बाणसागर परियोजना ने बदली मिर्जापुर की खेती की तस्वीर, किसान अब नकदी फसलों और डेयरी व्यवसाय की ओर बढ़े
मिर्जापुर के लालगंज क्षेत्र में बाणसागर परियोजना की सिंचाई सुविधा ने खेती की तस्वीर बदल दी है। किसान अब नकदी फसलों और डेयरी व्यवसाय की ओर बढ़ रहे हैं। इससे उत्पादन, आय और ग्रामीण रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

4पीएम न्यूज नेटवर्क: मिर्जापुर जिले के लालगंज क्षेत्र में बाणसागर परियोजना का पानी किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर उभरा है। कभी बारिश पर निर्भर रहने वाली खेती अब नियमित सिंचाई सुविधा के कारण नई दिशा पकड़ रही है। किसान पारंपरिक खेती के दायरे से निकलकर नकदी फसलों, डेयरी व्यवसाय और कृषि आधारित स्वरोजगार की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। इसका असर न केवल कृषि उत्पादन पर दिखाई दे रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार के अवसरों पर भी सकारात्मक रूप से पड़ा है।
इसी बदलाव को समझने के लिए बाणसागर परियोजना के मुख्य अभियंता विजय कुमार श्रीवास्तव ने शुक्रवार को लालगंज तहसील क्षेत्र स्थित मेजा-जरगो लिंक नहर का निरीक्षण किया और किसानों तथा डेयरी उद्यमियों से संवाद किया।
किसानों ने बताई खेती में आई बड़ी बदलाव की कहानी
निरीक्षण के दौरान किसानों ने मुख्य अभियंता को बताया कि नहरों के माध्यम से नियमित जलापूर्ति मिलने के बाद खेती की तस्वीर पूरी तरह बदल गई है। पहले जहां सिंचाई की अनिश्चितता के कारण सीमित फसलें उगाई जाती थीं, वहीं अब किसान व्यावसायिक और नकदी फसलों की खेती कर रहे हैं।
पुरुषोत्तम पट्टी गांव के प्रगतिशील किसान परमेश्वर मौर्य ने बताया कि सिंचाई सुविधा बेहतर होने से खरबूजा सहित कई नकदी फसलों का उत्पादन बढ़ा है। उनकी उपज अब केवल स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं है, बल्कि मिर्जापुर, वाराणसी, प्रयागराज, रीवा और जबलपुर जैसे बड़े बाजारों तक पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि सालभर पानी उपलब्ध रहने से खेती का रकबा बढ़ा है और किसानों की आमदनी में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
डेयरी व्यवसाय को भी मिला बड़ा सहारा
मुख्य अभियंता ने डेयरी व्यवसाय से जुड़े अचलेंद्र मौर्य से भी बातचीत की। उन्होंने बताया कि सिंचाई व्यवस्था मजबूत होने से हरे चारे का उत्पादन बढ़ा है, जिसका सीधा असर दुग्ध उत्पादन पर पड़ा है। अचलेंद्र मौर्य के अनुसार, डेयरी गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। जो युवा पहले रोजगार की तलाश में सूरत, मुंबई और दिल्ली जैसे महानगरों की ओर पलायन करते थे, वे अब गांव में रहकर डेयरी और कृषि आधारित व्यवसाय से जुड़ रहे हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिली नई रफ्तार
किसानों ने बताया कि बाणसागर परियोजना ने केवल सिंचाई सुविधा ही नहीं दी, बल्कि ग्रामीण विकास को भी नई गति प्रदान की है। खेती और डेयरी से होने वाली आय बढ़ने के कारण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ने से युवाओं का पलायन भी कम हुआ है। इससे गांवों में आर्थिक गतिविधियों का दायरा लगातार विस्तृत हो रहा है।
किसानों को पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने का आश्वासन
दौरे के दौरान अधीक्षण अभियंता ओपी मौर्य ने किसानों को भरोसा दिलाया कि उनकी जरूरत के अनुसार सिंचाई जल उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जलापूर्ति को लेकर कोई समस्या नहीं है और आगामी फसलों के लिए भी पर्याप्त मात्रा में पानी उपलब्ध रहेगा। उन्होंने कहा कि विभाग की प्राथमिकता किसानों तक समय पर सिंचाई सुविधा पहुंचाना है ताकि उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि हो सके।
पौधरोपण कर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
निरीक्षण कार्यक्रम के दौरान मुख्य अभियंता विजय कुमार श्रीवास्तव ने थरपरसिया गांव में पौधरोपण भी किया। अधिकारियों ने कहा कि सिंचाई परियोजनाओं के साथ पर्यावरण संरक्षण भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
अधिकारियों के अनुसार, नहर तंत्र से जुड़े लालगंज क्षेत्र के हजारों किसान बाणसागर परियोजना से सीधे लाभान्वित हो रहे हैं और यहां व्यावसायिक कृषि का एक नया मॉडल विकसित हो रहा है, जो अन्य क्षेत्रों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है। इस अवसर पर अधिशासी अभियंता श्याम किशोर गुप्ता, एसडीओ शिव गोविंद, सहायक अभियंता मनीष कुमार, अनिल कुमार, आशुतोष मिश्रा, जयप्रकाश, रजनीश शुक्ला, नंदेश्वर और वीरेंद्र कुमार सहित कई अधिकारी मौजूद रहे।
रिपोर्ट – संतोष देव गिरी
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