वन नेशन वन इलेक्शन पर देशभर में संग्राम, JPC के सामने विपक्ष का बड़ा विरोध
‘एक देश–एक चुनाव’ को लेकर देश की राजनीति गरमा गई है... मोदी सरकार के प्रस्ताव की समीक्षा कर रही संयुक्त संसदीय समिति...

4पीएम न्यूज नेटवर्कः देश में वन नेशन, वन इलेक्शन यानी एक देश-एक चुनाव की चर्चा जोरों पर है.. मोदी सरकार के इस बड़े प्रस्ताव की समीक्षा कर रही संयुक्त संसदीय समिति गुजरात के तीन दिवसीय दौरे पर है.. समिति ने जहां एक तरफ एक साथ चुनाव कराने के फायदे बताए हैं.. वहीं विपक्षी दल इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं..
आपको बता दें कि मई 2026 में JPC ने गुजरात का दौरा शुरू किया.. यह समिति का सातवां राज्य दौरा है.. तीन दिन की इस यात्रा में समिति ने राज्य सरकार के अधिकारियों, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, उपमुख्यमंत्री.. और विधायकों से मुलाकात की.. JPC चेयरमैन पी.पी. चौधरी ने कहा कि गुजरात सरकार की प्रस्तुति मॉडल प्रेजेंटेशन रही.. और उन्होंने दावा किया कि एक साथ चुनाव से देश को करीब 7 लाख करोड़ रुपये की बचत हो सकती है.. और जीडीपी में 1.6% की बढ़ोतरी हो सकती है.. समिति का कहना है कि यह प्रस्ताव देशहित में है..
समिति ने गिफ्ट सिटी क्लब में उच्च अधिकारियों के साथ चर्चा की.. इसमें चुनावों के खर्च, सुरक्षा बलों की तैनाती और प्रशासनिक चुनौतियों पर बात हुई.. गुजरात सरकार ने एक साथ चुनाव कराने का समर्थन किया.. वन नेशन, वन इलेक्शन का मतलब है कि लोकसभा और सभी राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ हों.. वर्तमान में अलग-अलग समय पर चुनाव होते हैं.. जिससे सालभर चुनावी माहौल बना रहता है.. भारत में आखिरी बार 1967 में एक साथ चुनाव हुए थे.. उसके बाद कई राज्यों में सरकार गिरने या समय से पहले चुनाव होने के कारण यह व्यवस्था टूट गई.. अब मोदी सरकार इसे फिर से लागू करना चाहती है..
इसके लिए संविधान (129वां संशोधन) विधेयक 2024 और केंद्रशासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2024 लाए गए हैं.. JPC इन विधेयकों की जांच कर रही है.. समिति को अपनी रिपोर्ट मॉनसून सत्र तक सौंपनी है.. अलग-अलग चुनावों पर भारी खर्च होता है.. सरकार का दावा है कि एक साथ चुनाव कराने से 7 लाख करोड़ रुपये तक की बचत हो सकती है.. यह पैसा विकास कार्यों, स्कूलों, अस्पतालों और सड़कों पर लगाया जा सकता है.. बार-बार चुनाव होने से सरकारी कामकाज प्रभावित होता है.. मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू होने से नई योजनाएं रुक जाती हैं.. एक साथ चुनाव होने से यह समस्या कम हो सकती है..
CRPF, BSF जैसे सुरक्षा बलों को बार-बार चुनाव ड्यूटी पर नहीं भेजना पड़ेगा.. वे सीमा सुरक्षा पर ज्यादा फोकस कर सकेंगे.. चुनावी खर्च कम होने से अर्थव्यवस्था को भी फायदा होने का दावा किया जा रहा है.. नीति आयोग और लॉ कमीशन की रिपोर्टों में भी इसका उल्लेख किया गया है.. आम लोगों को भी बार-बार वोटिंग के लिए नहीं जाना पड़ेगा.. समिति का कहना है कि यह सुधार पूरे 140 करोड़ देशवासियों के हित में है.. किसी एक पार्टी के लिए नहीं.. हालांकि विपक्षी दल JPC की प्रक्रिया और इस प्रस्ताव दोनों का विरोध कर रहे हैं.. कांग्रेस, AAP और अन्य दलों का कहना है कि.. इससे देश का संघीय ढांचा कमजोर होगा..
विपक्ष का तर्क है कि भारत एक संघीय देश है.. जहां राज्यों की अपनी अलग पहचान और मुद्दे हैं.. अगर एक साथ चुनाव होंगे, तो राष्ट्रीय मुद्दे राज्यों के स्थानीय मुद्दों पर हावी हो जाएंगे.. इससे छोटे दल और क्षेत्रीय पार्टियां प्रभावित होंगी.. विपक्ष संवैधानिक सवाल भी उठा रहा है.. अगर बीच में कोई राज्य सरकार गिर जाती है.. तो क्या पूरे देश में फिर से चुनाव कराए जाएंगे.. विपक्ष पूछ रहा है कि क्या केंद्र सरकार राज्यों की सरकारों को भंग कर सकती है.. चुनाव आयोग को इतने बड़े चुनाव के लिए वोटर लिस्ट, EVM, कर्मचारी.. और सुरक्षा व्यवस्था करनी होगी.. विपक्ष का कहना है कि मौजूदा स्थिति में यह व्यावहारिक नहीं है..



