उन्नाव में अपराध चरम पर? BJP विधायक बोले- स्थानीय पुलिस नहीं, STF करेगी कार्रवाई

उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर अक्सर सरकार अपनी उपलब्धियां गिनाती रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार अपराध और अपराधियों के खिलाफ "जीरो टॉलरेंस" की नीति का दावा करती है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को लेकर अक्सर सरकार अपनी उपलब्धियां गिनाती रही है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार अपराध और अपराधियों के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” की नीति का दावा करती है। लेकिन उन्नाव जिले की पुरवा विधानसभा से भाजपा विधायक अनिल सिंह के हालिया बयान ने न केवल राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, बल्कि कानून व्यवस्था को लेकर भी कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

नगर पंचायत पुरवा में आयोजित एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान भाजपा विधायक अनिल सिंह ने मंच से क्षेत्र में जुआ, अवैध शराब, स्मैक और गांजा जैसे नशीले पदार्थों के कारोबार के संचालन का खुलकर जिक्र किया। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी दावा किया कि इन अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई के लिए स्थानीय पुलिस नहीं बल्कि लखनऊ से विशेष टीम और एसटीएफ को लगाया गया है।

विधायक के इस बयान के बाद अब विपक्ष सरकार पर हमलावर होने की तैयारी में है, वहीं आम जनता के बीच भी चर्चा तेज हो गई है कि आखिर यदि क्षेत्र में अपराध और अवैध कारोबार इतने बड़े स्तर पर संचालित हो रहे हैं तो जिम्मेदार एजेंसियां अब तक क्या कर रही थीं।

पूर्व सपा विधायक पर भी साधा निशाना

कार्यक्रम के दौरान भाजपा विधायक अनिल सिंह ने पूर्व समाजवादी पार्टी विधायक और चार बार के विधायक रह चुके उदयराज यादव पर भी तीखा हमला बोला। विधायक ने कहा कि,”उदयराज चाचा बिल्कुल सिकुड़ गए हैं क्योंकि अब माल नहीं मिल रहा है और दलालों का काम खत्म हो गया है।”

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी जनप्रतिनिधि द्वारा सार्वजनिक मंच से इस तरह की व्यक्तिगत टिप्पणी राजनीतिक मर्यादाओं पर भी सवाल खड़े करती है। विपक्षी दल इसे राजनीतिक शिष्टाचार के खिलाफ बता रहे हैं।

मंच से अपराधों का खुला जिक्र

अपने संबोधन के दौरान विधायक अनिल सिंह ने कहा कि पुरवा क्षेत्र में कुछ लोग जुआ खिलवाने, अवैध शराब बिकवाने तथा स्मैक और गांजा जैसे नशीले पदार्थों के कारोबार में लिप्त हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोगों की पहचान कर ली गई है और उनके खिलाफ जल्द ही बड़ी कार्रवाई होगी।

विधायक का यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह किसी विपक्षी नेता का नहीं बल्कि सत्तारूढ़ दल के विधायक का बयान है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि जनप्रतिनिधि स्वयं क्षेत्र में अवैध गतिविधियों की मौजूदगी स्वीकार कर रहे हैं तो क्या यह स्थानीय प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल नहीं है?

स्थानीय पुलिस पर अविश्वास का संकेत?

सबसे ज्यादा चर्चा विधायक के उस बयान की हो रही है जिसमें उन्होंने कहा कि कार्रवाई के लिए स्थानीय पुलिस को जिम्मेदारी नहीं दी गई है बल्कि लखनऊ से विशेष टीम और एसटीएफ को लगाया गया है।

उन्होंने दावा किया कि यह टीमें बिना किसी पूर्व सूचना के कार्रवाई करेंगी ताकि दोषियों को बचने का मौका न मिले। अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर एक विधायक को स्थानीय पुलिस पर भरोसा क्यों नहीं है? क्या स्थानीय पुलिस अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में असफल रही है? क्या स्थानीय स्तर पर कार्रवाई में किसी प्रकार की लापरवाही या मिलीभगत की आशंका है? या फिर यह केवल अपराधियों में भय पैदा करने के उद्देश्य से दिया गया बयान है? इन सवालों के जवाब फिलहाल सामने नहीं आए हैं।

कानून व्यवस्था पर विपक्ष को मिला नया मुद्दा

विधायक के बयान के बाद विपक्ष को सरकार पर हमला बोलने का नया अवसर मिल सकता है। विपक्ष लंबे समय से प्रदेश में अपराध की घटनाओं को लेकर सरकार को घेरता रहा है। ऐसे में जब सत्ताधारी दल का विधायक स्वयं मंच से जुआ, नशे और अवैध कारोबार के संचालन की बात स्वीकार कर रहा है, तो विपक्ष इसे सरकार की कानून व्यवस्था पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल कर सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह मामला आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति में भी चर्चा का विषय बन सकता है।

जनता के बीच भी उठ रहे सवाल

पुरवा क्षेत्र के लोगों के बीच भी इस बयान को लेकर चर्चा तेज है। लोगों का कहना है कि यदि वास्तव में क्षेत्र में जुआ, अवैध शराब और नशीले पदार्थों का कारोबार चल रहा है तो उसके खिलाफ पहले से प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई। स्थानीय लोगों के बीच यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि प्रशासन को इन गतिविधियों की जानकारी थी तो अब तक कितने लोगों के खिलाफ कार्रवाई की गई और उसके क्या परिणाम सामने आए।

सबसे बड़ा सवाल: जिम्मेदारी किसकी?

पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि क्षेत्र में अपराध और अवैध गतिविधियां चरम पर हैं तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी है? क्या स्थानीय पुलिस व्यवस्था विफल रही है? क्या प्रशासनिक स्तर पर निगरानी कमजोर रही? या फिर राजनीतिक दबाव के कारण कार्रवाई प्रभावित होती रही? इन सभी सवालों के जवाब आने वाले समय में प्रशासनिक कार्रवाई और अधिकारियों की प्रतिक्रिया से ही स्पष्ट हो पाएंगे।

प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार

फिलहाल भाजपा विधायक अनिल सिंह का बयान पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की नजर जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।

यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विधायक द्वारा लगाए गए आरोपों और किए गए दावों को प्रशासन किस प्रकार लेता है और क्षेत्र में जुआ, अवैध शराब, स्मैक तथा गांजा जैसे कथित अवैध कारोबारों के खिलाफ क्या ठोस कार्रवाई सामने आती है। यदि विधायक के दावे सही साबित होते हैं तो यह कानून व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न होगा, और यदि दावे गलत साबित होते हैं तो फिर सार्वजनिक मंच से दिए गए ऐसे बयानों की जिम्मेदारी भी तय करनी होगी। फिलहाल पुरवा की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों के केंद्र में भाजपा विधायक का यह बयान बना हुआ है।

रिपोर्ट- रंजन बाजपेई “निडर”,उन्नाव

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