आम तोड़ने की परेशानी खत्म! मीरजापुर के युवक ने बना दी कमाल की मशीन
मीरजापुर के युवा नवप्रवर्तक आर्यन प्रसाद ने आम और बेल जैसे फलों को सुरक्षित तरीके से तोड़ने वाली मशीन विकसित की है। मशीन में लगे बैग की मदद से फल जमीन पर नहीं गिरते। अब तक 120 मशीनें विभिन्न राज्यों में बेची जा चुकी हैं।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: ग्रामीण क्षेत्रों में आम, बेल और अन्य ऊंचे पेड़ों पर लगे फलों को तोड़ना हमेशा से चुनौतीपूर्ण काम रहा है। कई बार फल तोड़ते समय जमीन पर गिरकर खराब हो जाते हैं, तो कई बार लोगों को जोखिम उठाकर पेड़ों पर चढ़ना पड़ता है। इसी समस्या का समाधान खोजते हुए मीरजापुर के एक युवा नवप्रवर्तक ने ऐसी मशीन तैयार की है, जो फलों को आसानी से तोड़ने के साथ उन्हें सुरक्षित भी रखती है।
मीरजापुर जनपद के अहरौरा स्थित कलाम इनोवेशन लैब से जुड़े नवप्रवर्तक आर्यन प्रसाद ने एक सरल और किफायती फल तोड़ने वाली मशीन विकसित की है, जिसकी चर्चा अब जिले से बाहर भी होने लगी है।
मशीन की खासियत: फल नहीं गिरेंगे जमीन पर
आर्यन प्रसाद द्वारा विकसित इस मशीन में एक विशेष बैग लगाया गया है। जब फल पेड़ से टूटता है तो वह सीधे बैग में सुरक्षित पहुंच जाता है। इससे फल जमीन पर गिरकर खराब नहीं होते और किसानों तथा बागवानों को नुकसान से बचाया जा सकता है। यह मशीन विशेष रूप से आम, बेल और अन्य मध्यम आकार के फलों की तुड़ाई के लिए उपयोगी बताई जा रही है। इसकी डिजाइन ऐसी है कि इसे आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है।
पहले भी बना चुके हैं कई उपयोगी उपकरण
जिला विज्ञान क्लब मीरजापुर के समन्वयक सुशील कुमार पाण्डेय के अनुसार आर्यन प्रसाद एक जुझारू और प्रयोगधर्मी नवप्रवर्तक हैं। इससे पहले भी वे गोभी काटने की मशीन विकसित कर चुके हैं। उनके नवाचारों को राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिल चुकी है। वह अपने नवप्रवर्तनों का प्रदर्शन अहमदाबाद स्थित प्रतिष्ठित नवाचार मंचों पर भी कर चुके हैं।
स्टार्टअप के जरिए बना रहे पहचान
तकनीकी नवाचार को व्यवसायिक रूप देने के लिए आर्यन प्रसाद ने “संदीपन एग्रो” नाम से एक स्टार्टअप की शुरुआत की है। इस पहल के माध्यम से वे किसानों और बागवानों के लिए उपयोगी उपकरण तैयार कर रहे हैं। फल तोड़ने वाली मशीन की मांग लगातार बढ़ रही है। आर्यन के अनुसार अब तक वे करीब 120 मशीनें तैयार कर विभिन्न राज्यों में बेच चुके हैं। साथ ही उन्हें नए ऑर्डर भी लगातार प्राप्त हो रहे हैं।
कीमत भी रखी गई किफायती
आर्यन प्रसाद ने बताया कि मशीन का बेसिक मॉडल लगभग 300 रुपये में उपलब्ध है, जबकि बैग सहित पूर्ण मशीन की कीमत 2500 रुपये निर्धारित की गई है। कम लागत और आसान उपयोग के कारण यह उपकरण छोटे किसानों और बागवानों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है।
ग्रामीण नवाचार को मिल रही नई पहचान
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के स्थानीय नवाचार न केवल किसानों की मेहनत कम करते हैं, बल्कि कृषि कार्यों को अधिक सुरक्षित और प्रभावी भी बनाते हैं। आर्यन प्रसाद जैसे युवा नवप्रवर्तक यह साबित कर रहे हैं कि सीमित संसाधनों के बावजूद स्थानीय समस्याओं का समाधान खोजा जा सकता है। मीरजापुर के इस युवा का प्रयास अब ग्रामीण नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति का प्रेरणादायक उदाहरण बनता जा रहा है।
रिपोर्ट – संतोष देव गिरी
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