CBT की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, तत्काल सुनवाई टली
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को NEET 2026 की री-एग्जाम को कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में कराने की मांग वाली याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को NEET 2026 की री-एग्जाम को कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में कराने की मांग वाली याचिका पर तुरंत सुनवाई करने से इनकार कर दिया. NEET-UG की मूल परीक्षा 3 मई को हुई थी, जिसमें पेपर लीक के आरोप लगने के बाद 12 मई को पूरी परीक्षा रद्द कर दी गई थी.
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को नीट 2026 की पुनर्परीक्षा (re-exam) के मामले में सुनवाई करने से इनकार कर दिया. ये आवेदन मौजूदा पेन-एंड-पेपर प्रारूप के बजाय कंप्यूटर-आधारित परीक्षा (सीबीटी) के रूप में आयोजित करने की मांग के बारे में था. इसमें परीक्षा के तरीके में संशोधन और इस जरूरी मेडिकल इंट्रेस एग्जाम की प्रणाली में सुधार के लिए तत्काल उपाय करने की मांग की गई है. इस याचिका पर तत्काल सुनवाई की मांग इसलिए की गई थी, क्योंकि 3 मई को आयोजित नीट-यूजी की मूल परीक्षा पेपर लीक के आरोपों के बाद 12 मई को देशभर में रद्द कर दी गई थी.
इसके बाद सीबीआई ने जांच शुरू की और परीक्षा को 21 जून के लिए पुनर्निर्धारित किया गया. रिपोर्टों के अनुसार विवाद तब शुरू हुआ जब जांचकर्ताओं ने एक अनुमानित पेपर की जांच की, जो कथित तौर पर वास्तविक प्रश्न पत्र के एक बड़े हिस्से से मेल खाता था. इससे यह आशंका पैदा हुई कि परीक्षा से पहले गोपनीय परीक्षा सामग्री प्रसारित की गई थी.
केवल सीबीटी मोड में हो री-एग्जाम
इस कथित लीक के कारण कई राज्यों में छात्रों और अभिभावकों ने विरोध प्रदर्शन किया और NTA की परीक्षा प्रक्रियाओं की गहन जांच शुरू हो गई. सुनवाई से इंकार करते हुए जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने मामले को जुलाई तक के लिए स्थगित कर दिया, जिससे प्रभावी रूप से नीट पुनर्परीक्षा की राहत से इनकार कर दिया गया. याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि केवल सीबीटी मोड में पुनर्परीक्षा कंप्यूटर के जरिए आयोजित करने के आवेदन पर जोर दे रहे हैं.
वकील ने कहा कि आज मैं कोई अन्य मांग नहीं कर रहा हूं. इस पर जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि कोर्ट ने पहले भी इसी तरह की मांगों को खारिज कर दिया है. तब वकील ने कहा कि 21 जून को होने वाली पुनर्परीक्षा के लिए भौतिक आधार पर परीक्षा प्रक्रिया आगे बढ़ा रहे हैं. इस पर बेंच ने परीक्षा प्राधिकारियों के सामने आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों की ओर इशारा किया.
पहले भी खारिज कर चुकी है याचिका
जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि इस स्तर पर ऐसी राहत देने का कोई सवाल ही नहीं उठता और यह भी जोड़ा कि प्राधिकारी पहले से ही कई महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना कर रहे हैं. जस्टिस नरसिम्हा ने आगे कहा कि आप जानते हैं कि किस तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. परीक्षा रद्द कर दी गई थी, अब इसे दोबारा आयोजित किया जा रहा है. अधिकारियों पर पड़ रहे दबावों पर ध्यान दें और दोहराया कि इसी तरह की याचिकाएं पहले भी खारिज की जा चुकी हैं.
अदालत इस मामले में तत्काल सुनवाई नहीं करेगी. इसे अवकाश के बाद सुनवाई के लिए रखेंगे. बेंच ने इस आवेदन को एनटीए में सुधार की मांग करने वाली अन्य याचिकाओं के साथ संलग्न कर दिया. मुख्य याचिकाओं में याचिकाकर्ताओं ने सुरक्षित सीबीटी प्रणाली के माध्यम से पुनर्परीक्षा आयोजित करने के निर्देश मांगे हैं. उनका तर्क है कि डिजिटल परीक्षाएं प्रश्न पत्रों की छपाई, परिवहन और भौतिक रूप से संभालने से जुड़े जोखिमों को कम करेंगी. मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जिसने केंद्र, NTA और CBI से जवाब मांगा है और मामले को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है.



