
अब 21 जून को पुन: होगी नीट परीक्षा
पेपर लीक के आरोपों के चलते रद्द हुई थी
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी यानी एनटीए ने नीट-यूजी की नई तारीख का एलान कर दिया है। अब यह परीक्षा देशभर में 21 जून को होगी। इससे पहले यह परीक्षा 3 मई को हुई थी। हालांकि, पेपर लीक की आशंका के चलते यह सवालों के घेरे में आ गई थी। अब इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी गई है। एनटीए ने कहा था कि जल्द ही परीक्षा की नई तारीखों का एलान कर दिया जाएगा। इसके लिए छात्र-छात्राओं को दोबारा फीस देने की जरूरत नहीं होगी।
इस परीक्षा के जरिए मेडिकल में प्रवेश दिया जाता है। इससे पहले, गुरुवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी नीट-यूजी परीक्षा को दोबारा आयोजित कराने के मुद्दे पर पहली उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की थी। इस अहम बैठक में शिक्षा मंत्रालय और परीक्षा कराने वाली एजेंसी के कई बड़े अधिकारी शामिल हुए थे।
इस मीटिंग का मकसद यही था कि रद्द हुई परीक्षा को अब नए सिरे से कैसे कराया जाए ताकि आगे कोई भी गड़बड़ी न हो। सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि इस बार दोबारा परीक्षा पूरी तरह से पारदर्शी और सुरक्षित तरीके से हो, जिससे दिन-रात मेहनत करने वाले छात्रों के साथ कोई अन्याय न हो।
एनटीए ने दी जानकारी
परीक्षा की तारीख की घोषणा करते हुए एनटीए ने कहा कि उसने केंद्र सरकार की अनुमति के बाद नीट-यूजी-26 की पुन: परीक्षा रविवार 21 जून 26 को आयोजित करने का निर्णय लिया है। परीक्षार्थियों व अभिभावकों से अनुरोध है कि वे केवल एनटीए के आधिकारिक माध्यमों पर ही भरोसा करें।
आज आंधी के बाद बारिश की चेतावनी
दिल्ली, यूपी से पंजाब में गर्मी से राहत
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। दिल्ली एनसीआर के साथ उत्तर भारत के ज्यादातर राज्यों में आज बारिश देखने को मिल सकती है। बीते दिन तेज आंधी नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली में देखने को मिली थी। इसके बाद आज बारिश होने के आसार हैं। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में 15 मई और 16 मई को बारिश हो सकती है।
दिल्ली, उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में भी हल्की बारिश देखने को मिल सकती है। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और राजस्थान में भी 15 मई को बारिश होने की संभावना है। राजस्थान में कल बारिश का रेड अलर्ट जारी किया गया था.इस दौरान सावधान रहने की जरूरत है।
मौसम विभाग ने 1० राज्यों के लिए भीषण बारिश और आंधी-तूफान को लेकर पहले ही आगाह कर दिया है। इन राज्यों में न सिर्फ तेज बारिश देखने को मिल सकती है बल्कि आंधी-तूफान भी आ सकता है। इस दौरान 7० किमी. प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। दिल्ली में 14 मई की तेज गर्मी के बाद आज हल्के बादल छाए रहने और आंधी- तूफान के साथ ही छिटपुट बारिश भी हो सकती है.पूर्वोत्तर भारत को भी बारिश से राहत मिलती नहीं दिख रही है. मणिपुर, नगालैंड और मिजोरम और त्रिपुरा के लोग भी 17 मई तक हल्की से मध्यम बारिश का सामना कर सकते हैं. वहीं 18 मई तक असम और मेघालय का हाल भी कुछ ऐसा ही रहने वाला है.। बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव क्षेत्र बनने की वजह से मौसम विभाग के मुताबिक ने तमिलनाडु में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं 15 मई 26 को कोयंबटूर और नीलसगिरी में भारी बारिश हो सकती है। केरल में 15-17 मई तक बारिश हो सकती है। वहीं कर्नाटक, पुडुचेरी और कराईकल में भी 18 मई तक बारिश और आकाशीय बिजली की संभावना है।
स्मृति उपवन घोटाले में अब अफसरों की जवाबदेही पर उठा सवाल
आईजीआरएस शिकायत में एलडीए ने स्वीकार की अनियमितता लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई अब तक नहीं
जब विभाग ने खुद मान लिया घटिया निर्माण तो फिर उद्यान अधिकारी पर कार्रवाई क्यों नहीं?
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
लखनऊ । लखनऊ विकास प्राधिकरण की कानपुर रोड योजना के अंतर्गत स्मृति उपवन पार्क में चल रहे निर्माण कार्यों को लेकर उठे सवाल अब सिर्फ घटिया निर्माण तक सीमित नहीं रह गए हैं। मामला अब सीधे-सीधे विभागीय जवाबदेही, संरक्षण और सरकारी सिस्टम की कार्यशैली पर आकर टिक गया है। सबसे बड़ा और चौंकाने वाला तथ्य यह है कि जिस शिकायत को पहले सामान्य बताकर दबाने की कोशिश की जा रही थी उसी शिकायत पर अब विभाग ने खुद स्वीकार किया है कि निर्माण कार्य में खामियां थीं।
आईजीआरएस पर दर्ज शिकायत के निस्तारण में उद्यान विभाग ने लिखित रूप से यह माना कि संबंधित ठेकेदार को नोटिस जारी किया गया है और उसके भुगतान पर रोक लगाने की कार्रवाई की गई है। विभाग स्वयं यह मान चुका है कि निर्माण कार्य में गड़बड़ी हुई। लेकिन यहीं से सबसे बड़ा सवाल पैदा होता है कि अगर काम घटिया था, सामग्री निम्न स्तर की थी और निर्माण मानकों के विपरीत हो रहा था, तो फिर सिर्फ ठेकेदार ही दोषी कैसे हो गया?
रातों-रात बदलता प्लास्टर बहुत कुछ कह रहा है
इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा उस बात की हो रही है कि जब मीडिया में खबरें सामने आईं, उसके बाद रातों-रात निर्माण कार्यों में बदलाव शुरू हो गया। कई जगहों पर प्लास्टर बदला गया निर्माण सामग्री हटाई गई और काम को नए तरीके से दिखाने की कोशिश की गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर काम पूरी गुणवत्ता के साथ हुआ था, तो फिर अचानक इतनी हड़बड़ी क्यों दिखाई गई? आखिर ऐसी कौन-सी मजबूरी थी कि रात के अंधेरे में निर्माण सुधारने की कवायद शुरू हो गई? यही घटनाक्रम अब इस आशंका को और मजबूत करता है कि कहीं न कहीं विभाग के भीतर भी लोगों को यह एहसास था कि काम मानकों के अनुरूप नहीं हुआ है।
क्या अधिकारी सिर्फ कुर्सी पर बैठने के लिए हैं?
सरकारी निर्माण कार्यों में हर काम की निगरानी के लिए जिम्मेदार अधिकारी तैनात किए जाते हैं। योजनाएं बनती हैं, बजट स्वीकृत होता है, तकनीकी परीक्षण होते हैं और हर स्तर पर हस्ताक्षर किए जाते हैं। ऐसे में अगर करोड़ों रुपये के विकास कार्यों में घटिया सामग्री लग रही थी, पीली ईंटें इस्तेमाल हो रही थीं, प्लास्टर टूट रहा था और मानकों की अनदेखी हो रही थी, तो क्या यह सब बिना अधिकारियों की जानकारी के हो रहा था? यही सवाल अब शिकायतकर्ता ने उठाया है। शिकायत में साफ तौर पर कहा गया है कि यदि विभाग को घटिया निर्माण की जानकारी थी और उसने इसे स्वीकार भी कर लिया, तो फिर उस सहायक उद्यान अधिकारी पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई जिसके संरक्षण में यह पूरा काम कराया जा रहा था। शिकायतकर्ता ने सहायक उद्यान अधिकारी करण सिंह का नाम लेते हुए मांग की है कि सिर्फ ठेकेदार पर कार्रवाई दिखाकर मामले को खत्म न किया जाए, बल्कि उन अधिकारियों की भी जिम्मेदारी तय की जाए जो इस पूरे निर्माण कार्य की निगरानी कर रहे थे।
जनता के टैक्स का पैसा लेकिन जवाबदेही शून्य
सबसे दुखद पहलू यह है कि जिन विकास कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, वह पैसा किसी अफसर या ठेकेदार की जेब से नहीं आता। यह जनता के टैक्स का पैसा होता है। आम आदमी अपनी कमाई से टैक्स देता है ताकि शहर बेहतर बने, पार्क विकसित हों और सार्वजनिक सुविधाएं मजबूत हों। लेकिन जब उसी पैसे से घटिया निर्माण होने लगे और शिकायतों के बावजूद सिर्फ छोटे स्तर पर कार्रवाई का दिखावा किया जाए, तब जनता का विश्वास टूटता है। प्रश्न सिर्फ एक पार्क का नहीं है। प्रश्न उस व्यवस्था का है जिसमें ठेकेदार तो बदल जाते हैं लेकिन जिम्मेदार अफसर हर बार बच निकलते हैं। शिकायतकर्ता ने अपने प्रार्थना पत्र में उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए साफ कहा है कि यदि जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में भी ऐसे ही घटिया निर्माण होते रहेंगे। यह मांग सिर्फ व्यक्तिगत नाराजगी नहीं बल्कि व्यवस्था सुधारने की मांग है। क्योंकि अगर विभाग खुद लिखित में अनियमितता स्वीकार कर चुका है, तो फिर कार्रवाई अधूरी क्यों है? अब नजर इस बात पर है कि क्या लखनऊ विकास प्राधिकरण इस मामले में सिर्फ ठेकेदार तक कार्रवाई सीमित रखेगा या फिर उन अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी जिनकी निगरानी में यह पूरा निर्माण कार्य हुआ।



