रिटायरमेंट उम्र पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी, जज सरकारी कर्मचारी नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वे संविधान के तहत नियुक्त होते हैं और एक अलग वर्ग हैं. इसलिए उनके लिए रिटायरमेंट की उम्र अलग हो सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा जैसे प्रोफेसर और डॉक्टरों की उम्र पहले से अलग होती है, वैसे ही जजों की भी हो सकती है.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि न्यायिक अधिकारी सरकारी कर्मचारी नहीं होते. वे एक अलग और खास श्रेणी में आते हैं. सुप्रीम कोर्ट की तरफ से टिप्पणी किस मामले में की गई? इसके बारे में जानते हैं.
जजों के रिटायरमेंट के एक प्रस्ताव में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी की. कोर्ट ने कहा जज सरकारी कर्मचारी नहीं होते. वे एक अलग और खास श्रेणी में आते हैं. सुप्रीम कोर्ट जिला जजों की रिटायरमेंट उम्र 60 साल से बढ़ाकर 62 साल करने के प्रस्ताव पर सुनवाई करते हुए कह रहा था. कुछ राज्य सरकारें इस बढ़ोतरी का विरोध कर रही थीं.
सरकारों का तर्क था कि अगर जजों की उम्र बढ़ा दी गई तो दूसरे सरकारी कर्मचारियों से भेदभाव हो जाएगा, क्योंकि वे भी राज्य के कर्मचारी हैं. इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जज सरकारी कर्मचारी नहीं हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वे संविधान के तहत नियुक्त होते हैं और एक अलग वर्ग हैं. इसलिए उनके लिए रिटायरमेंट की उम्र अलग हो सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा जैसे प्रोफेसर और डॉक्टरों की उम्र पहले से अलग होती है, वैसे ही जजों की भी हो सकती है.
दूसरे कर्मचारी लगा सकते हैं भेदभाव का आरोप
सुनवाई के दौरान ये तर्क दिया गया कि जिन राज्यों में सरकारी कर्मचारी जल्दी रिटायर हो जाते हैं, वहां ज्यूडिशियल अधिकारियों की रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने से दूसरे कर्मचारी भेदभाव का आरोप लगा सकते हैं, क्योंकि ज्यूडिशियल अधिकारी भी राज्य के ही कर्मचारी होते हैं. कोर्ट ने इस तुलना को खारिज कर दिया और कहा कि ज्यूडिशियल अधिकारी एक अलग श्रेणी में आते हैं, इसलिए उनके लिए रिटायरमेंट की उम्र अलग हो सकती है, जो एक उचित वर्गीकरण पर आधारित हो सकती है.
हाई कोर्ट्स को क्या दिया था निर्देश?
सुप्रीम कोर्ट ने 22 जुलाई को हाई कोर्ट्स से कहा था कि वे न्यायिक अधिकारियों की रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने पर एक तय समय-सीमा के भीतर फैसला लें. अंतरिम व्यवस्था के तौर पर, कोर्ट ने कहा था कि जहां राज्य सरकार और संबंधित हाई कोर्ट रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने पर सहमत हों, वहां संबंधित न्यायिक अधिकारियों को बढ़ी हुई रिटायरमेंट की उम्र तक सेवा में बने रहने की अनुमति दी जा सकती है. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया था कि उम्र बढ़ाने पर कोई भी अंतिम फैसला 1 अप्रैल, 2026 या उसके बाद होने वाली रिटायरमेंट पर लागू होगा.



