ममता बनर्जी के लिए कौन बना ढाल, किसने बनाई दूरी?
ममता की पार्टी TMC आज गहरे संकट से जूझ रही है, लेकिन उसका सबसे चर्चित हिस्सा आज अजीब तरह से खामोश दिख रहा है. और वो है 'टॉलीवुड ब्रिगेड'.

4पीएम न्यूज नेटवर्क: ममता की पार्टी TMC आज गहरे संकट से जूझ रही है, लेकिन उसका सबसे चर्चित हिस्सा आज अजीब तरह से खामोश दिख रहा है. और वो है ‘टॉलीवुड ब्रिगेड’. पार्टी के गठन के बाद से ही ममता ने सिनेमा टेलीविजन और खेल की दुनिया से जुड़े हस्तियों पर जमकर भरोसा किया, लेकिन अब चुप्पी साधे हुए है.
पश्चिम बंगाल में लगातार 15 साल तक सत्ता में रहने वाली ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (TMC) चुनाव में शिकस्त खाने के बाद लगातार संकट में घिरी हुई है. हालत यह हो गई है कि 1998 में बनी ममता की यह पार्टी आज अपने सबसे बड़े अस्तित्व के संकट का सामना कर रही है. विधानसभा चुनावों में BJP से करारी हार के बाद, पार्टी अब अपनी पहली बड़ी खुली बगावत का सामना कर रही है. संकट के दौर में पार्टी में एक ऐसा वर्ग भी है जो चुप्पी साधे हुए है तो कुछ लोग खुलकर ममता के साथ होने का दावा कर रहे हैं.
ममता की पार्टी TMC में एक के बाद एक गहरे संकट से जूझ रही है, तो उसका एक सबसे चर्चित हिस्सा अजीब तरह से खामोश दिख रहा है और वो है फिल्मी सितारों से सजी ‘टॉलीवुड ब्रिगेड’. पार्टी के गठन के बाद से ही ममता ने सिनेमा टेलीविजन और खेल की दुनिया से जुड़े हस्तियों पर जमकर भरोसा किया और इन लोगों में पार्टी की चुनावी और पब्लिक इमेज लगातार चमकाए रखा.
4 मई के बाद कइयों ने साध ली चुप्पी
पार्टी गठन के 3 साल बाद ही 2001 में राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री और CPI(M) के दिग्गज नेता बुद्धदेव भट्टाचार्य के खिलाफ जादवपुर सीट से अनुभवी अभिनेत्री माधबी मुखर्जी को मैदान में उतारा था. ममता अपनी फायर ब्रांड छवि के साथ-साथ इन ग्लैमरस चेहरों के साथ अपनी सियासत आगे बढ़ाती चली गईं. इसका उन्हें फायदा हुआ. बड़ी संख्या में एक्टर, डायरेक्टर, सिंगर और खिलाड़ियों को चुनावी मैदान में उतारा और इनमें से ज्यादातर सांसद और विधायक भी बने.
खालिस राजनीति करने वाले नेता भी ममता के इन सितारों के प्रति नरम रूख को लेकर खफा रहते थे लेकिन उन्होंने खुलकर कभी शिकायत भी नहीं, लेकिन अब यह ‘टॉलीवुड ब्रिगेड’ 4 मई को पार्टी को मिली चुनावी शिकस्त के बाद से चुप्पी साधे हुए हैं. ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में पार्टी में बगावत के बाद भी ये ब्रिगेड शांत ही दिख रहा है. सियासी गलियारों में यह कयास भी है कि इसके कई सदस्यों ने या तो खामोशी का चोला ओढ़ लिया है या फिर पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा पर फिर से विचार करने में जुट गए हैं.
टीएमसी में टॉलीवुड ब्रिगेड का दबदबा
टीएमसी की टॉलीवुड ब्रिगेड (पश्चिम बंगाल की फिल्म इंडस्ट्री) में शताब्दी रॉय, तापस पॉल, देव और मिमी चक्रवर्ती जैसे बड़े नाम शामिल हैं. इनके अलावा कुछ अन्य फिल्मी सितारों में दीपक अधिकारी (जिन्हें देव के नाम से जाना जाता है), नुसरत जहां, रचना बनर्जी, सायंतिका बनर्जी, सयानी घोष, सोहम चक्रवर्ती, हिरन चटर्जी, जून मालिया, कंचन मल्लिक, कौशानी मुखर्जी और डायरेक्टर राज चक्रवर्ती भी पार्टी का हिस्सा रहे हैं.
पार्टी ने कला जगत से जुड़े बड़े कलाकारों जैसे शताब्दी रॉय, मून मून सेन, संध्या रॉय, इंद्रनील सेन, विदेश बोस, जोगेन चौधरी और दिवंगत तापस पॉल को अपने साथ जोड़ा. जबकि बॉलीवुड सिंगर से नेता बने बाबुल सुप्रियो, क्रिकेटर यूसुफ पठान, कीर्ति आजाद और मनोज तिवारी, और डिप्लोमैट-लेखक पवन वर्मा जैसी बड़ी राष्ट्रीय हस्तियों को भी शामिल किया.
सक्रिय सांसद सयानी की चुप्पी
टीएमसी के कई सेलिब्रिटीज अपनी मुखरता और सक्रियता के लिए जाने जाते हैं. इनमें सांसद सयानी घोष सबसे चर्चित नाम है. वह 2021 में पार्टी में शामिल हुई थीं. बेबाक राय रखने वाली सयानी ने भी बगावत के मसले पर पूरी तरह चुप्पी साध रखी है.
चुनाव नतीजों के बाद, उन्हें कालीघाट में एक बैठक में देखा गया, जहां उन्होंने सार्वजनिक रूप से पार्टी के प्रति अपनी निष्ठा जाहिर की. हालांकि, पिछले कुछ दिनों में, उन्हें ममता द्वारा बुलाई गई किसी भी बैठक या धरने के कार्यक्रम में नहीं देखा गया है. नए हालात पर उनके मौजूदा रुख को लेकर स्थिति साफ नहीं है.
ममता के साथ दिख रहे कल्याण बनर्जी
वरिष्ठ सांसद कल्याण शुरू से ही ममता बनर्जी के साथ रहे हैं. उन्हें ममता के धरने में शामिल होते और भाषण देते देखा गया है. पार्टी में नया गुट बनाने के बाद भी, कल्याण ने इसकी कानूनी वैधता पर सवाल उठाए और कानूनी रास्ता अपनाने की बात कही. कल्याण की तरह पूर्व सांसद डेरेक ओ’ब्रायन भी शुरू से ही ममता के साथ रहे हैं. कालीघाट की बैठक से लेकर ममता के धरने के कार्यक्रम तक, हर जगह उनकी मौजूदगी देखी गई है.
महुआ मोइत्रा का ममता बनर्जी को साथ
कृष्णानगर की सांसद महुआ मोइत्रा चुनाव नतीजों के बाद से ही ज्यादातर सार्वजनिक रूप से नहीं दिखी हैं. हालांकि, हाल ही में उन्होंने सोशल मीडिया पर नए गुट के बारे में अपनी राय रखी. उन्होंने ममता का मजबूती से समर्थन करते हुए कहा, “जो लोग ऐसा कर रहे हैं, वे खुद को असली तृणमूल नहीं कह सकते.”
काकोली घोष दस्तीदार का बागी तेवर
नतीजों की घोषणा के बाद से ही बारासात की महिला सांसद का बागी रुख ही रहा है. उन्होंने टीएमसी में अपने सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है और सार्वजनिक रूप से पार्टी से अपनी नाराज़गी जाहिर की है. वह सीएम शुभेंदु अधिकारी की बुलाई गई बैठक में भी शामिल हुई थीं.
ममता के साथ खड़े दिख रहे सुदीप बनर्जी
लोकसभा सांसद और तृणमूल के सबसे वरिष्ठ नेताओं में से एक, सुदीप बनर्जी ने भी अब तक कुछ खास नहीं कहा है. हालांकि, उनकी पत्नी और चौरंगी से पार्टी विधायक नैना बनर्जी ममता के साथ लगातार बनी हुई हैं. उन्हें धरने वाली जगह पर ममता के ठीक बगल में बैठे देखा गया है.
पूर्व सांसद ऋतब्रत बनर्जी के बागी तेवर
तृणमूल के पूर्व सांसद ऋतब्रत बनर्जी अब विपक्ष के नेता बनने की कोशिश में लगे हैं. उन्होंने 58 अन्य विधायकों के साथ विधानसभा स्पीकर को एक पत्र सौंपा है, जिसमें उन्होंने खुद को “असली” तृणमूल बताया है.
ममता के साथ मंच पर दिखीं डोला सेन
ममता की लंबे समय से सहयोगी रहीं डोला सेन ने भी ममता का साथ नहीं छोड़ा है. वह धरने वाली जगह पर मौजूद थीं. हार के बाद भी, वह ममता के लगभग सभी कार्यक्रमों में दिखाई देती रही हैं.
हार के बाद भी साथ खड़े चंद्रिमा भट्टाचार्य
राज्य की पूर्व मंत्री और पेशे से वकील, चंद्रिमा भट्टाचार्य की ममता सरकार में हमेशा अहम भूमिका रही है और स्वास्थ्य और वित्त जैसे अहम विभाग भी संभाला है. दमदम सीट से हारने के बावजूद, वह ममता के सभी कार्यक्रमों में शामिल होती रही हैं. उन्हें भी धरने के मंच पर ममता के ठीक बगल में बैठे हुए देखा गया.
चुनाव के बाद ज्यादा नहीं दिखे ब्रत्या बसु
ब्रत्या बसु तृणमूल सरकार के दौरान शिक्षा मंत्री रहे. मंत्री रहते हुए वह अक्सर विवादों में घिरे रहे. उन्हें अक्सर किसी भी मुद्दे पर पार्टी की ओर से मीडिया से बात करते देखा जाता था. हालांकि, हार के बाद वह न तो सार्वजनिक रूप से दिखाई देते हैं और न ही मीडिया से बात करते हुए सुने जाते हैं. उनका भी मौजूदा रुख साफ नहीं है.
एक्टर देव अधिकारी ने दी बीजेपी को बधाई
इसी तरह एक्टर देव अधिकारी ने चुनाव परिणाम आने के बाद 6 मई को BJP को उसकी शानदार जीत के लिए बधाई दी, जबकि इसी समय टीएमसी के शीर्ष नेता जोर-शोर से चुनाव में चोरी के आरोप लगाए जा रहे थे. ममता बनर्जी ने ऐलान कर चुका थीं कि वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगी. अभिनेता-निर्देशक परमब्रत चटर्जी, जो पार्टी से आधिकारिक रूप से नहीं जुड़े, लेकिन वे टीएमसी उम्मीदवारों के लिए जमकर प्रचार करते रहे. वो भी इस मसले पर चुप हैं.
संकट में साथ दिख रहे बाबुल सुप्रियो
हालांकि गायक से नेता बने बाबुल सुप्रियो ने संकट के दौर में खुलकर ममता के साथ खड़े होने का दावा किया. राज्यसभा सांसद बाबुल सुप्रियो ने पार्टी प्रमुख के लिए अपना समर्थन जाहिर किया. उन्होंने कहा कि “अच्छे समय में भले ही न हों, लेकिन बुरे समय में” वह उनके साथ खड़े रहेंगे. उन्होंने फ़ेसबुक पर अपने 2 लंबे पोस्ट के जरिए ममता का जोरदार बचाव किया. उन्होंने कहा कि कोई भी परिस्थिति हो, वह दीदी के साथ ही रहेंगे. बाबुल पहले बीजेपी में थे बाद में टीएमसी में चले गए.
लेकिन जब ममता-अभिषेक बनर्जी के दबदबे के खिलाफ CPM से पार्टी में आए ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में खुली बगावत हो रही है तो ये दिग्गज सितारे जिनका राजनीतिक करियर और जीत ममता के समर्थन की वजह से मिली, इस नए मामले से दूरी बनाए हुए हैं. हालत यह हो गई है कि इनमें से कुछ लोगों ने तो पार्टी से दूरी बनाना भी शुरू कर दिया है.
आगे ममता के साथ कौन खड़ा होगा
चुनाव परिणाम के अगले ही दिन 5 मई को क्रिकेटर से नेता बने मनोज तिवारी ने टीएमसी छोड़ने का ऐलान कर दिया. उन्हें चुनाव में BJP की पापिया अधिकारी हार मिली थी. इस्तीफे के साथ ही निवर्तमान खेल मंत्री अरूप बिस्वास पर तीखा हमला भी बोला था. अब देखना होगा कि वक्त के साथ-साथ ममता के साथ कौन खड़ा होता है और कौन उनके खिलाफ बगावत का रास्ता अपनाते हुए नई मंजिल तलाशता है.



