उद्धाटन की राजनीति बनाम इंजीनियरिंग की सच्चाई
यूपी में पुल नहीं भरोसा टूट रहा है

- हमीरपुर में आंधी से उड़ा पुल, 6 की मौत, दर्जनों घायल
यूपी : इस वक्त एक्सप्रेसवे, हाईवे और मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल का चेहरा बनाकर पेश किया जा रहा है - विपक्ष के निशाने पर बीजेपी सरकार
4पीएम न्यूज़ नेटवर्क
नई दिल्ली। बीती रात से बदले मौसम का कहर वैसे तो पूरे यूपी में सुनाई दिया लेकिन सबसे करीब से इस कुदरती तूफान को झेला हमीरपुर ने जहां तेज आंधी-तूफान के कारण बेतवा नदी पर बन रहा निर्माणाधीन पुल गिर गया। हादसे में पुल के नीचे सो रहे 6 मजदूरों की मौत हो चुकी है और कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। पुलिस के अनुसार, तीनों पिलर में फंसे घायलों व मलबे में दबे शवों को निकालने का प्रयास किया जा रहा है। सभी मरने वाले व घायल बांदा और हमीरपुर के हैं। एसडीआरएफ की एक टीम मौके पर पहुंच गई है। 4PM बांदा रिपोर्टर इकबाल के मुताबिक शुक्रवार देर रात करीब 12:30 बजे आए भीषण आंधी-तूफान ने पूरे जिले में भारी तबाही मचा दी। लगभग 60 से 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली तेज हवाओं ने जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया। अचानक बदले मौसम ने लोगों को दहशत में डाल दिया। तेज धूल भरी आंधी, गरज-चमक और बारिश के बीच रात में ऐसा माहौल बन गया मानो प्रलय आ गई हो। तेज हवाओं की आवाज और उड़ती चीजों से लोग सहम गए और घरों में दुबकने को मजबूर हो गए। पेड़ उखड़े, बिजली व्यवस्था ध्वस्त हो गयी। आंधी के चलते जिले के कई इलाकों में पेड़ गिर गए बिजली के खंभे और तार क्षतिग्रस्त हो गए। कई जगहों पर टीन शेड उड़ गए और बड़े-बड़े होर्डिंग्स जमीन पर गिर पड़े। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के कई मोहल्लों में पूरी रात बिजली गुल रही। अचानक आए तूफान से लोगों ने भय और दहशत के बीच रात गुजारी। कई परिवार पूरी रात जागते रहे। सुबह तक भी हालात सामान्य नहीं हो सके थे। इस पूरी घटना के विपक्ष के निशाने पर बीजेपी सरकार आ गई है।
हर बार हादसे के बाद मौसम को दोष देकर सिस्टम फिर बच जाएगा
लेकिन सवाल यह है कि आखिर हर बार हादसे के बाद सिर्फ मौसम को दोष देकर क्या सिस्टम बच जाएगा? क्या हर बार आंधी ही पुल गिराती है या फिर पुल पहले से ही इतने कमजोर होते हैं कि पहली तेज हवा में ही उनका सच बाहर आ जाता है? यूपी इस वक्त एक्सप्रेसवे, हाईवे और मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर मॉडल का चेहरा बनाकर पेश किया जा रहा है। उद्घाटन, शिलान्यास, ड्रोन शॉट्स और चमकदार विज्ञापनों के बीच विकास की तस्वीर बनाई जा रही है। लेकिन उसी तस्वीर के पीछे एक दूसरी तस्वीर भी खड़ी है जहां अधूरे पुलों से कारें गिर रही हैं निर्माणाधीन ढांचे मजदूरों पर टूट रहे हैं और पुराने पुल बिना चेतावनी दम तोड़ रहे हैं। सवाल यह है कि क्या विकास की रफ्तार में गुणवत्ता की सांस घुट रही है? सबसे खतरनाक बात यह है कि हर हादसे के बाद स्क्रिप्ट लगभग एक जैसी होती है। पहले मौतें होती हैं। फिर जांच के आदेश। फिर कुछ इंजीनियर सस्पेंड। फिर मुआवजे की घोषणा। फिर कुछ दिनों तक राजनीतिक बयानबाजी। और फिर सन्नाटा। ऐसा सन्नाटा जिसमें अगला हादसा धीरे-धीरे तैयार होने लगता है।
प्रलय जैसा महौल
बीती रात आसमान सिर्फ बरसा नहीं बरपा था। हवाएं चीख रही थीं बिजली आसमान को चीर रही थी और बारिश धरती पर कहर बनकर टूट रही थी। लेकिन इस कुदरती तूफान के बीच जो सबसे बड़ा तूफान खड़ा हुआ वह इंसानी लापरवाही का था। क्योंकि जब बारिश थमी तब कई घरों में चीखें बची थीं मलबा बचा था और उन लोगों के शव पड़े थे जिन्हें शायद भरोसा था कि जिस पुल के नीचे वह सो रहे हैं वह पुल उन्हें कुछ नहीं होने देगा। इस हादसे के बाद हमीरपुर के लोग यह कहते सुनते लेकिन उत्तर प्रदेश में अब पुल सिर्फ रास्ते नहीं रहे वे डर का दूसरा नाम बनते जा रहे हैं। हमीरपुर में बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल का एक हिस्सा गिर गया और लोहे के भारी ढांचे और कंक्रीट के पहाड़ के नीचे मजदूर दब गए। कुछ वहीं खत्म हो गए कुछ अस्पताल पहुंचने से पहले हार गए।
मृतकों के आश्रितों को 5-5 लाख और घायलों को 5० हजार रुपए मुआवजा देगी सरकार
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पीडि़त परिवारों को 5-5 लाख रुपए और घायलों को 50-50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। सीएम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया है कि जनपद हमीरपुर में बेतवा नदी पर हुई जनहानि अत्यंत दुखद एवं हृदय विदारक है। मेरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिजनों के साथ हैं। जिला प्रशासन को एसडीआरएफ के साथ मिलकर राहत और बचाव कार्य तेजी से संचालित करने के लिए निर्देश दिए हैं। सीएम ने लिखा कि प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को अपने श्री चरणों में स्थान एवं घायलों को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ प्रदान करें। इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की है। सीएम की ओर से वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल मौके पर पहुंचने और राहत व बचाव कार्य तेज करने का प्रशासन को निर्देश दिया गया। साथ ही मुख्यमंत्री ने पीडि़त परिजनों से अधिकारियों की ओर से संवाद बनाकर हरसंभव सहायता उपलब्ध करवाने के भी निर्देश दिए।
कई जिलों में हो चुके हैं हादसे
बदायूं में अधूरे पुल से कार नदी में गिरी और तीन लोगों की मौत हो गई। कारण? बैरिकेडिंग नहीं थी। चेतावनी नहीं थी। जिम्मेदारी नहीं थी। महाराजगंज में निर्माणाधीन पुल की बीम गिरी और मजदूर घायल हुए। कानपुर-उन्नाव का पुराना गंगा पुल ढह गया। हर हादसा एक चेतावनी था लेकिन लगता है सिस्टम ने चेतावनी को खबर समझा, खतरा नहीं। आज एक बार फिर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यूपी में पुल सीमेंट से बन रहे हैं या सिर्फ राजनीतिक जल्दबाजी से? क्या उद्घाटन की तारीखें इंजीनियरिंग जांच से ज्यादा महत्वपूर्ण हो चुकी हैं? और आखिर कब तक हर पुल हादसे के बाद मौतों को दुर्भाग्य कहकर फाइल बंद कर दी जाएगी? क्योंकि सच यही है कि उत्तर प्रदेश में अब सिर्फ पुल नहीं गिर रहे बल्कि भरोसा गिर रहा है।
यूपी में हादसे हो रहे नीरो बंसी बजा रहा है : काका
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल गिरने पर समाजवादी पार्टी ने तीखा हमला किया है। सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज काका ने इस हादसे को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तंज कसा और कहा कि हवा के झरोखे से पुल गिर गया और लोगों की जान चली जाती है, उन्होंने यूपी में काम के नाम पर कमीशन का आरोप लगाया। सपा प्रवक्ता मनोज काका ने हमीरपुर पुल हादसे के पीछे कमीशन खोरी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हमीरपुर में निर्माणाधीन पुल सिर्फ हवा के दबाव से गिर गया 6 मजदूर भाइयों की जीन चली गयी, यूपी में विकास योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गयी है, इससे पहले चंदौली में 21 करोड़ के पुल का स्लैब गिर गया था। आखिर गिरते पुल की जिम्मेदारी किसकी है? गिरते पानी के टंकियों की जिम्मेदारी किसकी है योगी जी? पेपर लीक रोकने की जिम्मेदारी किसकी है योगी जी? रोम जल रहा है और नीरो चैन की बंसी बजा रहा है। सपा नेता मनोज काका ने बागेश्वर धाम के पंडित धीरेंद्र शास्त्री के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी है जिसमें उन्होंने आम लोगों से तेल की खपत कम करने की अपील पर नेताओं को भी बचत की नसीहत दी और चार्टेड प्लेन पर रोक लगाने की बात कही है, सपा प्रवक्ता ने कहा कि धीरेंद्र शास्त्री को हम रील में सुनते हैं उन्हें स्वयं में सुधार की आवश्यकता है, संविधान का अनुच्छेद 51 पढऩे की आवश्यकता है। उन्होंने स्वीकारा है तो अच्छी बात है कि बेरोजगारी बढ़ी है।
हमीरपुर के डीएम ने मौके पर किया मुआयना
हमीरपुर के डीएम अभिषेक गोयल ने पत्रकारों से बात करते हुए बताया है कि 28 और 29 मई की मध्यरात्रि करीब 2 बजे सूचना मिली कि थाना लालपुर क्षेत्र के मोराकंदर और कुरारा की मवाईजार को जोडऩे के लिए बन रहे पुल का स्लैब गिर गया है जिसके नीचे कुछ लोग दब गए हैं। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और हम सभी तत्काल मौके पर पहुंच गए। मौसम को लेकर पहले ही मौसम विभाग और प्रशासन ने एडवाइजरी जारी की गई थी। उन्होंने बताया कि हादसे के बाद राहत बचाव कार्य जारी किया गया। जानकारी के अनुसार कुछ मजदूर बारिश से बचने के लिए नीचे रखी गई मशीन के पास खड़े थे तभी ये हादसा हो गया। हमीरपुर के एएसपी अरविंद कुमार वर्मा ने बताया कि जैसे ही हम लोगों को सूचना मिली, स्थानीय पुलिस और हम सभी तत्काल मौके पर पहुंच गए थे। छह लोगों के मलबे में दबे होने की सूचना है जिनमें से पांच लोगों की पहचान कर ली गई है। स्लैब हटाकर उन्हें निकाला जाएगा। मृतकों में बांदा और हमीरपुर जनपद के श्रमिक शामिल बताए जा रहे।




