कॉकरोच जनता पार्टी का पेज भारत में कर दिया गया बैन

तानाशाहियां हमेशा हथियारों से नहीं बल्कि हंसी से डरती हैं!

  • क्या डिजिटल व्यंग्य अब लोकतंत्र के लिए खतरा माना जाएगा?

4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। तो क्या केन्द्र की मोदी सरकार कॉकरोच जनता पार्टी से डर गयी है। सरकार की कॉकरोच पार्टी पर की गयी कार्रवाई देखकर तो यही लगता है कि सरकार कॉकरोच पार्टी से पूरी तरह से डर चुकी है। कॉकरोच पार्टी के फाउंडर ने एक्स के जरिये जानकारी दी है कि पार्टी के सोशल मीडिया पेज को भारत में सस्पेंड कर दिया गया है। ऐसा क्यों हुआ हैं? किसलिए किया गया है और किस के कहने पर हुआ है इसका कोई जवाब नहीं दिया गया है। हम कह सकते हैं कि एक व्यंग्यात्मक डिजिटल आंदोलन ने सत्ता के सबसे मजबूत किले की नींव में कंपन पैदा कर दिया? और क्या यही वजह है कि जिस काकरोच जनता पार्टी को शुरुआत में लोग मीम समझकर हंस रहे थे आज उसी के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर कानूनी शिकंजा कसने की नौबत आ गई? सवाल छोटा नहीं है। क्योंकि कहानी सिर्फ एक सोशल मीडिया एकाउंट की नहीं है कहानी उस बेचैनी की है जो सत्ता के गलियारों में तब पैदा होती है जब मजाक जनता का हथियार बन जाता है।

सोचिए… कितनी ताकत है

विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी होने का दावा करने वाली बीजेपी। करोड़ों कार्यकर्ताओं, हजारों आईटी सेल योद्धाओं और विशाल डिजिटल मशीनरी के बावजूद एक ऐसी कॉकरोच पार्टी से मुकाबला करती दिखाई दे रही है जिसका जन्म महज कुछ दिनों पहले हुआ है और सबसे बड़ा झटका? सिर्फ 6 दिन में इंस्टाग्राम पर एक करोड़ 10 लाख से ज्यादा लोग जुड़ गए के रूप में सामने आया है। उधर बीजेपी का इंस्टा ग्राफ वहीं 87 लाख के आसपास अटका हुआ दिखाई दे रहा है। यही वो आंकड़ा है जिसने सत्ता के माथे पर पसीना ला दिया है। क्योंकि राजनीति में हार सिर्फ चुनाव से नहीं होती हार तब शुरू होती है जब जनता हंसना शुरू कर दे। जब युवा मीम्स को भाषण से ज्यादा शेयर करने लगें। जब व्यंग्य, प्रचार से ज्यादा असरदार हो जाए। और जब कॉकरोच शब्द सत्ता के लिए असहजता पैदा करने लगे। याद रखिए इतिहास गवाह है कि तानाशाहियां हमेशा हथियारों से नहीं डरतीं वह हंसी से डरती हैं। वह व्यंग्य से डरती हैं। वह उस डिजिटल भीड़ से डरती हैं जो बिना किसी पार्टी कार्यालय, बिना किसी फंड और बिना किसी टीवी चैनल के सीधे जनता के मोबाइल में घुस जाती है।

आखिरकार क्यों जुड़ रहे हैं युवा

आज का युवा भाषणों से नहीं व्यंग्य से जुड़ रहा है। यही वजह है कि कॉकरोच जनता पार्टी जैसा मजाक अचानक एक बड़े डिजिटल ट्रेंड में बदल गया। इसकी सबसे बड़ी ताकत है रिलेटेबल सटायर। कॉकरोच को लोग ऐसे जीव के रूप में देखते हैं जो हर हाल में जिंदा रहता है। न सिस्टम उसे खत्म कर पाता है न स्प्रे न मुश्किल हालात। सोशल मीडिया पर वायरल हुई लाइन देश में सिर्फ कॉकरोच ही सर्वाइव कर सकता है सीधे युवाओं के दिल में उतर गई। क्योंकि आज का युवा खुद को भी कुछ ऐसी ही लड़ाई लड़ता महसूस कर रहा है। बेरोजगारी की मार, प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक और घोटाले, लगातार बढ़ती महंगाई, नौकरी की अनिश्चितता और सोशल मीडिया से पैदा हुआ मानसिक दबाव। इन सबने युवाओं के भीतर गहरी निराशा पैदा की है। लेकिन यह पीढ़ी अपनी नाराजगी को पारंपरिक राजनीतिक भाषा में नहीं बल्कि मीम और व्यंग्य की भाषा में व्यक्त करती है। यही कारण है कि कॉकरोच जनता पार्टी के पोस्ट और रील्स सिर्फ मजाक नहीं लगते बल्कि सिस्टम पर कटाक्ष जैसे महसूस होते हैं। युवाओं को इसमें अपनी हताशा संघर्ष और गुस्से का प्रतीक दिखाई दे रहा है।

सिस्टम से निराश युवओं की डिजिटल चीख

क्या कॉकरोच जनता पार्टी सिर्फ एक इंस्टा पेज है या सिस्टम से निराश नई पीढ़ी की डिजिटल चीख? और राजनीति का सबसे विस्फोटक सवाल क्या यह बीजेपी के खिलाफ बना स्वत: स्फूर्त व्यंग्य है? या फिर कोई इनडायरेक्ट गेम चल रहा है? क्योंकि सोशल मीडिया की राजनीति में कुछ भी ऑर्गेनिक नहीं माना जाता। हर ट्रेंड के पीछे एजेंडा खोजा जाता है। कुछ लोग कह रहे हैं यह सरकार विरोधी युवाओं का डिजिटल विद्रोह है। कुछ कह रहे हैं कि यह विपक्षी इकोसिस्टम की क्रिएटिव चाल है। और कुछ तो यहां तक कह रहे हैं कि कहीं यह बीजेपी की ही अंदरूनी सोशल इंजीनियरिंग तो नहीं? ताकि असली मुद्दों से ध्यान हटे या युवाओं का गुस्सा मीम में बदल जाए। लेकिन एक बात साफ है कि भारत की राजनीति अब सिर्फ रैलियों से नहीं चलेगी। अब चुनावी लड़ाई मीम, रील, ट्रोल और इंस्टा एल्गोरिद्म पर भी होगी। और इस लड़ाई में एक कॉकरोच ने एंट्री मार दी है!

अब देखिए घटनाक्रम

सीजेपी यानी कॉकरोच जनता पार्टी का अकाउंट अचानक भारत में विदहेल्ड कर दिया जाता है। कारण? लीगल डिमांड, संस्थापक अभिजीत दीपके खुद एक्स पर स्क्रीनशॉट डालकर कहते हैं कि ्रAs expected Cockroach Janta Party’s account has been withheld in India. मतलब सवाल और गहरा हो गया। अगर यह सिर्फ एक मजाक था तो फिर इतना डर क्यों? अगर यह सिर्फ एक मीम था तो फिर लीगल डिमांड क्यों? और अगर इसका कोई असर नहीं था तो फिर इसे रोकने की जरूरत क्यों पड़ गई? यही वह बिंदु है जहां पूरा मामला राजनीतिक विस्फोट बन जाता है। क्योंकि जनता अब पूछ रही है कि क्या सरकार आलोचना से डरने लगी है? क्या डिजिटल व्यंग्य अब लोकतंत्र के लिए खतरा माना जाएगा? क्या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सिर्फ सत्ता समर्थकों तक सीमित रह गई है? सबसे दिलचस्प बात यह है कि सीजेपी ने कोई चुनाव नहीं लड़ा कोई रैली नहीं की कोई पोस्टर नहीं लगाए फिर भी वह चर्चा के केंद्र में आ गई। क्योंकि उसने युवाओं की निराशा को भाषा दे दी। उसने सिस्टम पर गुस्से को मीम में बदल दिया। और उसने राजनीति को उस आईने के सामने खड़ा कर दिया जिसमें जनता अब डर नहीं रही बल्कि ठहाके लगा रही है। और सत्ता के लिए सबसे खतरनाक आवाज वही होती है जो गुस्से में नहीं हंसते हुए उठती है।

56 पोस्ट और बीजेपी पीछे

द रअस्ल कॉकरोच जनता पार्टी सिर्फ मीम नहीं है यह सिस्टम के खिलाफ जमा हुआ गुस्सा है जो उभर कर सामने आ रहा है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान एक टिप्पणी हुई और कॉकरोच शब्द सोशल मीडिया पर विस्फोट बन गया। भारत के सीजेआई की एक टिप्पणी को देश के उन करोड़ों युवाओं ने अपने ऊपर हमला माना। जो बेरोजगारी, पेपर लीक, महंगाई और अनिश्चित भविष्य से पहले ही टूट चुके थे। सीजेआई की टिप्पणी के बाद आये कॉकरोच जनता पार्टी नाम के डिजिटल तूफान ने देश की पूरी राजनीति को मथ दिया है। 16 मई को मजाक में बना एक इंस्टाग्राम पेज देखते-देखते देश का सबसे बड़ा वायरल राजनीतिक व्यंग्य बन गया। सिर्फ छह दिनों में इस पेज ने 10.9 मिलियन यानी एक करोड़ नौ लाख फॉलोअर्स हासिल कर लिए, जबकि बीजेपी का आधिकारिक अकाउंट 87 लाख पर रह गया। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बीजेपी ने यह आंकड़ा हजारों पोस्ट के बाद हासिल किया जबकि कॉकरोच जनता पार्टी ने सिर्फ 56 पोस्ट में डिजिटल विस्फोट कर दिया। यह सिर्फ एल्गोरिद्म का खेल नहीं था। यह उस गुस्से का विस्फोट था जो वर्षों से युवाओं के भीतर जमा हो रहा था। बेरोजगारी, परीक्षा घोटाले, सिस्टम पर अविश्वास और लगातार बढ़ती निराशा ने इस व्यंग्य को आंदोलन जैसा रंग दे दिया। पार्टी का नारा सेक्युलर, सोशलिस्ट, डेमोक्रेटिक और लेजी खुद में एक कटाक्ष बन गया। जैसे युवा कह रहे हों कि अगर सिस्टम हमें कॉकरोच कहता है तो हम उसी नाम को अपनी पहचान बना लेंगे। इस मुहिम ने सिर्फ मजाक नहीं किया बल्कि न्यायपालिका की जवाबदेही, चुनावी पारदर्शिता और महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण जैसे मुद्दे भी उठाए। अनुराग कश्यप, कुणाल कामरा, उर्फी जावेद, महुआ मोइत्रा और अखिलेश यादव जैसे नामों के जुडऩे से यह ट्रेंड और बड़ा होता गया। सबसे बड़ा संदेश साफ है भारत का युवा अब पारंपरिक राजनीति की भाषा में नहीं बोलता। वह मीम बनाता है, रील बनाता है, व्यंग्य करता है। लेकिन उसके भीतर का गुस्सा असली है। कॉकरोच जनता पार्टी शायद चुनाव न लड़े, लेकिन उसने सिस्टम को आईना जरूर दिखा दिया है।

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