क्या POCSO का हो रहा है गलत इस्तेमाल? सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता

सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों में पॉक्सो एक्ट के तहत झूठे मामलों की बढ़ती संख्या पर गहरी चिंता जताई है. कोर्ट ने चेतावनी दी कि आपराधिक कानून का ऐसा दुरुपयोग लोगों की मुश्किलों को बढ़ाता है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सुप्रीम कोर्ट ने वैवाहिक विवादों में पॉक्सो एक्ट के तहत झूठे मामलों की बढ़ती संख्या पर गहरी चिंता जताई है.

कोर्ट ने चेतावनी दी कि आपराधिक कानून का ऐसा दुरुपयोग लोगों की मुश्किलों को बढ़ाता है. इसके साथ ही ये गैरजरूरी बोझ को भी बढ़ाता है. इन मामलों का मकसद अक्सर आर्थिक लाभ या विरोधी पक्ष को परेशान करना होता है.

सुप्रीम कोर्ट ने शादी और दूसरे व्यक्तिगत विवाद के मामले में यौन अपराध से बच्चों के संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत दायर किए जा रहे झूठे और निराधार मामलों की बढ़ती संख्या पर चिंता जाहिर की है. सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी है कि आपराधिक कानून का ऐसा दुरुपयोग निर्दोष लोगों को बहुत कष्ट पहुंचाता है और न्याय की व्यवस्था पर बोझ भी डालता है.एक फैसले में कोर्ट ने पाया कि विवाह से जुड़े विवादों में पीओसीएसओ अधिनियम के तहत पति, विशेषकर बेटियों के पिता के खिलाफ आरोप लगाए जाने की संख्या बढ़ रही है.

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, ऐसी शिकायतों का इस्तेमाल कभी-कभी वैवाहिक मुकदमों में फायदा लेने से ज्यादा आर्थिक मुआवजा हासिल करने के लिए किया जाता है. कई मामलों में तो विरोधी पक्ष को परेशान करने की भी मंशा होती है.

10 से ज्यादा मामले कोर्ट ने किए रद्द
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुयान की पीठ ने पीओसीएसओ अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के रेप प्रावधानों के तहत पति और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ दायर 10 से ज्यादा आपराधिक मामलों को रद्द करते हुए ये टिप्पणियां कीं.

पत्नी की शिकायत पर दायर किए गए मामलों में से एक में आरोप लगाया गया था कि उसकी 14 साल की बेटी का उसके पति और देवर ने रेप किया. पति के परिवार के दूसरे सदस्यों ने उसके साथ मारपीट की. कोर्ट ने इन मामलों को निराधार, मनगढ़ंत और भ्रामक पाया है. इसे खारिज करते हुए कोर्ट ने वैवाहिक मुकदमों में यौन उत्पीड़न के आरोप जोड़ने की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जाहिर की.

क्या है पॉक्सो कानून?
पॉक्सो (POCSO) कानून, 2012 बच्चों को ऑनलाइन शोषण सहित हर तरह के यौन अपराधों से बचाता है. धारा 12 के मुताबिक, बच्चे को अश्लील बातें कहना, अश्लील फोटो या वीडियो दिखाना या गलत इरादे से बार-बार संपर्क करना इस धारा के तहत अपराध है.

धारा 13 के मुताबिक गलत इरादे से किसी भी मीडिया (इंटरनेट, अखबार या टीवी) में बच्चे का इस्तेमाल करने को अपराध मानती है. धारा 14 के मुताबिक, पहली बार अपराध करने पर कम से कम 5 साल की जेल और जुर्माना होता है. दोबारा पकड़े जाने पर कम से कम 7 साल की जेल और जुर्माना है. धारा 15 के मुताबिक, बच्चों की अश्लील सामग्री (Pornography) पास में रखने, छुपाने या उसकी जानकारी पुलिस को न देने पर अलग-अलग सजा तय करती है.

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